MP Politics: स्पीकर-डिप्टी स्पीकर के चुनाव को लेकर मंथन तेज, भाजपा लेगी कांग्रेस से बदला

दरअसल मध्य प्रदेश की पहचान राजनीतिक सौहार्द के रूप में रही है। प्रदेश में मान्य परंपरा के तहत अध्यक्ष पद पर सत्ताधारी दल के नेता की ताजपोशी होती थी और उपाध्यक्ष पद विपक्ष को दिया जाता था। लेकिन 2018 में बनी कांग्रेस की सरकार ने आते ही इस परंपरा को तोड़ दिया और दोनों ही संवैधानिक पद पर अपने ही नेताओं की ताजपोशी करवा दी।

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भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। उप-चुनाव (By-election) में मिली प्रचंड जीत के बाद दोबारा ताकतवर हुई बीजेपी (BJP) अब कांग्रेस (Congress) से अपना हिसाब बराबर करने के मूड में है। कांग्रेस की तरह अब बीजेपी ने भी यह तय किया है कि वह विधानसभा अध्यक्ष (Assembly Speaker) और उपाध्यक्ष दोनों पदों पर अपने प्रत्याशी खड़े करेगी। हालांकि अभी इस पर मंथन जारी है की अध्यक्ष और उपाध्यक्ष किसे बनाया जाए। माना जा रहा है कि तीन से चार दिन में इसका फैसला हो जाएगा।

कांग्रेस में भी रस्सा कस्सी

कांग्रेस में भी नेता प्रतिपक्ष (Leader Opposition) को लेकर रस्सा कस्सी जारी है, करीब आधा दर्जन नेता – सज्जन सिंह वर्मा, विजयलक्ष्मी साधो, बाला बच्चन, उमंग सिंगार, डॉ. गोविंद सिंह और बृजेन्द्र सिंह का नाम शामिल है। बताया जा रहा है पार्टी हाईकमान ने आदिवासी नेता और पूर्व मंत्री बाला बच्चन के नाम पर सहमति जताई है, हालांकि अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

नहीं हैं कोई स्थाई अध्यक्ष

प्रदेश में दोबारा से बीजेपी सरकार (BJP Government) बने करीब 9 महीने का वक्त गुज़र चुका है, लेकिन अभी तक स्थाई विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव नहीं हो पाया है। मार्च में बीजेपी के सत्ता में आने के बाद विधानसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद से नर्मदा प्रसाद प्रजापति (Narmada Prasad Prajapati) और हिना कांवरे (Hina Kanvare) ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा (Resign) दे दिया था।

जिसके बाद बीजेपी ने जगदीश देवड़ा (Jagadish Dewada) को प्रोटेम स्पीकर नियुक्त किया था, लेकिन मंत्री मंडल में शामिल होने के कारण जगदीश देवड़ा को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। उनकी जगह भोपाल से हुज़ूर विधायक रामेश्वर शर्मा (Huzur MLA Rameshwar Sharma) को अप्रैल माह में यह जिम्मेदारी सौंपी गई। तब से रामेश्वर शर्मा ही सामयिक अध्यक्ष पद की कमान संभाले हुए है।

28 दिसंबर से है विधानसभा सत्र

मध्य प्रदेश विधानसभा का सत्र 28 दिसंबर से 3 जनवरी तक बुलाया गया है। सत्र के दौरान बाकी कार्यों के अलावा सबसे महत्वपूर्ण विधानसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव होना है। जिसको लेकर भाजपा में अब नामों के ऊपर मंथन का दौर जारी है। जिस तरह कांग्रेस ने दोनों संवैधानिक पद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष अपने पास रखे थे, ठीक उसी तरह भाजपा भी दोनों पद अपने ही नेताओं की ताजपोशी करवाने के मूड में है।

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कांग्रेस की आधार पर पद की मांग कर रही : नरोत्तम मिश्रा

हालांकि विपक्ष लगातार उपाध्यक्ष पद की मांग कर रहा है। लेकिन बीजेपी ने उसे उसकी ही तोड़ी हुई परंपरा को याद दिला दिया है। प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा (Home Minister Narottam Mishra) ने कहा कि जब कांग्रेस सत्ता में थी तब उसने ही इस परंपरा को तोड़ा था। गृह मंत्री ने कहा विपक्ष को उपाध्यक्ष का पद मिलना था लेकिन कांग्रेस ने उसे अपने पास रखा। तो अब किस अधिकार से कांग्रेस हमसे पद की मांग कर रही है।

विंध्य क्षेत्र से हो सकता है अध्यक्ष

भाजपा को विंध्य क्षेत्र में प्रचंड जीत हासिल हुई थी। बावजूद इसके यहां से सिर्फ तीन मंत्रियों को ही मंत्रिमंडल में स्थान मिला है। ऐसे में अब दबी जुबान में इस क्षेत्र से विधानसभा अध्यक्ष पद की मांग उठने लगी है। हालांकि अध्यक्ष पद को लेकर फिलहाल राजेंद्र शुक्ला, केदारनाथ शुक्ला, गिरीश गौतम के नाम आगे चल रहे हैं। इसके अलावा डॉ. सीताशरण शर्मा और वर्तमान प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा के नाम भी विचार में है। उधर उपाध्यक्ष पद को लेकर यशपाल सिंह सिसोदिया, राजेंद्र पांडे, प्रदीप लारिया, शैलेंद्र जैन के नाम पर भी चर्चा हो रही है।

कांग्रेस ने तोड़ी थी परंपरा

दरअसल मध्य प्रदेश की पहचान राजनीतिक सौहार्द के रूप में रही है। प्रदेश में मान्य परंपरा के तहत अध्यक्ष पद पर सत्ताधारी दल के नेता की ताजपोशी होती थी और उपाध्यक्ष पद विपक्ष को दिया जाता था। लेकिन 2018 में बनी कांग्रेस की सरकार ने आते ही इस परंपरा को तोड़ दिया और दोनों ही संवैधानिक पद पर अपने ही नेताओं की ताजपोशी करवा दी। यही वजह है कि इस बार भाजपा ने भी दोनों पदों पर अपने प्रत्याशी उतारने का फैसला किया है।