बैठक के बाद बोले पीएम मोदी – कोरोना के खिलाफ 3 बड़े हथियार को बनाएं संसाधन

इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित अन्य राज्यों के मुख्यमंत्री को दिशा निर्देश दे सकते हैं।

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। कोरोना (corona) को लेकर पीएम मोदी (PM Modi) लगातार बैठकें कर रहे हैं। जिन राज्य में कोरोना के केस ज्यादा है। उन राज्यों के मुख्यमंत्री और अधिकारियों के साथ लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (narendra modi) की बैठक जारी है। इसी बीच आज एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विशेष बैठक आयोजित की गई।

दरअसल आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के सबसे ज्यादा संक्रमित राज्यों के कलेक्टर सहित अधिकारियों से चर्चा की । इस दौरान राज्यों के मुख्यमंत्री भी इस बैठक में मौजूद रहे। बैठक में कोरोना संक्रमण की स्थिति और उसकी रोकथाम के लिए किए जा रहे उपायों पर चर्चा की गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कोरोना संक्रमण के नियंत्रण के संबंध में आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान वर्चुअली शामिल हुए। चर्चा में केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने मध्यप्रदेश द्वारा समुदाय को कोरोना के प्रबंधन में जोड़ने के नवाचार की सराहना की।

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इस बैठक में मध्य प्रदेश के अलावा गोवा, कर्नाटक, तमिलनाडु, दिल्ली, बिहार, उत्तराखंड सहित हिमाचल प्रदेश के 46 जिला अधिकारी और राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हुए। बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित अन्य राज्यों के मुख्यमंत्री को दिशा निर्देश दिए।

कोरोना से प्रभावित राज्यों के अधिकारियों और मुख्यमंत्री से चर्चा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इससे निपटने के लिए कुछ सुझाव भी दिए। पीएम मोदी ने कहा कि हमारे देश में जितने जिले हैं। उतनी ही अलग-अलग तरह की चुनौतियां भी है। इसलिए जिलाधिकारी लोग उन चुनौतियों को अच्छे से समझते हैं। ऐसी स्थिति में जरूरी है कि सभी जिला अधिकारी अपने अपने जिले को जिताते हैं अगर जिला जीतता हैं तो देश जीतेगा।

वही कोरोना के 3 बड़े हथियार पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इस वायरस के खिलाफ हमारे पास हथियार के रूप में सिर्फ एग्रेसिव टेस्टिंग और कंटेनमेंट जोन है। अगर हम लोकल कंटेनमेंट जोन बनाकर आगे बढ़ेंगे और लोगों तक से ही सुविधाएं उपलब्ध करेंगे तो हम इस बीमारी पर जल्दी अंकुश पा जाएंगे। कितने अस्पताल में कितनी डेट उपलब्ध है। कितनी दवाइयां उपलब्ध है। इसकी अगर जानकारी लोगों तक सही मायने में पहुंचेगी तो कालाबाजारी पर लगाम लगेगा और लोगों को उचित इलाज मिलेंगे।

3T पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि संक्रमण को रोकने की जिम्मेदारी हमारी है। इसके लिए हमें टेस्टिंग ट्रैकिंग और ट्रीटमेंट पर लगातार बल देते रहने की जरूरत है। इसके अलावा हर नागरिक के जीवन को आसान बनाने के लिए हमें उसे दैनिक जीवन से जुड़ी चीजें भी सप्लाई करनी होगी। जिससे उन्हें बेहतर इलाज के साथ-साथ बेहतर जीवन की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाए।

वही वैक्सीन के खिलाफ भ्रम दूर करने की बात कहते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कोरोना की लड़ाई में टीकाकरण एक सशक्त माध्यम है। इसलिए वैक्सीन से जुड़े हर भ्रम को हमें दूर करना होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जानकारी देते हुए बताया कि देश के हर जिले के अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट लगाने का कार्य तेजी से किया जा रहा है कई अस्पताल में यह प्लांट लगने शुरु भी हो गए हैं। हमारी कोशिश है कि हर जिले में यह प्लांट आवंटित किए जाएं और जल्द से जल्द यह प्लांट तैयार किए जाए।

बैठक के बाद सीएम शिवराज ने कहा कि मध्यप्रदेश में कोरोना को नियंत्रित करने में ग्राम पंचायत, ब्लॉक व ज़िला स्तरीय क्राइसिस मैनेजमेंट टीम व इसमें शामिल सभी पक्षों के जनप्रतिनिधियों की सहभागिता है। यह राज्य की बेस्ट प्रेक्टिस है। अन्य बेस्ट प्रैक्टिस शहरों और ज़िलों की है। इस मॉडल से सरकार पर आने वाला भार कम हुआ है व जनता से सीधा जुड़ाव कोरोना को रोकने में कारगर साबित हुआ है।

वहीँ सीएम शिवराज ने कहा कि आज विभिन्न ज़िला दंडाधिकारियों के साथ माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीसी द्वारा बैठक की। प्रधानमंत्री द्वारा मध्यप्रदेश के सामुदायिक सहभागिता को सराहा गया है जिसके लिए मैं उन्हें सादर धन्यवाद देता हूँ।

बता दें कि इससे पहले सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फंगस इंफेक्शन को लेकर देश के वरिष्ठ डॉक्टरों से चर्चा की थी। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्री सहित डॉक्टरों को हिदायत दी है कि फंगस इंफेक्शन को लेकर प्रारंभिक स्तर पर ही दवाइयों सहित अन्य व्यवस्था की तैयारी जोरों शोरों से की जाए। वहीं टेलीमेडिसिन सेवा सभी राज्यों सहित जिलों में उपलब्ध कराए जाने की वकालत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि किसी भी तरह से मरीजों को दिक्कतों का सामना ना करना पड़े। ऐसी व्यवस्था की जानी चाहिए।