MP विधानसभा: मंत्री बनने से चूके BJP विधायक रामेश्वर शर्मा बने प्रोटेम स्पीकर

भोपाल।

भोपाल की हुजुर विधानसभा से बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा (BJP MLA Rameshwar Sharma from Huzur Assembly) को पार्टी ने बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। पार्टी ने शर्मा को प्रोटेम स्पीकर (Protem Speaker) बनाया है। शिवराज मंत्रिमंडल विस्तार (Shivraj cabinet expansion) में भाजपा विधायक जगदीश देवड़ा  (BJP MLA Jagdish Deora) के कैबिनेट मंत्री बनने के बाद यह पद  खाली हो गया था, देवड़ा ने मंत्री पद की शपथ से पहले प्रोटेम स्पीकर के पद से इस्तीफा दे दिया था। रामेश्वर शर्मा बीजेपी के कद्दावर विधायकों में से माने जाते है, वे आखिरी तक शिवराज कैबिनेट के लिए चुने हुए मंत्रियों की लिस्ट में शामिल थे, लेकिन ऐन मौके पर हाईकमान ने लिस्ट में बदलाव किया और वे बाहर हो गए।

खास बात यह है कि अध्यक्ष का पद रिक्त होने की स्थिति में हुजूर विधायक रामेश्वर शर्मा को प्रोटेम स्पीकर बनाया गया है। इसके अलावा विधानसभा में उपाध्यक्ष का पद भी रिक्त है।राज्यपाल की ओर से संविधान के अनुच्छेद 180 के खंड (1) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए रामेश्वर शर्मा को अध्यक्ष के निर्वाचन तक अध्यक्ष पद के कर्तव्यों के निर्वहन के लिए नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति विधानसभा अध्यक्ष की नियुक्ति तक रहेगी।

बता दे कि कोरोना संकटकाल और लॉकडाउन के बीच प्रदेश में विधानसभा का मानसून सत्र 20 से 24 जुलाई तक होगा। इस पांच दिवसीय सत्र में ही प्रदेश का बजट भी पारित किया जायेगा। वहीँ पांच दिन के सत्र में पांच बैठकें भी संचालित होंगी।

कौन होता है प्रोटेम स्पीकर

प्रो-टेम स्पीकर’ में ‘प्रो-टेम’ (Pro-tem) शब्द लैटिन भाषा के शब्द ‘प्रो टैम्पो र’ (Pro Tempore) का संक्षिप्त रूप है, जिसका अर्थ होता है- ‘कुछ समय के लिए’। वास्तव में, राज्य विधानसभाओं या लोकसभा के स्पीकर के पद पर आसीन कार्यचालक/कार्यवाहक (ऑपरेटिव) व्यक्ति, जो अस्थायी रूप से यह पद धारण करता है, उसे ही ‘प्रो-टेम स्पीकर’ कहा जाता है। एक ‘प्रो-टेम स्पीकर’ को, आम चुनाव या राज्य विधानसभा चुनावों के बाद, नए स्पीकर और डिप्टी स्पीकर चुने जाने तक सीमित अवधि के लिए कार्य करना होता है।

इन परिस्थियों में करना पड़ता है प्रोटेम स्पीकर का चुनाव

आमतौर पर, सदन के वरिष्ठतम सदस्य को इस पद के लिए चुना जाता है। वह सदन को नए एवं स्थायी स्पीकर का चुनाव करने में सक्षम बनाता है। नए स्पीकर के निर्वाचित होने के बाद, प्रो-टेम स्पीकर के कार्यालय का अस्तित्व समाप्त हो जाता है।

भारत के संविधान का अनुच्छेद 180 (1), प्रदेश के राज्यपाल को सदन का प्रो-टेम स्पीकर नियुक्त करने की शक्ति देता है। यह अनुच्छेद कहता है कि यदि सदन के स्पीकर का पद खाली हो, और उस पद को भरने के लिए कोई डिप्टी स्पीकर मौजूद न हो, तो स्पीकर के कार्यालय के कर्तव्यों को “विधानसभा के ऐसे सदस्य द्वारा निष्पादित किया जाएगा, जैसा कि राज्यपाल इस प्रयोजन के लिए नियुक्त कर सकता है”।

 

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