सातवें वेतनमान को लेकर सरकार के ऐलान के बाद भी अधिकारी-कर्मचारियों में रोष, ये है वजह

अध्यापक संघ का कहना है कि उन्हें जुलाई 2018 से शिक्षा सेवा कैडर में शामिल कर सातवें वेतनमान देने के निर्देश दिए गए थे किंतु जुलाई 18 से सितंबर 19 तक का एरियर राज्य शासन द्वारा अभी तक उन्हें भुगतान नहीं किया गया है।

सातवें वेतनमान

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। बीते दिनों मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Chief Minister Shivraj Singh Chauhan) ने उपचुनाव (by election) से पहले अधिकारी कर्मचारियों के लिए थोड़ी घोषणा की थी। जहां उन्होंने ऐलान किया था की कर्मचारियों को दीपावली से पहले सातवें वेतनमान (Seventh pay scale) की तीसरी किस्त (third installment)  का 25 फ़ीसदी भुगतान किया जाएगा। लेकिन प्रदेश सरकार के इस ऐलान के बावजूद प्रदेश के 4.50 लाख अधिकारी-कर्मचारियों को कोई खुशी नहीं हुई है।

दरअसल बीते दिनों राज्य सरकार के सातवें वेतनमान की तीसरी किस्त के 25 फीसद भुगतान के ऐलान के बावजूद अधिकारियों और कर्मचारियों में कोई उत्साह देखने को नहीं मिला। इसका कारण है अब तक उन्हें सातवें वेतनमान की पहली या दूसरी किस्त का नहीं मिलना। वहीं प्रदेश के ढाई लाख अध्यापकों को अब तक छठे वेतनमान (sixth pay scale) की तीसरी किस्त ही नहीं उपलब्ध कराई गई है। जिसके बाद अधिकारी-कर्मचारियों में सरकार के प्रति आक्रोश देखने को मिल रहा है।

इस मामले में अध्यापक संघ का कहना है कि उन्हें जुलाई 2018 से शिक्षा सेवा कैडर में शामिल कर सातवें वेतनमान देने के निर्देश दिए गए थे किंतु जुलाई 18 से सितंबर 19 तक का एरियर राज्य शासन द्वारा अभी तक उन्हें भुगतान नहीं किया गया है। इसके साथ ही सातवें वेतनमान का भुगतान भी उन्हें काफी देर से किया गया था।

दूसरी तरफ निगम मंडल महासंघ के महामंत्री चंद्रशेखर परसाई की माने तो अब तक 28 में से केवल दो निगम में ही पहली या दूसरी किस्त का भुगतान किया गया है। वहीं मध्य प्रदेश दुग्ध संघ कर्मचारी कांग्रेस के महामंत्री एमसीसीडीएफ के एमडी से मिलने पहुंचे थे। वहीं उन्होंने अपील की है कि दुग्ध संघ के कर्मचारियों-अधिकारियों को सातवें वेतनमान की दूसरी किस्त ही अब तक अदायगी नहीं की गई है। जिसका भुगतान जल्द से जल्द कराया जाए।

Read This: MP उपचुनाव 2020 : ज्योतिरादित्य सिंधिया का हेलीकॉप्टर भटका, हवा में लगाता रहा चक्कर

इससे पहले कर्मचारियों को कहना था कि कोरोना काल में उन्हें काफी आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है। इस बीच राज्य सरकार द्वारा एरियर और वेतनमान की पहली और दूसरी किस्त अबतक भुगतान नहीं की गई है। वही तृतीय वर्ग संघ के सचिव का कहना है कि भुगतान जीपीएफ में न देने की जगह नगद किया जाना चाहिए। ज्ञात हो कि 56800 के करीब सार्वजनिक उपक्रमों में वेतनमान का इंतजार किया जा रहा है। 1657 विकास प्राधिकरण के अधिकारियों कर्मचारियों को वेतनमान का इंतजार है।

बता दें कि आर्थिक हालातों को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने कर्मचारियों के डीए पर रोक लगा दी थी। जिसके बाद विधानसभा उपचुनाव के बीच मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने त्योहारों को नजर में रखते हुए सरकारी कर्मचारियों के लिए सातवें वेतनमान की तीसरी किस्त का भुगतान 25 फ़ीसदी करने का निर्णय लिया है। वहीं उन्होंने कहा है कि बचे हुए 75 फीसद का भुगतान भी इसी वित्तीय वर्ष में कर दिया जाएगा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here