सियासी उठापटक के बीच दिग्विजय के विधायक भाई दिल्ली रवाना, चर्चाओं का बाजार गर्म

गुना।
इन दिनों प्रदेश की कमलनाथ सरकार बीजेपी से ज्यादा अपनों से घिरी हुई है।गुटबाजी और अंतकलह के चलते अपने ही सरकार की मुश्किलें बढ़ा रहे है। एक तरफ जहां ये तूफान से निपटने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह राहत और बचाव कार्य में जुटे है वही दूसरी तरफ उन्ही के छोटे भाई और चाचौड़ा के कांग्रेस विधायक लक्ष्मण सिंह दिल्ली रवाना हो गए है।उनके दिल्ली जाने की खबर से सियासी गलियारों में कई तरह के कयास लगना शुरु हो गए है। सुत्रों की माने तो वे यहां हाईकमान से मुलाकात कर सकते है।खास बात ये है कि लक्ष्मण ऐसे समय में दिल्ली रवाना हुए है जब पार्टी पर संकट के बादल छाए हुए है और हर कोई तनाव से गुजर रहा है।खैर लक्ष्मण के दिल्ली जाने के पीछे क्या वजह है ये तो वही बता सकते है ।

दरअसल, बीते कई दिनों से लक्ष्मण सिंह चाचौड़ा को जिला बनाने की मांग कर रहे है, इसके लिए वह गिरिराज पर्वत की परिक्रमा भी कर रहे है, ताकी मुख्यमंत्री कमलनाथ को भगवान सदबुद्धि दे और वे ताकि जल्दी से चाचौड़ा को जिला बनाने की घोषणा करें। लेकिन अबतक उनकी मांग को पूरा नही किया गया है, जिसके चलते वे सरकार से नाराज चल रहे है। पहले भी कई मौकों पर वे अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके है। वही मोदी सरकार के समर्थन में उनकी बयानबाजी भी चर्चा में रही है। सरकार जहां डेमेज कंट्रोल में जुटी हुई है, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय और मुख्यमंत्री कमलनाथ लगातार विधायकों को एकजुट करने में जुटे है, वही दूसरी तरफ उन्ही के विधायक भाई पार्टी की मुश्किलें बढ़ा रहे है।वो भी ऐसे समय जब पार्टी आर्थिक संकट से जूझ रही है।

बीते दिनों मीडिया से चर्चा करते हुए विधायक ने यह भी कहा था कि कमलनाथ सरकार ने कैमरे के सामने चाचौड़ा तहसील को जिला बनाने की बात कही थी। अब अगर वो अपनी बात से पलटेंगे तो जनता तथा विधायक उनकी बात पर यकीन कैसे करेंगें। लक्ष्मण सिंह ने बयान देते कहा था की मुख्यमंत्री कमलनाथ ने वादा किया था कि चाचौड़ा को जल्द से जल्द जिले का दर्जा दिया जाएगा, लेकिन मुख्यमंत्री अब अपनी ही बात से पलट रहे हैं।

गौरतलब है कि चाचौड़ा गुना जिले के ग्वालियर संभाग में आता है। जिसकी विधानसभा सीट सन 1951 में अस्तित्व में आई थी। जिसके लिए अर्जुन सिंह समय समय पर सरकार को ज्ञापन सौंपते रहे हैं। मालूम हो कि विगत वर्ष कमलनाथ सरकार ने आश्वासन दिया था कि छिंदवाड़ा की तर्ज पर ही चाचौड़ा का विकास किया जाएगा किंतु उसके बाद से इस तरफ कोई पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए हैं।