MP Politics: कमलनाथ के नेतृत्व पर उठने लगे सवाल, विधायक भी हो रहे लामबंद

पार्टी के कई दिग्गज नेताओं द्वारा यह बोला गया है कि कमलनाथ नेताओं को उनके समर्थ अनुसार कार्य नहीं सौंपते हैं। अब ऐसे में मध्यप्रदेश में कांग्रेस फिलहाल राम भरोसे ही आगे बढ़ती नजर आ रही है।

कमलनाथ

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। मध्य प्रदेश (Madhya pradesh) के 28 सीटों के उपचुनाव (28 seats by-election) के नतीजे सामने आ चुके हैं। इसके साथ ही जनता ने स्पष्ट तौर पर शिवराज सरकार (shivraj government) को बहुमत सौंपा है। उपचुनाव (Byelection) के नतीजे से पहले जहां मध्य प्रदेश सहित पूरे देश को उम्मीद थी कि कमलनाथ (kamalnath) के नेतृत्व में कांग्रेस बड़े परिवर्तन करेगी। वही इस नतीजे ने एक बार फिर से कमलनाथ के नेतृत्व को सवालों के घेरे में रख दिया है। इसके साथ जो सवाल तेजी से लोगों के मन में उठ रहे हैं वह है कि क्या मध्यप्रदेश में कांग्रेस को कमलनाथ के भरोसे छोड़ सकते हैं? हालांकि अब इस सवाल के जवाब में कांग्रेस का अंदरूनी वर्ग भी कन्नी काटता नजर आ रहा है।

दरअसल कांग्रेस के आलाकमान के सामने एक बड़ी चुनौती है। मध्यप्रदेश में कांग्रेस को संगठित करने की। इसका कारण है पार्टी के विधायकों द्वारा कमलनाथ के नेतृत्व पर सवाल उठाना। 28 विधानसभा सीटों में करारी शिकस्त झेलने के बाद अब कांग्रेसी नेता कमलनाथ से सवाल करते नजर आ रहे। इस मामले में भी ट्वीट (Tweet) करते हुए बृजभूषण नाथ (Brij Bhushan Nath) ने सवाल खड़े किए। बृजभूषण नाथ का कहना है कि आखिर मध्यप्रदेश में कमलनाथ की हार का कारण क्या है। क्या कमलनाथ का मैनेजमेंट फेल था, सर्वे गलत था या नाथ के आसपास के सलाहकार ही गलत थे। जिस तरह से बृजभूषण नाथ ने सवाल पूछा उससे साफ है कि कहीं ना कहीं कांग्रेस के अंदर नेताओं के बीच यह सवाल बहुत दिनों से पनप रहे है।

वहीं मध्यप्रदेश कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता स्वदेश शर्मा (Swadesh Sharma) ने भी कमलनाथ और उनके सलाहकारों पर सवाल खड़े किए है। स्वदेश शर्मा ने ट्वीट करते हुए लिखा कि राजनीति में अपरिपक्व सहयोगी, सलाहकारों अथवा प्रोफेशनल प्रबंधकों से काम नहीं चलता। वहीं उन्होंने कहा कि कांग्रेस को जमीन पर काम करने वाली टीम बनाकर हर स्तर पर नए लीडरशिप (News Leadership) तैयार करने की जरूरत है। ऐसे में यह साफ जाहिर है कि कांग्रेस के नेता ही कमलनाथ उनके नेतृत्व और उनके सलाह प्रबंधन पर भरोसा नहीं कर पा रहे हैं।

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सूत्रों के मुताबिक कमलनाथ के सलाहकारों द्वारा ही उन्हें अंधेरे में रखा जा रहा है। नेतृत्व क्षमता हो या पार्टी की बड़ी गलतियां, उसे नजरअंदाज किया जा रहा है। वही चर्चा ये भी है कि कांग्रेस की करारी हार के बाद पार्टी के 45 विधायक पार्टी की गतिविधियों से हताश होकर दिल्ली रवाना हो रहे है। अब ऐसे में मध्य प्रदेश कांग्रेस को जमीन पर एक बार फिर से खड़ा करने के लिए और पार्टी को संगठित करने के लिए पार्टी हाईकमान क्या निर्णय लेती है। यह तो फिलहाल चर्चा का विषय है। हालांकि उपचुनाव में करारी शिकस्त झेलने के बाद कमलनाथ ने आज विधायक दल की बैठक बुलाई है।

दूसरी तरफ कमलनाथ इस उपचुनाव में सिंधिया (scindia) और उनके समर्थकों तक को नहीं संभाल पाए। इसके बाद भी उपचुनाव को लेकर जब उन्हें दूसरा मौका मिला तब भी उन्हें अकेले ही चुनाव प्रचार प्रसार की बागडोर अपने हाथ में लिए देखा गया। हालांकि इसके कई सियासी मतलब निकाले जा रहे हैं। केंद्रीय नेतृत्व का मध्य प्रदेश और कमलनाथ की राजनीतिक शैली में हस्तक्षेप ना करना एक बड़े सवाल खड़े कर रहा है। जहां बात सरकार बनाने की थी वहां कांग्रेस हाईकमान का कमलनाथ को इस तरह के लिए छोड़ देना कमलनाथ के नेतृत्व पर एक गहरा सवाल है।

हालांकि कांग्रेस के अंदर समीकरण बेहद कमजोर नजर आ रहे हैं। प्रदेश पार्टी कमेटी और केंद्रीय कमेटी के बीच एक तरह से कोई समन्वय नहीं है। वहीं दूसरी तरफ मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार गिरने के बाद भी कांग्रेसी खेमे में कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिला था। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं द्वारा भी कई बार कमलनाथ के नेतृत्व पर सवाल खड़े किए गए। पार्टी के कई दिग्गज नेताओं द्वारा यह बोला गया है कि कमलनाथ नेताओं को उनके समर्थ अनुसार कार्य नहीं सौंपते हैं। अब ऐसे में मध्यप्रदेश में कांग्रेस फिलहाल राम भरोसे ही आगे बढ़ती नजर आ रही है।

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