कृषि कानूनों पर कमलनाथ का बड़ा बयान- सबसे ज्यादा खतरा मध्य प्रदेश को

मध्य प्रदेश के 70% अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है। ऐसे में यह कृषि कानून मध्य प्रदेश को पूरी तरह से बर्बाद कर देगा।

कमलनाथ

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। देशभर में एक तरफ जहां कृषि कानूनों (Farm Laws) को लेकर किसान आंदोलन (farmer protest) पर बैठे हैं। वहीं दूसरी तरफ मध्यप्रदेश में कांग्रेस लगातार शिवराज सरकार (shivraj government) पर हमलावर बनी हुई है। किसान आंदोलन का समर्थन करते हुए एक बार फिर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ (kamalanth) ने बीजेपी पर बड़ा हमला बोला है। कमलनाथ ने कहा कि केंद्र सरकार अब हर चीज के बाद कृषि क्षेत्र का भी निजीकरण कर रही है। लेकिन आज के किसान आधुनिक है यह नियम और कानून सभी समझते हैं।

इसके साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि 16 जनवरी को मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा और 20 जनवरी को मुरैना में किसानों को काले कृषि कानूनों के पहलुओं के बारे में कांग्रेस द्वारा जानकारी दी जाएगी। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कृषि कानूनों के खिलाफ मध्य प्रदेश कांग्रेस किसान सम्मेलन का आयोजन करेगी। मध्य प्रदेश के किसानों को भी समझना होगा कि यह कृषि कानून हमारे किसानों के लिए उचित कानून नहीं है इसी कारण में द्वारा कृषि का निजीकरण किया जा रहा है जिसके बाद एमएसपी (MSP) मिलने की संभावना पूरी तरह से खत्म हो जाएगी।

Read More: खरगोन में व्यापारियों ने क्यों ली आतंकवादी बनने की शपथ ? अधिकारियों को भी दी धमकी, जाने पूरी वजह

कमलनाथ ने कहा कि नए कृषि कानूनों से बड़े व्यापारी किसानों की फसलों के दाम को कंट्रोल करने की कोशिश करेंगे। इसके साथ ही किसान इस कानून के जरिए कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग को मजबूर हो जाएंगे। पीसीसी चीफ कमलनाथ ने कहा कि आज मध्यप्रदेश उत्पादन के मामले में पंजाब से आगे है। मध्य प्रदेश हरियाणा और पंजाब जैसे राज्य मिलकर देश का कुल 66% उत्पादित करते हैं। बावजूद इसके मध्यप्रदेश में केवल 20 फ़ीसदी लोगों को ही एमएसपी मिलती है। जिसके बाद यह कानून मध्य प्रदेश के किसानों के लिए सबसे ज्यादा अनुचित और घातक कानून है। मध्य प्रदेश के 70% अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है। ऐसे में यह कृषि कानून मध्य प्रदेश को पूरी तरह से बर्बाद कर देगा।

इसके साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि वह प्रचार और प्रसार की दुनिया से दूर रहते हैं। वहीं कमलनाथ ने कहा कि कृषि क्षेत्र में क्रांति लाने का काम पंडित नेहरू के अलावा लाल बहादुर शास्त्री और इंदिरा गांधी ने किया था। आज कृषि क्षेत्र के प्राइवेटाइजेशन की बात की जा रही है। जिसके बाद खुद एनडीए के समर्थक पार्टियों ने फिर से कानूनों का विरोध करना शुरू कर दिया है।

बता दे कि देश भर में चल रहे किसान आंदोलन को आज 43 दिन होने जा रहे हैं। इस बीच 50 से अधिक किसानों ने अब तक अपनी जान गवा दी है। हालांकि बुधवार को एक बार फिर किसान नेताओं और सरकार के बीच पांचवें दौर की बैठक की गई थी लेकिन इसका भी कोई परिणाम नहीं निकला। जिसके बाद एक बार फिर किसान 8000 से 10000 ट्रैक्टर के साथ आज ट्रैक्टर मार्च निकालने वाले हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here