ब्लैक फंगस को लेकर सरकार गंभीर, स्वास्थ्य आयुक्त ने अधिकारियों को दिए ये निर्देश

ऑक्सीजन सपोर्टेड रोगियों के लिए ह्यूमिडिफायर बॉटल में स्टराइल अथवा डिस्टिल्ड वाटर का उपयोग किया जाये एवं नियमित रूप से पानी को बदलते रहें। मरीजों के लिये उपयोग होने वाला ऑक्सीजन मास्‍क, कैनुला को नियमित रूप से सैनेटाइज किया जाये।

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। पोस्ट कोविड कॉम्प्लीकेशन (Post Covid Complication) के रूप में सामने आई नई बीमारी ब्लैक फंगस (Black Fungus) को लेकर मध्यप्रदेश सरकार (MP Government) बहुत गंभीर है। सरकार ब्लैक फंगस (Black Fungus) से पीड़ित होने वाले मरीजों के लिए प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों के अस्पतालों में अलग से बेड रिजर्व रखने के निर्देश दे चुकी है। सभी वरिष्ठ अधिकारियों और चिकित्सकों से अलर्ट रहने के निर्देश भी दे चुकी है। अब स्वास्थ्य आयुक्त ने सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, सिविल सर्जन और मेडिकल कॉलेज के डीन को मरीजों को लेकर कड़े निर्देश दिए हैं।

मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य आयुक्त आकाश त्रिपाठी (Health Commissioner Akash Tripathi) ने कहा है कि ब्लैक फंगस (Black Fungus) के संक्रमण से उत्पन्न लक्षणों की पहचान कर मरीज का तुरंत इलाज शुरू किया जाये।  उन्होंने बताया कि समस्त कोरोना संदिग्ध, कोरोना संक्रमित रोगी और स्वस्थ हो चुके छुट्टी प्राप्त कोरोना रोगियों में मधुमेह (डायबिटीज) का उचित पहचान एवं नियंत्रण किया जाना होगा। सभी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO), सिविल सर्जन (Civil Surgeon), प्रभारी कोविड अस्पताल (Incharge Covid Hospital) एवं चिकित्सा महाविद्यालयों के अधिष्ठाता (Dean Medical College) को निर्देश दिये गये है कि ब्लैक फंगस (Black Fungus) से होने वाले रोगों के प्रति अलर्ट रहकर मरीजों का उचित इलाज किया जाए।

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उन्होंने कहा कि राज्य शासन भी ब्लैक फंगस (Black Fungus) की रोकथाम के लिये गंभीरता से प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (CM Shivraj Singh Chauhan) प्रतिदिन कोरोना समीक्षा में इसकी समीक्षा भी कर रहे हैं । राज्य शासन द्वारा ब्लैक फंगस (Black Fungus) संक्रमण के नि:शुल्क उपचार के लिए प्रदेश के भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और रीवा चिकित्सा महाविद्यालयों में इकाइयों का गठन किया गया है। इनमें मेडिसन विभाग, नेत्र विभाग, न्यूरो सर्जरी एवं नाक, कान, गला विभाग के विशेषज्ञ शामिल हैं।

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स्वास्थ्य आयुक्त आकाश त्रिपाठी ealth Commissioner Akash Tripathi)  ने कहा कि जिन रोगियों को चिकित्सीय परामर्श अनुसार स्टेरॉयड दिया जा रहा है, उनमें रेंडम ब्लड शुगर स्तर की दैनिक निगरानी हर 8 घंटे के अंतराल पर सुनिश्चित की जाये। किसी भी स्थिति में  स्टेरॉयड एवं ब्रॉड स्पेक्ट्रम एंटीबायोटिक्स का अनावश्यक अनुचित सेवन नहीं कराया जाये। ऑक्सीजन सपोर्टेड रोगियों के लिए ह्यूमिडिफायर बॉटल में स्टराइल अथवा डिस्टिल्ड वाटर का उपयोग किया जाये एवं नियमित रूप से पानी को बदलते रहें। मरीजों के लिये उपयोग होने वाला ऑक्सीजन मास्‍क, कैनुला को नियमित रूप से सैनेटाइज किया जाये। अस्पताल में भर्ती कोविड मरीजों में संक्रमण के नियंत्रण के लिए प्रोटोकॉल का पूरा पालन किया जाये।

ये हैं ब्लैक फंगस संकम्रण के लक्षण

ब्लैक फंगस ९(Black Fungus) संक्रमण की पहचान रोगियों के नाक, मुख और आँख से काले कण अथवा काला रिसाव होना, नाक बंद होना, नाक के आस-पास गालों की हड्डियों में दर्द, चेहरे में दर्द, लगातार सिर दर्द होना, जबड़े, दांत, आँख में दर्द, बुखार आना, शरीर में नील पड़ना, साँस लेने में परेशानी होना, सीने में दर्द, फेफड़ों में पानी आना, खून की उल्टी होना, मुँह से बदबू आना और मानसिक भ्रम जैसे लक्षणों से होती है।