World blood donation day: भाई की मौत के बाद जाना रक्तदान का महत्व, अब बन चुके समाज के लिए मिसाल

बागली।सोमेश उपाध्याय।

दुर्घटनाओं में घायल कई बार रक्त के अभाव में दम तोड़ देते है। दरअसल एक दुर्घटना में अपने भाई को खो चुके भाई जरूरत मंदों को रक्त देने की ठानी। भाई की दुर्घटना में घायल होने पर रक्त नहीं मिल पाने से मौत हो गई थी। इसके बाद उन्होंने ठाना कि अब उन्हें अगर रक्त की जरूरत की सूचना मिलती है तो वे मदद को पहुंच जाते है। 36 वर्ष की उम्र में अनेक बार रक्तदान कर चुके बागली जटाशंकर सेवा समिति के सदस्य ठा. प्रताप मोहन सिंह डॉबी मानव सेवा के लिए बड़ी मिसाल है। कई बार रक्तदान करने के बाद भी प्रताप बताते हैं कि वे अभी भी पूरी तरह से स्वस्थ्य हैं।

प्रताप अपने गुरु ब्रह्मलीन संत केशवदास महाराज के मानव सेवा प्रकल्पों से प्रेरित थे। उन्होंने कहा कि रक्तदान करके हम समाज और देश सेवा के प्रति अपने कर्तव्य को निभाने का काम करते हैं। सैकड़ों लोग सड़क पर दुर्घटनाओं में घायल हो जाते हैं। खून की कमी के चलते उनकी मृत्यु हो जाती है। प्रताप ने बताया कि उनका ब्लड ग्रुप बी पॉजिटिव है तथा जरूरतमंद लोगों को नि:शुल्क रक्तदान कर चुके हैं और अब तक देवास, उज्जैन, हाटपीपल्या, बड़ोदा और इंदौर तक रक्त दान कर चुके है। कुछ वर्ष पूर्व प्रताप के भाई युधिष्ठिर का दुर्घटना में निधन हो गया था।

हादसे में भाई की मौत के बाद रक्तदान के महत्व का पता चला। उस समय भाई को भी रक्त की अत्यंत आवश्यकता थी। प्रताप ने सभी से रक्तदान की अपील करते हुए कहा कि इससे शरीर में किसी प्रकार की कमजोरी व खून की कमी नहीं होती, बल्कि शरीर पूरी तरह से स्वस्थ्य रहता है। प्रत्येक व्यक्ति को एक या दो बार रक्तदान करना चाहिए।
मंत्री कर चुके है सम्मानित प्रताप की मानव सेवा की ललक को देखते हुए मध्यप्रदेश शासन के पूर्व मंत्री दीपक जोशी उन्हें एक निजी कार्यक्रम में प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित कर चुके है। प्रताप के जज्बे की जटाशंकर महन्त बद्रीदास महाराज, डॉ. के.एस. उदावत,वरिष्ठ अधिवक्ता प्रवीण कुमार चौधरी सहित जटाशंकर सेवा समिति के इरेश उपाध्याय,नन्दकिशोर भाटी आदि ने प्रशंसा की है।

सरदार पटेल सार्थक समूह के युवा भी नही है पीछे

कोरोना महामारी में जहां हर कोई अपने आपको सुरक्षित रखने के लिए घरों में हैं वहीं,बागली के समीप छतरपुरा के युवाओ का एक ऐसा समूह भी हैं जो दूसरों की जिंंदगी बचाने के लिए हर हाल में ततपर रहते है। एक फोन आया नहीं ये अस्पताल पहुंच जाते हैं। युवाओं ने सरदार पटेल सार्थक समूह बनाकर बागली, हाटपीपल्या, देवास, इंदौर आदि स्थानों के अस्पतालों में मोबाइल नंबर सहित अपनी सूची सौंप रखी है। रक्तदान करने वाले युवा सचिन अंबाराम गामी, भीम गेंदालाल पाटीदार, अनिल रामेश्वर पाटीदार, राहुल सुखराम पाटीदार, पंकज पिता राजमल पाटीदार, शशिकांत तिलोकचंद पाटीदार, शेखर रूपचंद पाटीदार, विनोद कालूराम पाटीदार, राहुल समंदर पाटीदार, महेंद्र केदारमल पाटीदार, कमल रामचरण पाटीदार, मुरली घनश्याम पाटीदार, जगदीश मदनलाल पाटीदार, श्रीराम बद्रीलाल पाटीदार, शंकर पटेल, प्रदीप मनोहर, विक्रम कैलाशचंद्र पाटीदार, सुनील पाटीदार, मुकेश बोंदाजी पाटीदार सहित 100 के लगभग युवा हैं। वे किसी अस्पताल या जरूरतमंद का फोन आने पर रक्तदान के लिए पहुंचते हैं।