शास्त्रीय संगीत का प्रतिष्ठित “तानसेन समारोह” 25 से 29 दिसंबर तक, कालिदास अलंकरण भी दिया जायेगा

इस साल के तानसेन समारोह में वर्ष 2013 से 2020 तक के कालिदास अलंकरण भी मूर्धन्य कलाकारों को प्रदान किए जायेंगे।

ग्वालियर, अतुल सक्सेना।  भारतीय शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में देश का सर्वाधिक प्रतिष्ठित महोत्सव “तानसेन समारोह” (Tansen Samaroh) संगीत की नगरी ग्वालियर में इस साल 25 से 29 दिसंबर तक आयोजित होगा। यह सालाना समारोह भारतीय संगीत की अनादि परंपरा के श्रेष्ठ कला मनीषी संगीत सम्राट तानसेन(Sangeet Samrat Tansen)  को श्रद्धांजलि व स्वरांजलि देने के लिये पिछले 96 साल से आयोजित हो रहा है। इस साल के तानसेन समारोह में वर्ष 2013 से 2020 तक के कालिदास अलंकरण भी मूर्धन्य कलाकारों को प्रदान किए जायेंगे।

तानसेन समारोह की तैयारियों के सिलसिले में बुधवार को ग्वालियर संभाग आयुक्त आशीष सक्सेना की अध्यक्षता में स्थानीय समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक में श्री सक्सेना ने तानसेन समारोह से अधिकाधिक संगीत रसिकों को जोड़ने के लिये देश की राजधानी सहित अन्य बड़े शहरों में समारोह की तिथियों के बारे में व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए। साथ ही समिति के सदस्यों से इसमें सहयोग करने का आग्रह किया।

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मोतीमहल स्थित मानसभागार में आयोजित हुई बैठक में विधायक सुरेश राजे, राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. साहित्य कुमार नाहर, कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह, पुलिस अधीक्षक अमित सांघी, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी आशीष तिवारी, उस्ताद अलाउद्दीन खाँ संगीत एवं कला अकादमी के निदेशक  जयंत भिसे व उप‍निदेशक राहुल रस्तोगी, अपर आयुक्त नगर निगम आर के श्रीवास्तव तथा समिति के अन्य सदस्यगण मौजूद थे।

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संभाग आयुक्त सक्सेना ने बैठक में कहा कि यू-ट्यूब सहित सोशल मीडिया के अन्य माध्यमों से भी देश व दुनियाभर में व्यापक प्रचार-प्रसार करें, जिससे संगीत रसिक इस महोत्सव का आनंद ले सकें। साथ ही ग्वालियर के पर्यटन को बढ़ावा मिले। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि तानसेन समारोह की सभी व्यवस्थायें उच्च कोटि की एवं समारोह की गरिमा के अनुरूप हों। संभाग आयुक्त ने कहा कि हर बुधवार को स्थानीय समिति की बैठक के जरिए समारोह के लिये की जा रहीं तैयारियों की समीक्षा की जाएगी। उन्होंने तानसेन समारोह की सभाओं में स्थानीय संगीत महाविद्यालय व अन्य महाविद्यालयों के विद्यार्थियों की अधिकाधिक भागीदारी पर भी बल दिया।

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संभाग आयुक्त ने समारोह की तिथियों में कार्यक्रम स्थलों से तीन किलोमीटर की परिधि में कोलाहल नियंत्रण आदेश सहित साफ-सफाई व अन्य व्यवस्थायें, अंदर व बाहर सुरक्षा व्यवस्था के संबंध में संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए । साथ ही कहा कि तानसेन समारोह के प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से महाराज बाड़ा स्थित टाउन हॉल और अन्य जगहों पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।

कुल 9 संगीत सभायें होंगी

संगीत अकादमी के उप निदेशक राहुल रस्तोगी ने बताया कि तानसेन समारोह का शुभारंभ पारंपरिक ढंग से 26 दिसंबर  को प्रात:काल तानसेन समाधि स्थल पर हरिकथा, मिलाद, शहनाई वादन व चादरपोशी के साथ होगा। 26 दिसंबर को सायंकाल 6 बजे तानसेन अलंकरण समारोह और पहली संगीत सभा आयोजित होगी। इस बार के समारोह में कुल 9 संगीत सभायें होंगी। पहली 7 संगीत सभायें सुर सम्राट तानसेन की समाधि एवं मोहम्मद गौस के मकबरा परिसर में भव्य एवं आकर्षक मंच पर सजेंगीं। समारोह की आठवीं सभा 29 दिसंबर को सुर सम्राट तानसेन की जन्मस्थली बेहट में झिलमिल नदी के किनारे और नौवीं एवं आखिरी संक्षिप्त संगीत संभा ग्वालियर किले पर आयोजित होगी। प्रात:कालीन सभा हर दिन प्रात: 10 बजे और सांध्यकालीन सभा सायंकाल 6 बजे शुरू होंगीं।

गूजरी महल में भी गूँजेंगी स्वर लहरियाँ और पूर्व संध्या पर  ‘गमक ‘ का आयोजन

तानसेन समारोह की पूर्व संध्या यानि 25 दिसंबर को हजीरा चौराहे के समीप स्थित इंटक मैदान में उप शास्त्रीय संगीत का कार्यक्रम “पूर्वरंग” गमक होगा। इस साल के तानसेन संगीत समारोह की अंतिम संगीत सभा किला परिसर में होगी। यह सभा शास्त्रीय संगीत के महान पोषक राजा मानसिंह तोमर की प्रेयसी मृगनयनी के नाम से बने गूजरी महल परिसर में सजेगी। तानसेन समारोह के दौरान वादी-संवादी कार्यक्रम भी होगा।

ये मूर्धन्य कलाकार सम्मानित होंगे कालिदास अलंकरण से

इस बार के तानसेन समारोह में कालिदास अलंकरण से मूर्धन्य कलाकारों को विभूषित किया जाएगा। समारोह में 26 दिसंबर की सांध्यकालीन सभा में सुविख्यात सितार वादक पं. कार्तिक कुमार को वर्ष 2013 एवं सुप्रसिद्ध घटम वादक पं. विक्कू विनायकम को वर्ष 2014 के कालिदास अलंकरण से अलंकृत किया जाएगा। इसी तरह 27 दिसंबर की सायंकालीन सभा में कर्नाटक संगीत की सुविख्यात गायिका सुश्री अरूणा साईंराम को वर्ष 2015 और हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत की सुविख्यात गायिका सुश्री अश्विनी भिड़े देशपाण्डे को वर्ष 2016 के कालिदास अलंकरण से विभूषित किया जाएगा। तानसेन समारोह में 28 दिसंबर की सायंकाल आयोजित होने वाली सभा में सुविख्यात शास्त्रीय गायक पं. व्यंकटेश कुमार वर्ष 2017 और ख्यातिनाम तबला वादक पं. सुरेश तलवलकर वर्ष 2018 के कालिदान अलंकरण से विभूषित होंगे। इसी तरह 29 दिसंबर की सांध्यकालीन सभा में सुविख्यात ध्रुपद गायक पं. अभय नारायण मलिक को वर्ष 2019 और अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त संतूर वादक पं. भजन सोपोरी को वर्ष 2020 के कालिदास अलंकरण से विभूषित किया जायेगा।

स्थानीय कलाकारों से 2 दिसम्बर तक आवेदन माँगे

तानसेन समारोह-2021 में इस बार तीन स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुतियां होंगीं। स्थानीय कलाकारों के चयन के लिये 2 दिसम्बर तक आवेदन पत्र मांगे गए हैं। आवेदन पत्र इस दिन सायंकाल 4 बजे तक पड़ाव स्थित तानसेन कलावीथिका में जमा किए जा सकते हैं। प्रभारी अधिकारी तानसेन कलावीथिका से प्राप्त जानकारी के मुताबिक ग्वालियर जिले के मूलनिवासी अथवा ऐसे कलाकार जो ग्वालियर में कम से कम 7 वर्षों से निवासरत हैं वे तानसेन समारोह में प्रस्तुति देने के लिये आवेदन कर सकते हैं। ग्वालियर के ऐसे कलाकार जो विवाह के बाद ग्वालियर से बाहर चले गए हैं या बाहर नौकरी करते हैं उन्हें स्थानीय आवेदक की श्रेणी में नहीं माना जायेगा। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि तानसेन समारोह की गरिमा को ध्यान में रखकर शास्त्रीय संगीत में पारंगत कलाकार ही आवेदन करें।