MPPSC: राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने सीएम शिवराज को लिखा पत्र, की यह बड़ी मांग

उन्होंने सरकार से मांग की है कि इन दोनों अधिनियम को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए।

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) ने साल 2021 में होने वाली सरकारी परीक्षाओं का कैलेंडर (calender) जारी कर दिया है। जिसके तहत राज्य सेवा परीक्षा में मुख्य परीक्षा 21 मार्च से 26 मार्च तक आयोजित की जाएगी। इसके लिए 11 जनवरी से 9 फरवरी तक आवेदन लिए जाएंगे। आवेदन की अंतिम तारीख 9 फरवरी रखी गई है। हालांकि आवेदन वही उम्मीदवार भर सकेंगे जिन्होंने प्रारंभिक परीक्षा पास की है। इससे पहले राज्यसभा सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह (digvijay singh) ने राज्यसेवा की प्रारंभिक परीक्षा से अनुसूचित जाति व जनजाति और सिविल अधिकार संरक्षण अधिनियम को हटाने पर आपत्ति जाहिर की है।

दरअसल पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (shivraj singh chauhan)  को पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने इन दोनों अधिनियम को पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग की है। बता दें कि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने अपने पत्र में लिखा है कि आयोग ने वर्ष 2019 की परीक्षा में इन दोनों अधिनियम को पाठ्यक्रम में शामिल किया था लेकिन वर्ष 2021 में आयोजित की जा रही सिविल सेवा परीक्षा के पाठ्यक्रम इन दोनों अधिनियम को हटा दिया गया है। जबकि इन दोनों अधिनियम को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना महत्वपूर्ण है।

राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने कारण बताते हुए कहा है कि सिविल सेवा में चयनित होकर आने वाले परीक्षार्थी को देश के सभी कानूनों की जानकारी होनी चाहिए। अब ऐसे में यदि इन दोनों अधिनियम को पाठ्यक्रम से हटा दिया जाता है तो सिविल सेवा में चयनित हुए अभ्यर्थी दोनों कानून लोक प्रशासन और संवैधानिक संरक्षण के प्रतीक को नहीं समझ पाएंगे। जबकि प्रदेश में 15.60% अनुसूचित जाति और 21.6% अनुसूचित जनजाति की आबादी है। ऐसे में प्रारंभिक परीक्षा में इन दोनों अधिनियम को शामिल किया जाना अति महत्वपूर्ण है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि इन दोनों अधिनियम को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए।

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बता दें कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 में अनुसूचित जाति जनजाति के सदस्य के विरुद्ध किए गए अपराधों के निवारण के लिए अधिनियम है।अधिनियम ऐसे अपराधों के संबंध में मुकदमा चलाने और पीड़ित व्यक्तियों के लिए राहत और पुनर्वास का प्रावधान करते हैं।

वही यह अधिनियम 11 सितंबर 1989 को अधिनियमित किया गया था। जिसे 30 जनवरी 1990 को जम्मू कश्मीर छोड़कर संपूर्ण भारत में लागू किया गया था। इन दोनों अधिनियम को मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की प्रारंभिक परीक्षा के पाठ्यक्रम से हटा दिया गया है। जिसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने अब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखा है।