सफर, तफरीह, मशक्कत नहीं, जिंदगी बदलकर आने का नाम है हज : पीर साहब

93

भोपाल। हज पर जाने वाले सभी लोगों को इस बात की गांठ बांधकर यहां से रवाना होना चाहिए कि सफर पूरा कर वापस आने के बाद उनकी जिंदगी में बदलाव दुनिया को भी दिखाई दे और अल्लाह भी उसके आमाल से राजी हों। सफर की थकान, तफरीह पर खर्च और घर-परिवार छोड़कर दूसरे मुल्क जाने की मशक्कत उसी वक्त मुकम्मल मानी जाएगी, जब हज के दौरान खाना-ए-काबा के सामने खड़े होकर अपने खुदा से किए हुए वायदों को बंदा इस अपनी दुनिया में लौटकर पूरे करे।

पीर शिराज उल हसन मुजद्दीदी साहब ने शनिवार को यह बात हज कुर्रा के दौरान कहीं। काजी-ए-शहर सैयद मुश्ताक अली नदवी, मुफ्ती अब्दुल कलाम, मुफ्ती बाबर साहब और प्रदेशभर के शहर काजियों की मौजूदगी में उन्होंने लैपटॉप का बटन दबाकर मुंबई से होने वाले हज कुर्रा की शुरूआत की। इस मौके पर हज कमेटी के सदस्य आमिर अकील, अब्दुल मुुगनी, सीइओ दाउद अहमद खान के अलावा प्रदेशभर के जिला हज कमेटी अध्यक्ष मौजूद थे। बड़ी तादाद में पहुंचे हज आवेदकों ने सुकून से कुर्रा की कार्यवाही देखी और अपने नंबर के इंतजार में नजरें गढ़ाए रहे। कुर्रा होने के बाद कई लोग अपना नाम चयनित होने पर खुशी का इजहार करते नजर आए तो कई के चेहरों पर मायूसी के साथ जुबान पर यह बात पसर गई कि जब अल्लाह का बुलावा आएगा, तब जाने में कोई बाधा नहीं रहेगी।

पिछले साल से ज्यादा जाएंगे हाजी
हज सफर 2020 के लिए करीब 12601 आवेदकों में से कुर्रा निकाले गए। इस साल प्रदेश को 4864 सीटों का कोटा मिला है। जो पिछले साल के मुकाबले करीब 224 सीट ज्यादा है। इस कोटे से पहले 70 साल आयुवर्ग के आरक्षित श्रेणी के 667 और अन्य आरक्षित श्रेणी के करीब 43 आवेदकों के नाम निकालने के बाद बचे हुए 4154 अकीदतमंदों के नाम तय किए किए गए। पहली बार हज कुर्रा अल्फाबेटिकल तरीके से जिलों के कोटे के मुताबिक निकाला गया।

हमारी कोशिश हर आवेदक जाए हज पर : अकील
अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री आरिफ अकील ने कहा कि लगातार बढ़ते हज आवेदनों के मुताबिक प्रदेश का कोटा बढ़वाने की कोशिश की जा रही है। इस साल पहले से ज्यादा सीटें प्रदेश को मिली हैं। अगले साल तक इस स्थिति को बनाने की कोशिश की जाएगी कि जितने भी अकीदतमंद हज अर्जी लगाएं, सभी को हज पर जाने का मौका मिल जाए। अकील ने कहा कि प्रदेश हज कमेटी द्वारा द्वारा सउदी अरब में हज के दौरान हाजियों को ज्यादा से ज्यादा सहूलियतें देने की कोशिश की जा रही है। इस बार भी हज पर जाने से पहले विभिन्न ट्रेनिंग प्रोग्राम और आपसी तालीम के जरिये हाजियों को बेहतर तरीके से तैयार करके भेजा जाएगा, ताकि उन्हें हज के दौरान किसी तरह की परेशानी न उठाना पड़े। साथ ही सउदी अरब में खादिम उल हुज्जाजों की पाबंदी से हाजियों को हर मौके पर सुविधाएं देने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।

चेहरों पर खुशी, आंखों में आंसू, लब पर रब का शुक्र
हज कुर्रा में अपना नाम निकलने पर हाजियों के चेहरों पर मिलीजुली प्रतिक्रिया नजर आईं। जहां उनके चेहरों पर अल्लाह के घर के इस बुलावे के लिए खुशी छलक रही थी, वहीं आंखों में खुशी के आंसुओं ने नमी के हालात बना दिए थे। लबों पर अल्लाह का शुक्र लिए डॉ. अजीज मंसूरी ने कहा कि उस मुकद्दस जगह के दीदार के लिए दिल में बचपन से ही तमन्ना थी, लेकिन अल्लाह ने मौका अब फराहम कराया है। पिछले तीन साल से लगातार अर्जियां लगा रहे थे, अब अल्लाह ने उन्हें बुलावा भेज दिया है। हज के लिए चुने गए रफीक अहमद राजा ने कहा कि अल्लाह से यही दुआ है कि चुने गए सभी हाजियों की सफर कामयाब हो और उनकी अल्लाह के घर की यह हाजिरी कुबूल हो। उन्होंने कहा कि उन लोगों के लिए भी दुआ की, जिनके नाम कुर्रा में आने से बाकी रह गए हैं। हज पर जाने के लिए चुने गए एडवोकेट अब्दुल ताहिर ने भी इस चयन के लिए खुशी जाहिर की। वे अपनी वालिदा के साथ हज पर जाने वाले हैं। लेकिन इस दौरान उनकी बेगम का नाम चयन न होने का उन्हें अफसोस भी बना हुआ है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here