Tikamgarh: प्रशासन की बड़ी चूक आई सामने, जिले में लगा कर्फ्यू

टीकमगढ़।आमिर खान।

इन दिनों कोरोना से निपटने के साथ – साथ प्रशासन पर एक बड़ी जिम्मेदारी बाहरी लोगों के आने के बाद उनको क्वारनटीन करने की भी है। साथ ही उनका सेंपल लेकर उनकी रिपोर्ट आने तक उनकी रखवाली करने की है, लेकिन टीकमगढ़ जिला प्रशासन की एक छोटी सी चूक भी कईयों को संक्रमित कर सकती है। इतना ही नहीं एक पॉजिटिव मरीज निकलने के बाद भी पूरे शहर को बन्द करके इससे निपटने की जोर आजमाइश होने लगती है।

12 मई को इंदौर से लौटी चार छात्राओं में से अब तक 2 संक्रमित निकली हैं। साथ दो अन्य छात्राओं की रिपोर्ट अभी भेजी गई है। इसमें जिला प्रशासन की बड़ी चूक के कारण इन सभी छात्राओं के परिजनों को क्वारनटीन में रखा गया है। जबकि यहां छात्राओं ने इंदौर से आते समय ही प्रशासन से गुहार लगाई थी कि उन्हें घर न भेजकर प्रशासन द्वारा बनाए गए क्वारनटीन सेंटर में रख दिया जाए, लेकिन जब जिला प्रशासन अपनी पर आ जाए तो वह किसी की नहीं सुनता। इसी का खामियाजा आज टीकमगढ़ के आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। अब टीकमगढ़ हर्षिता सिंह ने केंद्र सरकार की नई गाइडलाइन आने के बाद टीकमगढ़ में कर्फ्यू घोषित किया है। यहां सवाल यही है कि अगर इन चारों बच्चियों के सीमा में प्रवेश के बाद इनकी बात मान ली जाती, तो टीकमगढ़ के लिए ऐसे निर्णय लेने की जरूरत न पड़ती।

एमपी ब्रेकिंग न्यूज ने इन छात्राओं से संपर्क किया तो उन्होंने जिला प्रशासन की इस लापरवाही की पोल खोली है। उनका यही कहना है कि आज जिला प्रशासन की वजह से हमारा पूरा परिवार घवराया हुआ है। काश हम सभी की बात मान ली जाती तो हो सकता था कि ये परेशानी न आती। हमारा पूरा परिवार सुरक्षित रहता और अपने घर पर। यहां जिला प्रशासन की गलती के कारण आज हम लोगों को ताने सुनने पड़ रहे हैं। क्वारनटीन सेंटरों पर भी अब व्यवस्था ठीक तरीके से नहीं हो पा रही है। कोई सुनने वाला नहीं है, क्या बीमारी से पीड़ित होने के बाद या कोरोना की जांच के दौरान अस्पताल, क्वारनटीन सेंटर पर रहना अपराध है। अब सोशल मीडिया पर कुछ लोग हमारी साथी बहिनों की फोटोग्राफ अपलोड करके उनकी छवि को अलग रूप में लेे रहे हैं। इस पर जिला प्रशासन और पुलिस क्यों एक्शन नहीं ले रहा। हम किस चीज के गुनहगार है, गलती प्रशासन की और भोग हम रहे। मेरा सिस्टम से सवाल है कि अब आगे ऐसा न करें, जिससे हमारे जिले के लोग भी परेशान हों।

क्वारनटीन सेंटर में अव्यवस्थाएं

पलेरा क्वारनटीन सेंटर से खबर निकलकर सामने आई है कि यहां एक छात्रा के पूरे परिवार को क्वारनटीन किया गया है, जिसमें महिला, पुरुष और बच्चे शामिल हैं पर लेकिन व्यवस्था कोई नहीं है। बिल्डिंग में गंदगी है और गंदे गद्दे दिए गए हैं। साथ ही बच्चों की उम्र भी कम है तो इन्हे दूध की व्यवस्था नहीं है। अब ऐसे में बच्चों को भी भूखा रखा जाए।

ग्रामीणों ने सुनाई खरी खोटी

पलेरा में क्वारनटीन सेंटर में रह रही छात्रा जब 12 मई को अपने घर पहुंची, तो वह सीधे घर के अंदर रही, लेकिन जैसे ही उसके साथ आई टीकमगढ़ शहर की सगी दो बहिने पॉजिटिव निकली, तो उसके गांव के लोगों ने उसे खरी खोटी सुनाई। इसके लिए जबावदार कोन है। यह ताने उसे केवल जिला प्रशासन की लापरवाही के कारण सुनने पड़े हैं। इतना ही नहीं इसके पिताजी पटवारी हैं, इसलिए ये छात्रा तो कुछ जिला प्रशासन से कह भी नहीं सकती। इतना ही नहीं छात्रा अगर क्वारनटीन सेंटर से जब अपने घर पहुंचेगी तो उन्हें डर है कि गांव के कुछ लोग उन्हें गांव में न रहने दे। क्योंकि जिस दिन छात्रा क्वारनटीन होने आई उसी दिन गांव के लोगों ने उसे ताने मारे और गांव में न रहने के लिए कहा। इस और कलेक्टर और पुलिस कप्तान को अब विचार करने की जरूरत है।

इनका कहना है

टीकमगढ़ जिला प्रशासनिक अधिकारियों के लिए एक प्रयोगशाला बन गया है। यहां नाटकीय ढंग से निर्णय लेकर लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ हो रहा है। प्रशासन को मजदूरों, चाय, टैक्सी, नाश्ता बेचने वालों की परवाह नहीं है। कलेक्टर महोदय तो देर रात तक एक आदेश जारी करती हैं और सीधे सुबह उसका अमल होता है। ऐसे ही इन छात्राओं के मामले में भी लापरवाही की है, जब बच्चियां कह रही थी कि होम क्वारनटीन न करके अपने स्थान पर करें, तो क्यों नहीं किया। टीकमगढ़ शहर में हर रोज इंदौर और मुंबई से लोग आ रहे हैं, जिन्हें होम क्वारनटीन किया जा रहा है, जो बेहद खतरनाक है – यशोवर्धन नायक, वरिष्ठ पत्रकार

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