जबलपुर, संदीप कुमार

मध्यप्रदेश में आखिर ऐसा क्या है कि बरसात आते ही प्रदेश के ज्यादातर जिलों की सड़कें जर्जर हो जाती है, इस सवाल का जवाब न ही सरकार के पास है और न ही इन सड़कों को बनाने वाले ठेकेदारों के पास. इन बदहाल सड़कों की मरम्मत के लिए प्रदेश सरकार हर साल लाखों-करोड़ों रुपए खर्च करती है, पर एक ही बारिश में सड़कों की हालत जर्जर हो जाती है. इस तरह की तस्वीर सिर्फ जबलपुर ही नहीं बल्कि प्रदेश के ज्यादातर जिलों की है. विपक्ष नगर निगम अधिकारियों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ती है, विपक्ष का आरोप है कि नगर निगम में पदस्थ अधिकारी और सत्ता पक्ष के नेता भ्रष्टाचार कर घटिया सड़क बनाते हैं, जिसकी पोल हर साल बारिश में खुल जाती है।

जबलपुर शहर में जहां भी निकल जाओ, वहां सड़क नहीं बल्कि गड्ढे नजर आते हैं, यही वजह है कि न सिर्फ आमजन बल्कि बड़े-बड़े नेताओं की गाड़ियां भी इन सड़कों पर खराब हो रही हैं, खराब सड़कों के चलते ट्रैफिक व्यवस्था भी प्रभावित होती है. स्थानीय लोगो की माने तो सड़क, बिजली, पानी का टैक्स जमा करने के बाद भी उन्हें एक बेहतर सुविधा मुहैया नहीं हो पा रही है. इसकी वजह है कि सड़क बनाने वाले ठेकेदारों के साथ मिलकर भ्रष्टाचार कर जबलपुर नगर निगम के अधिकारी भी सड़क बनाने वाले ठेकेदारों पर निगरानी नहीं रखते हैं, जिस वजह से महज 1 साल में ही करोड़ों रुपए खर्च कर बनाई जाने वाली सड़क खराब हो जाती है।

जबलपुर शहर में हर साल लाखों- करोड़ों रुपए खर्च कर सड़कों की मरम्मत कराई जाती है, पर कुछ माह बाद ही इन सड़कों की हालात फिर से वही हो जाती है, जैसा पहले हुआ करती थी. जबलपुर शहर की ज्यादातर सड़कें पूरी तरह से बारिश के समय खराब हो जाती हैं. नगर निगम के पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेश सोनकर कहते हैं कि सड़क बनाने में अधिकारियों से लेकर सत्तापक्ष के नेताओं तक का कमीशन शामिल होता है, यही वजह है कि जबलपुर शहर की सड़कें दुरुस्त नहीं हो पा रही हैं. पहले सत्ता पक्ष के नेता और फिर नगर निगम अधिकारियों का सड़क बनाने वाले ठेकेदारों से एक अच्छा खासा कमीशन फिक्स रहता है।

कुछ घंटों की बारिश में ही जबलपुर शहर की ज्यादातर सड़कें उखड़ जाती हैं, जिसके चलते यातायात व्यवस्था भी पूरी तरह से प्रभावित होता है. यही वजह है कि जबलपुर कमिश्नर ने खराब सड़कों की मिल रही शिकायत को गंभीरता से लिया है. कमिश्नर का कहना है कि ये सही है कि बारिश के समय शहर की सड़कें पूरी तरह से खराब हो जाती हैं, लिहाजा इसके लिए रोड बनाने वाले अधिकारियों को निर्देशित किया जाएगा कि वह ठेकेदार जो कि सड़क बनाते हैं और एक साल में ही उनकी सड़कें उखड़ जाती हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करें।