EVM में बंद हुई 355 प्रत्याशियों की किस्मत, दांव पर सिंधिया समर्थक 12 मंत्रियों की प्रतिष्ठा

सिंधिया के साथ 12 मंत्रियों और 13 पहली बार चुने गए विधायकों की प्रतिष्ठा दांव पर है। जिन्होंने इस्तीफ़ा देकर दुबारा चुनाव लड़ा

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट| मध्य प्रदेश (Madhyapradesh) की 28 सीटों पर उपचुनाव (Byelection) के लिए मंगलवार सुबह 7 बजे से शुरू हुआ मतदान (Voting) शाम 6 बजे समाप्त हो गया| उपचुनाव के लिए 66 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ है| हालांकि अंतिम आंकड़े अभी आना बाकी हैं| चुनाव लड़ रहे 355 प्रत्याशियों की किस्मत ईवीएम में कैद हो गई है, इसका नतीजा 10 नवंबर को सामने आएगा| यह उपचुनाव कई मायनों में रोचक रहा| उपचुनाव के नतीजे न सिर्फ सत्ता का भविष्य तय करेगा, बल्कि दिग्गजों का भाग्य का फैसला भी होगा|

इस उपचुनाव में बीजेपी नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) की साख दांव पर है| इसके साथ ही सिंधिया के साथ 12 मंत्रियों और 13 पहली बार चुने गए विधायकों की प्रतिष्ठा दांव पर है। जिन्होंने इस्तीफ़ा देकर दुबारा चुनाव लड़ा| मतदाता ने अपना फैसला कर लिया है कि राज्य विधानसभा में उनका प्रतिनिधित्व कौन करेगा।

सिंधिया के साथ भाजपा में आये
कांग्रेस के विधायकों ने पार्टी छोड़ ज्योतिरादित्य सिंधिया के नेतृत्व में भाजपा (BJP) में शामिल हुए थे। इन पूर्व विधायकों का कहना था कि पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ उनकी उपेक्षा कर रहे थे, जिससे उनके क्षेत्र का विकास प्रभावित हुआ। उन्होंने दावा किया कि उनके भाजपा में शामिल होने के बाद उनके निर्वाचन क्षेत्रों में विकास कार्य शुरू हो गए और इसलिए वे अब लोगों का सामना कर सकते हैं।

25 सीटों पर दलबदल के कारण उपचुनाव
28 में से 25 सीटों पर दल बदल के कारण उपचुनाव हुए| जिसको लेकर बीजेपी और कांग्रेस दोनों की अलग अलग राय है| बीजेपी कहती है कि मध्य प्रदेश के विकास को बढ़ावा देने के लिए कांग्रेस विधायकों ने कमलनाथ सरकार को उखाड़ फेंका, क्योंकि बीजेपी एकमात्र ऐसी पार्टी है जो सुशासन दे सकती है। वहीं कांग्रेस पार्टी ने पूर्व चुनाव प्रचार के दौरान बागी नेताओं को गद्दार कहकर निशाना साधा और जनता से गद्दारी की सजा देने की अपील की| गद्दारी और खुद्दारी के बीच जारी घमासान के बाद आख़िरकार चुनाव संपन्न हुआ, अब नतीजा तय करेंगे जनता ने किसको पसंद किया|

दांव पर इन मंत्रियों की प्रतिष्ठा
इमरती देवी, प्रद्युम्न सिंह तोमर, महेंद्र सिंह सिसोदिया, गिर्राज दंडोतिया, ओपीएस भदोरिया, सुरेश धाकड़, बृजेन्द्र सिंह यादव, राज्यवर्धन सिंह दत्तीगांव, एंडल सिंह कंसाना, बिसाहूलाल सिंह और हरदीप सिंह। वहीं तुलसी सिलावट और गोविन्द सिंह राजपूत मंत्री पद से इस्तीफा दे चुके हैं|

पहली बार विधायक बने थे यह नेता
पहली बार कांग्रेस के विधायक, जो पार्टी छोड़ कर भाजपा प्रत्याशी के रूप में मैदान में हैं, रघुराज सिंह कंसाना (मुरैना), गिर्राज दंडोतिया (दिमनी), कमलेश जाटव (अंबाह), ओपीएस भदौरिया (मेहगांव), मुन्नालाल गोयल (ग्वालियर पूर्व), हैं। रक्षा संतराम सिरोनिया (भांडेर), जसवंत जाटव (करेरा), सुरेश धाकड़ (पोहरी), जजपाल सिंह जज्जी (अशोकनगर), प्रद्युम्न सिंह लोधी (बड़ा मलहरा), सुमित्रा देवी कासडेकर (नेपानगर), मनोज चौधरी (हाटपिपल्या)|