ग्वालियर।अतुल सक्सेना

जिला प्रशासन(District administration) सीमाएं सील होने के लाख दावे करे लेकिन शहर में जो हालात हैं वो उसके दावों की पोल खोल रहे हैं। पिछले दिनों दिल्ली(delhi) से आये दो कोरोना पॉजिटिव(corona positive) मरीज मिलने के बाद भी प्रशासन(administration) की सुस्ती दूर नहीं हुई है और ना ही शहर का व्यक्ति इसे गंभीरता से ले रहा है। घर में छिपे एक व्यक्ति को मशक्कत के बाद पुलिस(police) ने घर से निकाला और अस्पताल(hospital) पहुंचाया जबकि एक अन्य व्यक्ति ट्रक(truck) में बैठकर अहमदाबाद(ahmedabad) से ग्वालियर(gwalior) आ गया। इसे भी अस्पताल पहुंचाया गया। हालांकि ये व्यक्ति खुद पुलिस के पास पहुंचा।

ग्वालियर जिले में मिले छह कोरोना पॉजिटिव मरीजों के स्वस्थ होकर घर चले जाने के बाद जिला प्रशासन ने चैन की सांस ली थी लेकिन ये सुकून ज्यादा दिन नहीं चला दो दिन बाद ही एक ट्रक ड्राइवर दिल्ली से ग्वालियर आया और कोरोना पॉजिटिव निकला। इसकी ट्रैवल हिस्ट्री(travel history) तलाशी गई तो ये हरियाणा(hariyana) दिल्ली, सागर(sagar), झांसी(jhansi) और जबलपुर(jabalpur) भी होकर आया था जिसके बाद इसे संपर्क में आये करीब 50 लोगों के सेम्पल जाँच(sample test) के लिए भेजे गए। इसके दो दिन बाद बुधवार 22 अप्रैल को बहोड़ापुर क्षेत्र में रहने वाला एक फैशन डिजाइनर भी पॉजिटिव निकला वो एक दिन पहले चुपचाप ट्रक में बैठकर दिल्ली से घर आगया और छिप गया। जब प्रशासन को मालूम पड़ा तो उसे क्वारेंटाइन कर सेम्पल लिया जो पॉजिटिव निकला।

इन दो मरीजों की तीमारदारी में प्रशासन लगा ही था कि बीती रात पुलिस को सूचना मिली कि एक युवक इंदौर से आकर घर में छिपा है। मामला इंदारगंज थाना क्षेत्र के सूबे की गोठ का था। मोहल्ले के लोगों ने जब आपत्ति दर्ज की और प्रशासन को सूचित करने के लिए कहा तो परिजनों ने झूठ बोल दिया कि वो गुरुवार को आया था और चला गया। लोगों को डर लगा तो पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर सब इंस्पेक्टर रशीद खां स्टाफ के साथ पहुंचे और समझाइश देकर युवक को बाहर निकाला युवक का नाम अश्विनी शर्मा है। पुलिस ने अश्विनी को जयारोग्य अस्पताल पहुंचाया और उसका सेम्पल लिया गया। उधर एक अन्य व्यक्ति आम खो कंपू निवासी सुनील राजावत अहमदाबाद से ट्रक में बैठकर ग्वालियर आ गया वो अहमदाबाद में कोरियर कंपनी में काम करता है। उसे कंपनी की गाड़ी चिरवाई नाका पर लगे चेक पोस्ट पर छोड़ कर बनारस चली गई । लेकिन अच्छी बात ये है कि सुनील नियमों का पालन करते हैं स्वयं थाने पर उपस्थित हुए और विधिवत अपना स्वास्थ्य परीक्षण कराने के लिए कहा। सुनील के कहने पर उसे तत्काल जयारोग्य अस्पताल भेजकर सेम्पल लिया गया। बहरहाल सुनील ने एक अच्छा उदाहरण प्रस्तुत कर लोगों को एक संदेश दिया है कि बाहर से आने वाले सभी लोग ईमानदारी से अपनी जानकारी प्रशासन को दें तो शहर को कोरोना से बचाया जा सकता है। कुल मिलाकर जनता को भी जागरूक और ईमानदार होना पड़ेगा और प्रशासन को भी झूठे दावे कर जिले की सीमाओं पर चौकसी बढ़ानी होगी। जिससे चोरी छिपे शहर में आने वालों पर नकेल कसी जा सके।