इंटरनेशनल नर्स डे : इस योगदान को सलाम, क्या है इस दिन का ऐतिहासिक महत्व?

अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस का एक ऐतिहासिक महत्व भी है क्योंकि यह दिन एक महत्वपूर्ण समाज सुधारक के योगदान की याद दिलाता है जिन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।

नई दिल्ली, डेस्क रिपोर्ट। अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस हर साल 12 मई को दुनिया भर में नर्सों के योगदान का सम्मान करने के लिए मनाया जाता है। नर्स दिवस को आधिकारिक तौर पर अंतर्राष्ट्रीय नर्स परिषद द्वारा 1974 को मान्यता मिली थी। मेडिकल सेक्टर ने पिछले दो सालों में त्राहिमाम के बीच असाधारण काम किया है, जहां डॉक्टर्स के साथ-साथ नर्सों ने व्यापक तौर पर खतरनाक वायरस को हावी नहीं होने दिया। नर्स भी व्यापक COVID-19 महामारी के बीच रोगियों को बचाने और ठीक करने के लिए नायक बन गए हैं।

अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस का एक ऐतिहासिक महत्व भी है क्योंकि यह दिन एक महत्वपूर्ण समाज सुधारक के योगदान की याद दिलाता है जिन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।

आइए अधिक विस्तार से समझते हैं कि 12 मई को दिन क्यों मनाया जाता है और इसका क्या महत्व है –

यह दिन अंग्रेजी समाज सुधारक और आधुनिक नर्सिंग की संस्थापक फ्लोरेंस नाइटिंगेल की जयंती है। नर्स दिवस स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के मजबूत स्तंभ को समर्पित है, जो लोगों की भलाई के लिए दिन-रात काम करते हैं।

अमेरिकी स्वास्थ्य, शिक्षा और कल्याण विभाग के डोरोथी सदरलैंड ने 1953 में तत्कालीन राष्ट्रपति को अक्टूबर में नर्स दिवस घोषित करने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन तब प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिली थी।

इसके 20 साल बाद, फरवरी 1975 में तत्कालीन राष्ट्रपति निक्सन ने 6 मई से 12 मई तक एक राष्ट्रीय नर्स सप्ताह की घोषणा की। इस निर्णय के साथ ही 12 मई को नर्स दिवस के रूप में भी मनाया जाने लगा।

कौन थी फ्लोरेंस नाइटिंगेल?

‘लेडी विद द लैंप’ फ्लोरेंस नाइटिंगेल एक समाज सुधारक थीं, जिन्होंने क्रीमियन युद्ध के दौरान ब्रिटिश सेना के घायल सैनिकों की देखभाल की थी। उनका जन्म 12 मई 1860 को इटली के फ्लोरेंस में हुआ था। उसने नर्सिंग को एक अनुकूल प्रतिष्ठा दी और विक्टोरियन संस्कृति का प्रतीक बन गई, विशेष रूप से रात में घायल सैनिकों का इलाज करने के कारण, उन्हें “द लेडी विद द लैंप” की उपाधि दी ।

फ्लोरेंस नाइटिंगेल ने युद्ध के समय न केवल चिकित्सा शिविरों और अस्पतालों में स्वास्थ्य देखभाल और नर्सिंग के मानकों को निर्धारित किया, बल्कि 1860 में महत्वाकांक्षी नर्सों और स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए नाइटिंगेल ट्रेनिंग स्कूल भी स्थापित किया।