कांग्रेस की याचिका खारिज, SC ने कहा- फ्लोरटेस्ट को लेकर सही था राज्यपाल का फैसला

नई दिल्ली/भोपाल।

मध्य प्रदेश में सरकार गठन के मामले में SC ने बड़ा फैसला दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले के तथ्यों में राज्यपाल फ्लोर टेस्ट का आदेश देने में सही थे। वहीं कोर्ट ने अभिषेक मनु सिंघवी के इस तर्क को मंजूर नहीं किया कि राज्यपाल आदेश पारित नहीं कर सकते। मध्य प्रदेश में फ्लोर टेस्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट विस्तृत ने आदेश जारी किया है। हालांकि इससे पहले ही कमलनाथ सरकार गिर गई थी और बीजेपी ने सरकार बना ली थी। हालांकि 19 मार्च को अंतरिम आदेश जारी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि 20 मार्च को शाम पांच बजे फ्लोर टेस्ट कराया जाए।

कोर्ट ने कहा कि राज्यपाल स्वयं कोई निर्णय नहीं ले रहे हैं।राज्यपाल एक फ्लोर टेस्ट बुला रहे हैं। वहीं कोर्ट ने ये भी दलील दी है कि सदन में दो तौर-तरीके होते हैं। अविश्वास प्रस्ताव या फ्लोर टेस्ट। हालाकि फ्लोर टेस्ट क्यों जरूरी है। इस पर एसआर बोम्मई मामले के बाद से कोई फैसला नहीं हुआ है। वहीं इसमें राज्यपाल ने अनुच्छेद 356 के तहत शक्ति का प्रयोग किया है। बोम्मई ने दिखाया है कि विश्वास मत को एक विधानसभा में रखा जा सकता है। साथ ही इसमें संवैधानिक कानून और राज्यपाल की शक्तियों पर एक विस्तृत निर्णय दिया है। मध्य प्रदेश फ्लोर टेस्ट पर SC ने 68 पन्ने का विस्तृत आदेश पारित किया। 19 मार्च को अंतरिम आदेश में CM कमलनाथ को अगले दिन विधानसभा में बहुमत साबित करने कहा था। हालात के मुताबिक सरकार राज्यपाल का फैसला सही था, हमने संवैधानिक पहलुओं और राज्यपाल के अधिकारों पर चर्चा की है।

क्या था पूरा मामला

दरअसल कांग्रेस के बागी विधायकों के बंगलुरु में बैठने के बाद कमलनाथ सरकार अल्पमत में आ गई थी। जिसके बाद राज्य के पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर फ्लोर टेस्ट कराने की मांग की थी और कहा था कि 22 विधायकों ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है और सरकार अल्पमत में है लिहाजा फ्लोर टेस्ट कराया जाए। दो दिन की लंबी सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली बेंच ने फैसला दिया था कि विधानसभा में 20 मार्च को शाम के वक्त फ्लोर टेस्ट कराया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्देश में कहा था कि मीटिंग का एक सूत्री एजेंडा फ्लोर टेस्ट होगा। इसके लिए जो वोटिंग होगी वह हाथ उठाकर होगी। विधानसभा की कार्यवाही की विडियो रेकॉर्डिंग की जाएगी। संबंधित अथॉरिटी इस बात को सुनिश्चित करेगी कि फ्लोर टेस्ट के दौरान कानून व्यवस्था कायम रहेगी। राज्य के डीजीपी को निर्देश दिया गया था कि वह इस बात को सुनिश्चित करेंगे कि बागी विधायकों को आने से न रोका जाए उन्हें पर्याप्त सुरक्षा दी जाए।