बैजूबावरा को पुण्यतिथि पर याद कर दी गई स्वरांजली, मौके पर कई मुख्य कलाकार भी रहे मौजूद

-पुण्यतिथि पर बैजूबावरा को दी गई स्वरांजली

-पहली बार समाधी स्थल पर हुआ बैजूबावरा ध्रुपद उत्सव

डेस्क भोपाल,अशोकनगर । बसंत पंचमी के दिन चन्देरी के कीर्ति दुर्ग में स्थित भारत के प्रख्यात संगीतज्ञ और ध्रुपद गायक बैजू बावरा की पुण्यतिथि के अवसर पर उनकी समाधि पर श्रीअचलेश्वर महादेव फाउंडेशन, सोनभद्र (उ. प्र.) द्वारा बैजू बावरा ध्रुपद उत्सव का आयोजन नगरीय प्रशासन के सहयोग से किया गया।

बंसतपंचमी के दिन दी बैजू बावरा को स्वरांजलि
बसंतपंचमी की पहली किरण के साथ कीर्ति दुर्ग परिसर में स्थित बैजू बावरा की समाधि पर कलाकारों और कला प्रेमियों द्वारा पुष्पांजलि अर्पण कर स्वरांजलि दी गई। ध्रुपद कलाकार उस्ताद अफजल हुसैन ने राग भैरव में सुर ताल बंदिश शिव आदि मध अंत जोगी से आरंभ किया फिर बैजू बावरा द्वारा सृजित राग गूजरी तोड़ी में बंदिश तेरो बल प्रताप की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का समापन राग बसंत ताल चौताल में बंदिश फुलवा बिनत डार डार से किया।

आकर्षक फूलों से समाधि को सजाया गया-
कार्यक्रम में बैजू बावरा की समाधि को आकर्षक फूलों द्वारा सजाया गया। कार्यक्रम कोविड-19 और प्रायोजक के अभाव में बेहद सादगी से संक्षिप्त रुप से किया गया। महोत्सव के संयोजक चंद्र प्रकाश तिवारी ने बताया कि वर्ष २०१६ से शुरू हुए इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य बैजू बावरा जैसी विरासत को सहेजना और उसे विस्तारित करना है। एक बैजू अनेक बातें। श्री तिवारी और उनके साथी इस विषय पर काम कर रहे हैं कि लोगों को बैजू बावरा के बारे में ठोस और तर्क सम्मत जानकारी मिले। अब तक इस कार्यक्रम में पद्म श्री गुंदेचा बंधु, बहाउद्दीन डागर, उदय भवालकर और वासिफुद्दीन डागर को बैजू बावरा सम्मान दिया जा चुका है और इन ख्यातनाम कलाकारों ने चंदेरी के राजा रानी महल में प्रस्तुतियां भी दीं हैं।

कार्यक्रम में उस्ताद अफजल हुसैन भी रहे मौजूद-
ऐसे शास्त्रीय संगीत के आयोजन ज्यादातर बड़े शहरों या महानगरों तक सीमित हो चुके हैं पर चंदेरी जैसे स्थान विशेष में ऐसे आयोजन होना अनिवार्य है ताकि शास्त्रीय संगीत और कलाएँ एक वर्ग विशेष से निकल कर प्रत्येक वर्ग तक पहुंच सके।द्रुपद कलाकार उस्ताद अफजल हुसैन ने कहा कि जिस तरह तानसेन को सब पहचानते हैं उसी तरह बैजू बावरा भी उसी ख्याति के हकदार हैं उनको भी सरकार की ओर से और सभी की ओर से उसी तरह का सम्मान मिलना चाहिए अर्थात जिस तरह तानसेन समारोह ग्वालियर में आयोजित होता है उसी तरह हमारी सरकार को बैजू बावरा के लिए ऐसा ही कार्यक्रम आयोजित करवाना चाहिए।