Madhya Pradesh : स्कूल शिक्षा मंत्री का बड़ा बयान-विद्यार्थियों पर केन्द्रित हो विभाग का हर फैसला

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट
कोरोना संकटकाल और लॉकडाउन में स्कूलों (School) के बंद होने से प्रदेश के किसी भी विद्यार्थी(Student) का नुकसान ना हो इसके लिए शिवराज सरकार (Shivraj Sarkar) हर बात का गंभीरता से ध्यान रख रही है। सरकार द्वारा बच्चों की पढ़ाई ऑनलाइन तथा रेडियो कार्यक्रमों के माध्यम से करवाई जा रही है।कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों के लिए मध्यान्ह भोजन उनके घर पर ही खाद्यान्न पहुंचाया जा रहा है, खाद्य सुरक्षा भत्ते की राशि भी उनके खातों में भिजवाई जा रही है।इसी कड़ी में अब स्कूल शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार (School Education Minister Inder Singh Parmar) ने निर्देश दिए है कि विभाग का हर फैसला विद्यार्थियों पर केन्द्रित हो।

दरअसल, स्कूल शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) इंदर सिंह परमार ने मंत्रालय में स्कूल शिक्षा विभाग की गतिविधियों की समीक्षा की। मंत्री परमार ने कहा कि शिक्षा विभाग का हर निर्णय और कार्ययोजना विद्यार्थियों के हित में होना चाहिए। आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश में स्कूल शिक्षा और नई शिक्षा नीति के अनुसार शिक्षा विभाग के सेट-अप में परिवर्तन की समीक्षा की। उन्होंने सी.एम. राइज के तहत 10 हजार सर्वसुविधा सम्पन्न स्कूलों, नई शिक्षा नीति के अनुसार शिक्षकों की पदपूर्ति और स्कूलों में संसाधनों की आपूर्ति, स्कूलों की व्यवस्था आदि पर विस्तार से चर्चा की।

परमार ने बताया कि आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश में स्कूल शिक्षा में आमूल-चूल परिवर्तन लाने के लिये बुनियादी शिक्षा में सुधार के लिये भाषा और गणित की मूलभूत दक्षताओं में सुधार होना अत्यावश्यक है। इसके लिये प्रोजेक्ट अंकुर प्रारंभ किया जाएगा। इसके लिये छात्र कार्यपुस्तिका एवं शिक्षक कार्यपुस्तिका को नया स्वरूप दिया जाएगा। जीवंत और प्रिंट समृद्ध परिवेश वाली कक्षाएं विकसित की जाएंगी। अभिभावकों की भागीदारी बढ़ाई जाएगी। आईटी आधारित बाह्य मूल्यांकन किया जाएगा।

निजी स्कूलों में कुछ नीतिगत मुद्दों में रहेगा सरकार का हस्तक्षेप

आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश योजना में स्कूल शिक्षा को गुणवत्तायुक्त बनाने के लिये शिक्षकों के प्रशिक्षण एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके लिये शिक्षण-प्रशिक्षण संस्थानों को सुदृढ़ किया जाएगा एवं संस्थानों को उत्कृष्ट संस्थानों के रूप में विकसित किया जाएगा। शिक्षकों की नियमित भर्ती की जायेगी। नई शिक्षा नीति के तहत मध्यप्रदेश को देश में अग्रणी राज्य बनाने के लिये कक्षा 6वीं से सीबीएसई की तर्ज पर कौशल-आधारित पाठ्यक्रम लाया जाएगा। गहन सोच जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजाइन थिंकिंग, कोडिंग आदि से संबंधित सह-शैक्षणिक पाठ्यक्रम शामिल किये जाएंगे।नई शिक्षा नीति के तहत प्रतिभाशाली बच्चों के लिये विशेष योजना “प्रखर” आरंभ की जाएगी। जिसमें JEE, NEET, CLAT आदि के लिये 3000 प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को विशेष कोचिंग की व्यवस्था की जाएगी।राज्य के कुल 157 लाख विद्यार्थियों में से 42 प्रतिशत नामांकन निजी स्कूलों में होते हैं अत: निजी स्कूलों में कुछ नीतिगत मुद्दों में सरकार का हस्तक्षेप भी रहेगा। निजी स्कूलों में भी शिक्षकों की मेरिट आधारित भर्ती होगी। प्रति वर्ष शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित होगी। निजी स्कूलों में भी व्यावसायिक शिक्षा देना अनिवार्य होगा।