ट्रेड यूनियन ने खोला सरकार के खिलाफ मोर्चा, 11 को प्रदेशभर में करेंगे विरोध

भोपाल।

प्रदेश में कोरोना महामारी(corona pandemic) और लॉकडाउन(lockdown)  के बीच अर्थव्यवस्था(economy) को पटरी पर लाने के लिए शिवराज सरकार ने श्रम सुधार ने कई तरह के बदलाव किए हैं। जिसके बाद प्रदेश के ट्रेड यूनियन(trade union) नेताओं में इन बदलावों लेकर खासा विरोध देखने को मिल रहा है। ट्रेड यूनियन नेताओं ने सरकार द्वारा किए गए बदलाव को मजदूर विरोधी बताया है। सरकार सरकार के बदलाव में कई तरह की गलतियां बताने के बाद अब ट्रेड यूनियन नेताओं ने निर्णय लिया है कि वह 11 मई को सुबह 10 से 11 बजे के बीच इन बदलावों का विरोध करेंगे। इसके साथ ही यूनियन नेताओं ने कहा है कि यदि सरकार मजदूर विरोधी निर्णय को वापस नहीं लेगी तो आंदोलन कार्यवाही को और तेज करने के संबंध में निर्णय लिया जाएगा।वहीँ  सरकार के फैसले को श्रमिकों की लूट और पूंजी के लिये छूट की नीति बताते हुये यूनियन नेताओं ने प्रदेश के मजदूर कर्मचारियों से इसका पुरजोर विरोध करने की अपील की।

दरअसल गुरुवार को शिवराज सरकार(shivraj government) द्वारा प्रदेश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए श्रम सुधार मैं बड़े बदलाव करते हुए कई ऐलान किए थे। जिनमें कारखाने एवं कार्यालय में काम करने वाले की पाली 8 से बढ़ाकर 12 घंटे कर दी गई थी। इसके साथ ही कई अन्य तरह के बदलाव श्रम सुधारों में किए गए थे। जिसको लेकर अब ट्रेड यूनियन नेताओं ने सरकार के इन बदलाव को मजदूर विरोधी बताते हुए श्रम सुधारों के नाम पर कारखानों में 12 घंटे की पाली, श्रम कानूनों के परिपालन के लिये निरीक्षण पर रोक, ठेका श्रमिकों के लिये ठेकेदारों की मनमर्जी, दुकानों एवं संस्थानों में 18 घंटे का काम की व्यवस्था कायम करने की शिवराज सरकार की घोषणा को केन्द्रीय श्रमिक संगठनों, कर्मचारी महासंघों ने मध्य प्रदेश में औद्योगिक संस्थानों में जंगल राज की कायमी बताते हुये इन्हें तुरन्त वापस लेने की मांग की है।

इसके साथ ही इंटक प्रदेश अध्यक्ष आर.डी. त्रिपाठी, सीटू प्रदेश महासचिव प्रमोद प्रधान, एटक प्रदेश उपाध्यक्ष रूपसिंह चौहान, एआईयूटीयूसी अध्यक्ष जे.सी. बरई, एचएमएस प्रदेश अध्यक्ष हरिओम सूर्यवंशी, बैंक कर्मचारियों के महासचिव वी.के शर्मा, केन्द्रीय कर्मचारियों के महासचिव यशवंत पुरोहित, बीमा कर्मचारियों के सहसचिव पूषण भट्टाचार्य, सीटू सहायक महासचिव ए टी पदमनाभन, एटक सहायक महासचिव एच.एस.मौर्या ने एक संयुक्त विज्ञप्ति जारी की ।संयुक्त विज्ञप्ति में कहा गया है कि कोरोना लॉक डाउन में नियोजकों कारपोरेट घरानों, ठेकेदारों, बिल्डर्स, की मुनाफे की हवस और गैर जिम्मेदाराना व्यवहार के चलते जब आज लाखों मजदूर सड़कों पर बेबसी और भुखमरी के शिकार हो रहे है तब इन पर अंकुश लगाने के बजाय मजदूरों पर गुलामी थोपी जा रही है ? मजदूर कर्मचारी नेताओं ने राज्य सरकार के इस निर्णय को एकतरफा, शोषणकारी व कारपोरेटपरस्त बताते हुये इस कदम का व्यापक विरोध करने का एलान किया ।

ट्रेड यूनियन नेताओं ने कहा कि प्रदेश में दलबदल कर बनायी गयी सरकार ने वैधानिक व जनतांत्रिक प्रक्रियाओं को धता-बताकर इन केन्द्रीय कानूनों में बदलाव कर दिखाया है कि उस के लिये कारपोरेट्स का हित सर्वाेपरी है। घोषणा के बाद प्रदेश के श्रमायुक्त द्वारा जारी पत्र के जरिये लॉक डाऊन के दौरान ड्यूटी पर न आने वाले श्रमिकों का वेतन काटने की मालिकों को दी गयी खुली छूट की भी ट्रेड यूनियनों ने तीखी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि आज जब श्रमिक रेड जोन और कंटेनमेंट के चलते प्रशासनिक पाबंदियों में फंसा हुआ है, तब उनकी अनुपस्थिति पर वेतन कटौती की इजाजत देना अन्यायपूर्ण है। मुख्यमंत्री से कहा गया है कि यदि प्रदेश में उद्योग विकसित कर विकास करना चाहते है तो श्रम को प्रोत्साहन, संरक्षण एवं सम्मानजनक दर्जा देकर ही ऐसा किया जा सकता है। जिसके बाद ट्रेड यूनियन नेताओं ने 11 मई को होगा प्रदेश भर में विरोध की बात कही है और सरकार द्वारा उचित निर्णय न लेने पर आंदोलन तेज़ करने की बात कही है।