इंदौर कलेक्टर के आदेश पर बवाल, कुछ ही घण्टो में बदलना पड़ा

इंदौर।आकाश धोलपुरे।

इंदौर में कोविड नियमों के सख्ती से पालन कराने के लिए कलेक्टर मनीष सिंह बीते एक सप्ताह से स्पॉट फाइन को लेकर चेतावनी देते आ रहे थे और शुक्रवार शाम को उन्होंने एक आदेश जारी कर स्पॉट फाइन के साथ कोविड नियमो के उल्लंघन को लेकर अलग अलग कानूनी धाराओं के तहत बेफिक्र लोगो पर नकेल कसने के लिये आदेश भी जारी कर दिया। लेकिन इस आदेश में एक बात इंदौर की जनता और जनप्रतिनिधियों को खलने लगी जिस पर तमाम सवाल सोशल मीडिया न सिर्फ बीजेपी नेताओं ने उठाये बल्कि कांग्रेस ने भी। लिहाजा इंदौर कलेक्टर मनीष सिंह ने आदेश क्रमांक 584 में संशोधन कर एक नया आदेश जारी कर दिया।नए आदेश क्रमांक 588 में गमछे और रुमाल पर लगी रोक हटा दी हालांकि ये भी स्पष्ट किया गया कि गमछा या रुमाल 2 लेयर का होना चाहिए।

दरअसल, इंदौर कलेक्टर मनीष सिंह ने आम जनता के लिये पहले आदेश में एन-95 और सर्जिकल मास्क लगाना अनिवार्य कर दिया था और इनका इस्तेमाल न कर गमछा या रुमाल बांधने वालो पर 100 रुपए से लेकर कार्यालयीन संस्थाओं की गलती पाए जाने पर 10 हजार तक के स्पॉट फाइन के आदेश जारी किए थे। इसके बाद आम जनता और जनप्रतिनिधियों के मन मे एक ही सवाल उठने लगा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जब सार्वजनिक तौर पर गमछे व रुमाल को मास्क के रूप में इस्तेमाल करने को कहा है ऐसे में इंदौर कलेक्टर मनीष सिंह ने ऐसा आदेश क्यों जारी कर दिया।

जहां, बीजेपी के वरिष्ठ नेता कृष्णमुरारी मोघे ने इस आदेश पर कहा कि प्रशासन आम जनता को निःशुल्क सर्जिकल मास्क उप्लब्ध करवाये या आदेश पर पुर्नविचार करे। वही इंदौर सांसद शंकर लालवानी का भी एक संदेश सामने आया जिसमे लिखा गया कि जिला प्रशासन के आदेश की जानकारी मुझे मिली है जिसमें गमछे पर भी स्‍पॉट फाइन का जिक्र है। गमछे, रुमाल आदि से मुंह ढांकने की अनुमति रहेगी ,और इस विषय में संशोधित आदेश जल्‍द ही निकाला जाएगा। इधर, कांग्रेस ने भी इस मामले को लेकर तत्काल प्रभाव से आदेश वापस लेने की मांग कर डाली।

सोशल मीडिया पर उठ रही और गमछे व रुमाल के बवाल के बाद आखिरकार कलेक्टर मनीष सिंह ने एक नया आदेश जारी किया जिसमें डबल लेयर गमछे और रुमाल के अलावा थ्री लेयर एन-95 मास्क और सर्जिकल मास्क को पहनने को अनिवार्य कर दिया। वही स्पाट फाइन को लेकर आदेश में व्यक्तिगत और संस्थागत परिस्थिति के आधार पर 100 रुपए से लेकर 10 हजार रुपए तक फाइन निर्धारित किया गया है।

हालांकि, कल रात तक आदेश में मचे बवाल और उठे सवालो में आम जनता से लेकर खास लोगो के मन मे ये ही सवाल उठ रहा था कि पीएम मोदी की बाते माने या कलेक्टर मनीष सिंह की। बता दे कि बीते एक सप्ताह में ये दूसरा आदेश सामने आया है जिसको लेकर सवाल उठ रहे है इसके पहले योग गुरु बाबा रामदेव की पतञ्जलि दवाओं को लेकर संशय के बाद कलेक्टर मनीष सिंह ने आदेश पर रोक लगा दी थी।

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