लापरवाही की हद, करंट से झुलसा 10 वर्षीय मासूम, वीडियो वायरल

घटना के 15 दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस ने अभी तक कोई कार्यवाही नही की हालांकि एसपी ने जरूर उचित कार्यवाही के निर्देश दिए है।

जबलपुर, संदीप कुमार। बालश्रम करवाना गंभीर अपराध और इसे रोकने को लेकर सरकार लगातार निर्देश देती है बावजूद इसके एक बिल्डर की लापरवाही के चलते 10 साल का बालक बिजली में झुलस गया।मामला ग्वारीघाट थाना अंतर्गत नर्मदा नगर में बिल्डर द्वारा बनाई जा रही बिल्डिंग से जुड़ा हुआ है जहाँ 11 हजार केवी की लाइन में 10 वर्षीय मासूम चपेट में आ गया है गंभीर रूप से जला हुआ बालक अभी मेडिकल कालेज में भर्ती है।घटना के 15 दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस ने अभी तक कोई कार्यवाही नही की हालांकि एसपी ने जरूर उचित कार्यवाही के निर्देश दिए है।

दर्शल ग्वारीघाट थाना क्षेत्र नर्मदा नगर में बिल्डर दिलीप हर्जानी द्वारा कंस्ट्रक्शन कर बिल्डिंग तैयार की जा रही थी,,जहा बिल्डिंग निर्माण में मजदूर लगे हुए थे वही बिल्डर द्वारा बच्चो से भी काम कराया जा रहा था,,जिसके चलते बड़ी दुर्घटना बिल्डिंग में घटित हो गयी ,अपने दस वर्षीय बच्चे के साथ आई सुमित्रा बाई साइट में रहकर ही मजदूरी का काम कर रही थी,,वही 10 वर्षीय मासूम बच्चा बिल्डिंग निर्माण कार्य मे माँ का साथ दे रहा था ,

काम के दौरान हुआ भयंकर हादसा

जानकारी अनुसार बिल्डर द्वारा तिमंजिला इमारत खड़ी की जा रही थी वही जब दूसरी मंजिल में काम लगा हुआ था तभी 10 वर्षीय मासूम तीसरी मंजिल की छत पर पहुँच गया बिल्डिंग से मात्र 6 इंच की दूरी से गुजर रही 11 हजार केवी की बिजली लाइन की चपेट में अचानक आ जाने से 10 वर्षीय मासूम को करेंट का झटका लगा और मासूम के शरीर मे आग लग गयी,,,जिसके चलते मासूम बुरी तरह से झुलस गया,आसपास काम कर रहे मजदूरों व उसकी माँ ने तत्तकाल मासूम को अस्पताल लेकर पहुँचे जहाँ बच्चा जिंदगी और मौत के बीच में झूल रहा है।

बिल्डर दिलीप हर्जानि ने मामले की लीपापोती, पुलिस ने बीते 15 दिन के बाद भी नही की कोई कार्यवाही

ग्वारीघाट थाना क्षेत्र में इतनी बड़ी घटना हो जाने के बाद भी थाना प्रभारी को जानकारी न होना और बिल्डर द्वारा लापरवाही की सभी हदे पार करने के बावजूद कारवाही नही की जाने से साफ जाहिर होता है कि किस प्रकार इतनी बड़ी घटना की लीपापोती कर मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है,

एमपीईबी ने कैसे दे दी परमिशन

वही देखने वाली बात है कि एमपीईबी के मापदंडों के अनुसार 11 हजार केवी की बिजिली लाइन के 17 फीट की दूरी तक किसी भी प्रकार का निर्माणा कार्य वर्जित है,,अगर कोई ऐसा करता पाया जाता है तो उसके ऊपर कारवाही की जाती है ,,लेकिन इन बिल्डर पर कैसे मेहरबान हो गयी एमपीईबी ये देखने वाली बात है,,जहा महज 10 इंच की दूरी पर ही निर्माण कर बिल्डिंग तान दी गयी,,और इतनी बड़ी घटना हो गयी ,,,इसके पीछे कौन जिम्मेदार है ये देखने वाली बात है कि अब एमपीईबी क्या कार्यवाही करती है,,

बच्चे की माँ ने मदद की लागायी गुहार

वही जिंदगी और मौत के बीच मासूम की माँ पंर क्या गुजर रही होगी इसका अंदाजा सिर्फ मासूम की माँ ही जानती होगी जो दिन रात मेडिकल अस्पताल में विगत 15 दिनों से भूखी प्यासी अपने बच्चे के स्वस्थ होने के इंतजार में पड़ी हुई है ,,गरीबी के कारण खाने तक के लिए नही है पैसे,,जहा मासूम बच्चे की माँ सुमित्रा बाई ने बताया कि काम के दौरान बच्चा करेंट की चपेट में आ कर पूरा झुलस गया जिसे प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया था लेकिन 4 दिन बाद बिल्डर दिलीप द्वारा बच्चे को यह कहकर मेडिकल अस्पताल में भर्ती करा दिया कि सरकारी अस्पताल में इलाज अच्छा होता है,,,जहा विगत 15 दिनों से बच्चा अस्पताल में भर्ती है,,बावजूद इसके बिल्डर दिलीप द्वारा अपना पल्ला झाड़ते हुए बच्चे और उसके परिजनों को उनके हाल पंर छोड़ दिया गया।

अब देखना होगा कि इतनी गंभीर घटना के बाद पुलिस प्रशासन बिल्डर दिलीप हर्जानी के ऊपर क्या कार्यवाही करता है हालांकि एसपी ने जरूर जाँच के निर्देश दिए है।जबलपुर, संदीप कुमार।

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