‘सिंधिया” महल को लेकर वायरल हो रही खबर का… ये है पूरा सच

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ग्वालियर।अतुल सक्सेना।

कोरोना महामारी के बाद बने हालात में देश के सम्रद्ध और दानदाताओं ने करोड़ों रुपए की राशि गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए दान कर दी इस बीच सोशल मीडिया पर एक खबर वायरल हुई जिसमें कहा गया कि सिंधिया में अपने महल के 400 कमरों को आइसोलेशन वार्ड में बदलकर जनसेवा का बहुत बढ़िया परिचय दिया है।

ज्योतिरादित्य सिंधिया फ़ैंस क्लब एकाउंट के नाम से फेसबुक पर 31 मार्च को वायरल एक मैसेज में कहा गया कि “400 कमरों का जयविलास पैलेस सिंधिया महल को आइसोलेशन वार्ड बना, श्रीमंत सिंधिया जी ने जन सेवा का बहुत बढ़िया परिचय दिया”। इस पोस्ट के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर हड़कंप मच गया। लोगों ने महल और सिंधिया से जुड़े लोगों को फोन लगाने शुरू कर दिये। और थोड़ी ही देर में ये स्पष्ट हो गया कि ये वायरल खबर झूठी है। एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ ने सिंधिया के मीडिया प्रभारी डॉ केशव पांडे और सिंधिया के पारिवारिक सदस्य बाल खांडे से इस वायरल मैसेज की सच्चाई पूछी तो उन्होंने भी से अफवाह बताया। यानि स्पष्ट हो गया कि सिंधिया ने अपने महल को आइसोलेशन वार्ड में नहीं बदला, किसी ने ये झूठी खबर वायरल किया है।

ये है 400 कमरों वाले जय विलास पैलेस का वैभव

ग्वालियर रियासत के शासक सिंधिया राजवंश के निवास स्थान जय विलास पैलेस का वैभव विश्वप्रसिद्ध है। दुनिया के कई राज परिवार के पास वैसा वैभव नहीं है जैसा सिंधिया राज परिवार के पास है। 1240771 वर्ग फीट में फैले 400 कमरों वाले इस राजमहल का निर्माण 1874 में तत्कालीन सिंधिया शासक जयाजी राव सिंधिया ने कराया था। इसका निर्माण नाइटहुड की उपाधि प्राप्त विश्व प्रसिद्ध आर्किटेक्ट माइकल फिलोस ने यूरोपियन शैली में किया था। तब इसकी कीमत एक करोड़ रुपये आई थी। आज इसके बहुत बड़े हिस्से में ज्योतिरादित्य सिंधिया का परिवार रहता है, एक हिस्से में उनकी बुआ पूर्व मंत्री यशोधरा राजे का निवास है, बाहरी हिस्से में उनकी उनके पिता की मामी पूर्व मंत्री माया सिंह रहती है। इसके अलावा महल के अंदर सर्वेंट क्वार्टर में महल के कर्मचारी रहते हैं।

महल के 40 कमरों में है म्युजियम

खास बात ये है कि जय विलास पैलेस के 40 कमरों को वर्षों पहले म्युजियम में बदल दिया गया। इस म्युजियम का दरबार हॉल विश्व में अपनी अलग ख्याति रखता है। इस दरबार हॉल की विशेषता है कि इसमें बीच में खंबे नहीं है और इसकी छत पर 7 – 7 टन के दो भारी झूमर लटके हैं बताया जाता है कि इन झूमरों को लटकाने से पहले माइकल फिलोस ने दस हाथियों को छत पर चढ़कर छत की मजबूती का टेस्ट किया था। इस म्युजियम मे एक चांदी की रेल भी है जो विश्व में कहीं नहीं है। ये रेल एक बड़ी से डाइनिंग टेबल पर सजाई गई है बताते हैं कि जब कोई विशिष्ट अतिथि आता था तब सिंधिया राजपरिवार के सदस्य इसी टेबल पर बैठकर खाना खाते थे। इस ट्रेन में छोटे छोटे डिब्बे थे जिनमें भोजन रखा जाता था और डाइनिंग टेबल पर बिछी पटरी पर चलती थी और जो सदस्य भोजन लेते थे ट्रेन वहीं रुक जाती थी और ढक्कन रखते ही आगे बढ़ जाती थी। इसके अलावा इस म्युजियम में सिंधिया राजघराने के अस्त्र शस्त्र, बग्गी, अन्य पहचान चिन्ह, कांच के पायों से बनी सीढ़िया, पेंटिंग, उपहार और बहुत रखा गया है जिसे देखने सैंकड़ो लोग रोज आते हैं।

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