Nisarg: चेतावनी के बाद भी प्रशासन लापरवाह, 20 हज़ार मीट्रिक टन गेहूं भींगा, ट्रांसपोर्टरों पर पैनाल्टी लगाने के निर्देश

भोपाल।

निसर्ग तूफ़ान का सबसे ज्यादा नुकसान मध्यप्रदेश के फसलों को हुआ है। खरीद केंद्रों पर खुले में पड़ा लाखों टन गेहूं प्री-मानसून बारिश में गीला हो गया। चार दिन पहले ही मौसम विभाग निसर्ग की चेतावनी के बाद भी प्रशासन ने लापरवाही की। जिसका नुकसान ये हुआ कि प्रदेश कि करीबन 20 हजार मीट्रिक टन गेहूं भींगकर बर्बाद हो गए हैं। वहीँ अभी भी 29 हजार मीट्रिक टन गेहूं अब भी बाहर पड़ा हुआ है।

दरअसल समय से खरीदी केंद्रों पर परिवहन न होने के कारण भोपाल में वाटरप्रूफ टेंट की व्यवस्था न होने से साढ़े 12 हजार टन गेूहं भीग गया। जबकि उज्जैन में करीब दो लाख टन, देवास में 47 हजार टन, धार में 68 हजार टन, शाजापुर में 60 हजार टन, राजगढ़ में 15 हजार टन, विदिशा में 11 हजार टन, झाबुआ में चार हजार टन और रायसेन में दो हजार टन गेहूं भीगने की बात कही गयी है।वहीँ बुधवार को कलेक्टर तरुण पिथोड़े ने सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक के महाप्रबंधक और सहकारी संस्थाओं के उपायुक्त को आदेश जारी किया था। इसमें कहा गया था कि जहां गेहूं रखा है उसके आसपास पानी की निकासी के लिए नाली बनवाई जाएं। समय पर परिवहन न करने के लिए नागरिक आपूर्ति निगम के अधिकारियों को ट्रांसपोर्टरों पर पैनाल्टी लगाने के लिए कहा गया था।

दूसरी तरफ भोपाल में खरीद केंद्र के कर्मचारियों का कहना है कि उच्चाधिकारियों ने तिरपाल नहीं भिजवाई। पिछले दिनों कलेक्टर ने अफसरों को निर्देश दिए थे कि बारिश की संभावना को देखते हुए खुले में रखे गेहूं को अच्छे से ढंक दिया जाए। जबकि समिति प्रभारियों ने बारिश के हाई अलर्ट के बाद भी गेहूं की बोरियों को भीगने से बचाने के लिए तिरपाल नहीं ढांका। इसके साथ ही खाद्य विभागीय अधिकारियों के पास गेहूं खरीदी की मॉनीटरिंग का काम था, वह भी ठीक ढंग से नहीं किया। वहीँ उपायुक्त सहकारिता का कहना है कि जिला खाद्य आपूर्ति नियंत्रक, भोपाल ने कहा है कि भोपाल में खरीदी केंद्रों पर गेहूं भीगने के मामले में मैं अकेला जिम्मेदार नहीं हूं। इसमें खरीदी में शामिल सभी लोग जिम्मेदार हैं। जबकि अरस्तू प्रभाकर, एमडी, केंद्रीय सहकारी बैंक ने कहा है कि गेहूं भीगने के लिए सहकारिता विभाग ही जिम्मेदार नहीं है। इससे जुड़े अन्य विभाग भी जिम्मेदार है, अगर गेहूं भीग भी गया तो सुखाया जायेगा। कितना नुकसान हुआ, यह अभी बताना संभव नहीं है ।