पूर्व मंत्री ने राज्यपाल से की 10 बैठकों का सत्र बुलाने की मांग, कहा- जवाब देने से बची रही अध्यादेश के सहारे चलने वाली सरकार

पूर्व मंत्री गोविंद सिंह ने कहा है कि यह सरकार ना तो जनता के प्रति जवाबदेही महसूस कर रही है, न ही संवैधानिक मान्यताओं और परंपराओं का ख्याल रख रही है

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट| उपचुनाव (Byelection) के नतीजे आने के बाद अब विधानसभा (Assembly) का शीतकालीन सत्र बुलाने की मांग उठने लगी है| हालाँकि कोरोना के मद्देनजर अब तक अधिसूचना जारी नहीं की गई है| इस बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व मंत्री डॉ गोविंद सिंह (Dr.govind Singh) ने भाजपा (BJP) पर अध्यादेश के सहारे सरकार (Government) चलाने का आरोप लगाते हुए राज्यपाल (Governor) से हस्तक्षेप करने की मांग की है और संवैधानिक अधिकार की रक्षा के लिए कम से कम 10 दिन का सत्र बुलाने के लिए सरकार को निर्देशित करने की मांग की है|

पूर्व मंत्री गोविंद सिंह ने कहा है कि इस वर्ष को समाप्त होने में मात्र 40 दिन शेष है लेकिन विधानसभा का शीतकालीन सत्र की अधिसूचना अभी तक जारी नहीं हुई | यह सरकार ना तो जनता के प्रति जवाबदेही महसूस कर रही है, न ही संवैधानिक मान्यताओं और परंपराओं का ख्याल रख रही है| अध्यादेश के सहारे चलने वाली यह सरकार कोरोना के नाम से जनता के प्रति अपनी जवाबदेही से बचना चाहती है| उन्होंने कहा प्रदेश में बाजार, सिनेमा हॉल, शराब की दुकानें खुल रही है लेकिन जनता की समस्याओं के निराकरण के लिए जो संवैधानिक मंच है उसमें सरकार ताला लगाने की मानसिकता में आ गई है|

डॉ सिंह ने कहा कि इस 15 वी विधानसभा में अभी तक सात सत्र हुए हैं, जिसमें से 5 कांग्रेस की कमलनाथ सरकार द्वारा बुलाए गए हैं और इस दौरान 26 बैठकें हुई उसके बाद 8 माह के बीच इस सरकार ने खानापूर्ति के लिए एक-एक दिन के दो दो सत्र बुलाये| पहला सत्र मात्र 9 मिनट का और दूसरा सत्र मात्र डेढ़ घंटे का बुलाकर संवैधानिक प्रावधानों और मान्यताओं की धज्जियां उड़ाने का काम किया है |

पूर्व मंत्री ने कहा कि जो को रोना काल में संसद का सत्र हो सकता है, अन्य प्रदेशों की विधानसभा में लगाता सत्र बुला रही है लेकिन मध्य प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी की सरकार सत्र के नाम से चुप्पी साधे हुए हैं | अमूमन नवंबर के अंतिम सप्ताह या दिसंबर के प्रथम सप्ताह में विधानसभा का सत्र चालू हो जाता है जिसकी अधिसूचना नवंबर के प्रथम सप्ताह में ही जारी हो जाती है| लेकिन लोगों को कोरोना महामारी में धकेल कर किसानों की समस्या, युवाओं की बेरोजगारी और वित्तीय रूप से कंगाल हो चुकी घोषणा वीर सरकार प्रदेश की आम जनता को जवाब देने से बचना चाहती है एवं विधानसभा का सत्र समय सीमा में ना बुलाकर सारी संवैधानिक मर्यादाओं और परंपराओं की अवहेलना कर रही है | पूर्व मंत्री डॉ सिंह ने पत्र लिखकर राज्यपाल से मांग की है कि विधानसभा का कम से कम 10 बैठकों का सत्र जलदी बुलाने के निर्देश राज्य सरकार को दें, अगर सरकार इसमें विफल रहती है तो संविधान के प्रावधानों के तहत राज्यपाल सरकार के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई करें|

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