अब सुप्रीम कोर्ट की शरण में पहुंची कमलनाथ सरकार, लगाई ये अर्जी

KAMAL NATH

भोपाल।

मध्य प्रदेश की सियासी हलचल को तेज करते हुए भाजपा के बाद कांग्रेस ने भी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। मंगलवार को मध्य प्रदेश सरकार के संसदीय कार्य मंत्री गोविंद सिंह ने अपने 16 कांग्रेसी विधायकों की रिहाई के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। जिसमें कांग्रेस की तरफ से बीजेपी पर हॉर्स ट्रेडिंग का आरोप लगाया गया है।

कांग्रेस की तरफ से दाखिल याचिका में बीजेपी पर हॉर्स ट्रेडिंग का आरोप लगाते हुए यह कहा गया है कि बीजेपी नेताओं के द्वारा कांग्रेस विधायकों के इस्तीफे विधानसभा अध्यक्ष तक पहुंचाए गए थे। वहीं उन्होंने बीजेपी पर अपने 16 कांग्रेसी विधायकों के अपहरण का आरोप लगाते हुए कोर्ट से उनकी रिहाई सुनिश्चित करने की मांग की है। साथ ही साथ इस याचिका में राज्यपाल के आदेश पर भी सवाल उठाया गया है। याचिका में कहा गया है कि गवर्नर पहले से यह मानकर चल रहे हैं कि कमलनाथ सरकार अल्पमत में आ गई है। जबकि बंधक बने 16 विधायकों की रिहाई के बिना फ्लोर टेस्ट होना असंभव है। वहीं कांग्रेस के याचिका में प्रतिभागियों में केंद्र सरकार, कर्नाटक सरकार, मध्य प्रदेश सरकार, मध्य प्रदेश बीजेपी और कांग्रेस के 16 विधायकों के नाम शामिल है। बता दे कि इससे पूर्व बीजेपी ने मध्य प्रदेश सरकार के बहुमत परीक्षण के मामले पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। जिसमें उन्होंने 12 घंटे के अंदर मध्यप्रदेश विधानसभा में कमलनाथ सरकार को फ्लोर टेस्ट करवाने की मांग की थी। जिस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार सुबह 10:30 बजे कमलनाथ सरकार और स्पीकर को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। जिसके साथ ही विधानसभा की कार्यवाही मंगलवार के लिए स्थगित कर दी गई थी। ज्ञात हो कि इससे पहले सोमवार को राज्यपाल लालजी टंडन ने कमलनाथ सरकार को पत्र जारी करते हुए मंगलवार को विधानसभा में शक्ति परीक्षण के लिए आमंत्रण दिया था। जिसके बाद सोमवार को कमलनाथ सरकार ने पत्र लिखकर राज्यपाल से अपने बंधक बने विधायकों की रिहाई से पूर्व फ्लोर टेस्ट करवाने को असंवैधानिक करार दिया था।

गौरतलब हो कि सोमवार को फ्लोर टेस्ट की संभावना को देखते हुए कांग्रेस और बीजेपी ने अपने अपने विधायकों को वापस भोपाल बुला लिया था। किंतु सोमवार को विधानसभा बजट सत्र के शुरुआत में राज्यपाल के अभिभाषण के बाद कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुए विधानसभा को 26 मार्च के लिए स्थगित कर दिया गया था। जिसके बाद बीजेपी विधायकों ने विधानसभा में परेड लगाए थे और उसके बाद बीजेपी की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी।