रेमडेसिवीर इंजेक्शन चुराकर बेचने वाला अस्पतालकर्मी पुलिस की गिरफ्त में, जांच जारी

भूपेंद्र शैलीवाल नामक युवक ने संकट के इस दौर में अस्पताल के मेडिसीन स्टॉक में से 139 रेमडेसिवीर इंजेक्शन को ऊंचे दामों पर बेच दिया। जिसके बाद जब इसकी जानकारी पुलिस को लगी तो अस्पतालकर्मी को हिरासत में लिया गया।

इंदौर, आकाश धोलपुरे। एक ओर जहां इंदौर (Indore) शहर रेमडेसिवीर इंजेक्शन (Remdesivir Injection) की किल्लत से जूझ रहा है तो दूसरी ओर यहां के निजी अस्पतालों के कर्मियों से लेकर कालाबाजारी करने वाले लोग भी सक्रिय है और संजीवनी माने जा रहे इंजेक्शन को ऊंचे दामों पर बेच रहे है। ऐसा ही एक मामला इंदौर के तुकोगंज थाना क्षेत्र में स्थित शैल्बी हॉस्पिटल (Shalby Hospital) में सामने आया है। यहां अस्पताल में फार्मासिस्ट के पद पर कार्यरत भूपेंद्र शैलीवाल नामक युवक ने संकट के इस दौर में अस्पताल के मेडिसीन स्टॉक में से 139 रेमडेसिवीर इंजेक्शन को ऊंचे दामों पर बेच दिया। जिसके बाद जब इसकी जानकारी पुलिस को लगी तो अस्पतालकर्मी को हिरासत में लिया गया।

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इधर, इस घटना की जानकारी अस्पताल प्रबंधन को तब लगी जब अस्पताल के मेडिसीन स्टॉक को मासिक तौर पर ऑडिट किया गया। इसके बाद शक होने पर अस्पताल प्रबंधन ने दोबारा ऑडिट कराया और पूछताछ की तो पता चला कि फार्मासिस्ट के पद कार्यरत कर्मचारी ने ही रेमडेसिवीर को चुराकर बेच दिया है। शैल्बी अस्पताल के सीईओ धनंजय ने बताया कि जब अस्पताल में आंतरिक तौर पर जांच में मामला सामने आया उसके बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। उन्होंने बताया कि इस चोरी को अप्रैल माह में ही अंजाम दिया गया है।

 

वही पुलिस ने शैल्बी हॉस्पिटल के आरोपी फार्मासिस्ट भूपेंद्र शैलीवाल के खिलाफ चोरी का मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। तुकोगंज थाना क्षेत्र उपनिरीक्षक सत्येंद्र सिंह सिसौदिया ने बताया कि शैल्बी हॉस्पिटल से रेमडेसिवीर इंजेक्शन चोरी का मामला सामने आया है और लिखित आवेदन के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। पुलिस की माने तो चोरी की वारदात 1 अप्रैल से 15 अप्रैल के बीच की है जिसमे 130 से अधिक रेमडेसिवीर इंजेक्शन चुराए गए थे। पुलिस के अनुसार इस मामले में वही पर काम करने वाले फार्मासिस्ट भूपेंद्र शैलीवाल को गिरफ्तार किया गया है जिसने मार्केट में लोगो को इंजेक्शन बेचे है। पुलिस के मुताबिक आरोपी भूपेंद्र अस्पताल में स्टॉक का इंचार्ज था और जब उसके पास बाहर से डिमांड आती थी तो वो एमआरपी से 400 रुपये ज्यादा के फायदे में बेच देता था। आरोपी ने पुलिस को बताया है कि मुनाफे की रकम उसके घर पर रखी है वही 4 सहकर्मी उसके साथ इस कार्य में शामिल थे। अब पुलिस, चार अन्य कर्मियों की भूमिका के साथ इंजेक्शन कहां और किसको बेचे थे उसका पता लगाने में जुट गई है।

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