हाईकोर्ट ने राज्य शासन को भेजा नोटिस, इस मामले में राजनीतिक दबाव पर जताई नाराजगी

वही कहा गया है कि निर्वाचन आयोग की गाइडलाइन के मुताबिक आरक्षण प्रक्रिया पूर्ण करने के बाद कलेक्टर, अपर कलेक्टर और उप जिला निर्वाचन अधिकारी मनमानी व्यवहार कर रहे हैं। जिसके लिए जवाब जरूरी है।

जबलपुर, डेस्क रिपोर्ट। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट (Madhya Pradesh High Court) ने एक बार फिर शिवराज सरकार (shivraj government), प्रमुख सचिव और आयुक्त नगरीय प्रशासन सहित कलेक्टर, अपर कलेक्टर को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। दरअसल मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने नगरीय निकाय (Urban bodies) में वार्ड आरक्षण (ward reservation) पर राजनीतिक दबाव को लेकर सरकार को नोटिस जारी किए है।

ज्ञात हो कि वार्ड का पूर्व आरक्षण निरस्त होने के बाद याचिकाकर्ता ने इस मामले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इस मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अपना पक्ष रखते हुए अधिवक्ता ने कहा नगरपालिका दमोह के दमयंती वार्ड में पूर्व के आरक्षण के माध्यम से अनुसूचित जाति के प्रत्याशियों के लिए सीट आरक्षित कर दिया गया था। इसके बावजूद नए सिरे से आरक्षण (reservation) की प्रक्रिया शुरू की गई है। दमोह निवासी विवेक कुमार की इस याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति विशाल धगट ने इस मामले में प्रमुख सचिव से स्पष्टीकरण की मांग की है।

Read More: किसान आंदोलन की आग यहाँ भी पहुंची, किसानों ने किया चक्काजाम

इस मामले में याचिकाकर्ता का कहना है कि एक बार नियमानुसार आरक्षण के हो जाने के बाद नए सिरे से आरक्षण किया जाना अनुचित है और यह एक तरह की मनमानी है। इसके साथ ही याचिकाकर्ता ने कहा है कि नगरीय प्रशासन विभाग की ओर से परिपत्र जारी कर आरक्षण की प्रक्रिया को जिस तरह से गति दी गई है। उसके पीछे राजनीतिक दबाव साफ नजर आ रहे हैं।

इस मामले में अब राज्य शासन से स्पष्टीकरण की मांग की गई है वह याचिकाकर्ता का सवाल है कि एक बार विधि सम्मत आरक्षित किए गए सीट को फिर से निरस्त कर उस पर आरक्षण कार्रवाई क्यों की जा रही है। वही कहा गया है कि निर्वाचन आयोग की गाइडलाइन के मुताबिक आरक्षण प्रक्रिया पूर्ण करने के बाद कलेक्टर, अपर कलेक्टर और उप जिला निर्वाचन अधिकारी मनमानी व्यवहार कर रहे हैं। जिसके लिए जवाब जरूरी है।