रिटायर IAS रमेश थेटे के लेटर के बाद सामने आया दिग्विजय का Tweet

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट

हाल ही में मध्य प्रदेश (madhypradesh) के चर्चित आईएएस अधिकारी रमेश एस. थेटे (Ramesh Thete) रिटायर हुए है। 31 जुलाई को अपने रिटायरमेंट के दिन थेटे भावुक हो गए थे और उनके अंदर दबा सालों का दर्द बाहर आ गया था। मीडिया को जारी पत्र में उन्होंने कहा था कि अब मैं गुलामी से मुक्त ही गया हूँ, आईएएस (IAS) होने के बावजूद मुझे कलेक्टर नहीं बनने दिया। प्रमुख सचिव पद पर पदोन्नति नहीं दी।‘मैंने आंबेडकरवादी होने की कीमत चुकाई। रिटायर होना मेरे लिए गुलामी से मुक्ति जैसा है। अब इस पूरे घटनाक्रम पर पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह (Former Chief Minister and Congress Rajya Sabha MP Digvijay Singh) ने ट्वीट किया है।ट्वीट में उन्होंने थेटे की मदद ना कर पाने पर दुख जताया है। खास बात ये है कि रमेश थेटे 1993 में आईएएस बने। 1993-2003 तक काँग्रेस के दिग्विजय सिंह मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री थे।

दरअसल, रिटायरमेंट के बाद थेटे मीडिया में जारी लेटर के बाद राज्यसभा सांसद दिग्विजय ट्वीट कर लिखा है कि रिटायरमेंट के दिन छलका IAS का दर्द, ‘मुझे कलेक्टर नहीं बनने दिया, स्वाभिमानी अंबेडकरवादी होने की कीमत चुकाई’ । मेरी सहानुभूति रमेश थेटे के साथ सदैव रही है। मुझे दुख है इनकी जितनी मदद मैं करना चाहता था, चाहने के बाद भी नहीं कर पाया।

वही भिंड-दतिया लोकसभा सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी रहे युवा नेता देवाशीष जरारिया ने भी ट्वीट कर लिखा है कि अम्बेडकरवादी होने के कारण 15 वर्षो तक प्रताड़ित किया। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रिटायरमेंट के दिन बोले गुलामी से मुक्ति मिल रही है।

मीडिया के नाम आईएएस रमेश थेटे का पत्र
मीडिया को जारी पत्र में रमेश थेटे ने लिखा कि अब मैं गुलामी से मुक्त ही गया हूँ, आईएएस (IAS) होने के बावजूद मुझे कलेक्टर नहीं बनने दिया, प्रमुख सचिव पद पर पदोन्नति नहीं दी। वही उन्होंने लिखा है कि 25 जुलाई को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chauhan) को पत्र लिखकर सेवानिवृत्ति से पहले प्रमुख सचिव पद पर प्रमोशन की मांग की थी। आईएएस अफसर रमेश एस. थेटे वर्तमान में सचिव, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अल्प संख्यक कल्याण विभाग पदस्थ थे। रमेश थेटे ने कहा साढ़े 3 साल पहले तत्कालीन मुख्य सचिव बी पी सिंह को मैंने वचन दिया था कि जब तक IAS की नौकरी में रहूंगा तब तक मैं मीडिया से बात नहीं करूंगा| मैंने इस वचन को पूरी तरह से निभाया, 31 जुलाई को मैं आईएएस की नौकरी से सेवानिवृत्त हो गया हूं, एक प्रकार से मेरे लिए गुलामी से मुक्ति है। रमेश थेटे लिखते हैं कि मैंने स्वाभिमानी अंबेडकरवादी होने की कीमत चुकाई है। डंके की चोट पर अपने ऑफिस की टेबल पर बाबा साहब की बड़ी फोटो रखकर आईएएस की नौकरी की और समाज के दबे कुचले लोगों के पक्ष में निर्भयता से फैसले किए। जातिवादियों ने संगठित गिरोह बनाकर मुझे घेरा और मेरा शिकार किया। डायरेक्ट आईएएस होने के बावजूद मुझे कलेक्टर नहीं बनने दिया, प्रमुख सचिव के पद पर पदोन्नति के लिए उपयुक्त पाए जाने के बावजूद निर्णय लिफाफे में रखकर मुझे न्याय से वंचित कर दिया।

 

 

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