कौन थे विलियम टीचर, जिनके नाम से है दुनिया की सबसे मशहूर व्हिस्की ब्रांड

1830 में महज 19 साल की उम्र में एकमिल कर्मचारी विलियम टीचर ने नए "आबकारी अधिनियम" का लाभ उठाया और ग्लासगो के एंडरसन जिले में एक किराने की दुकान के हिस्से के लिए लाइसेंस प्राप्त कर व्हिस्की बेचना शुरू किया।

नई दिल्ली, डेस्क रिपोर्ट। पूरी दुनिया में ब्लेंडेड स्कॉच व्हिस्की को बहुत लोग पसंद करते है। भारत में भी इसके शौकीनों की कमी नहीं है। इनमें से ही एक ब्रांड सिर्फ भारत में नहीं बल्कि पूरी दुनिया में फेमस है, जिसका नाम है टीचर्स। टीचर्स भारत में एक क्लासी तबके की केटेगरी में आती है। बता दें, टीचर्स हाइलैंड क्रीम भारत में लॉन्च होने वाली पहली अंतरराष्ट्रीय स्कॉच थी, जो आज के समय में पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा बिकने वाला ब्रैंड भी है। फिलहाल,टीचर्स व्हिस्की ब्रांड का मालिकाना हक Beam Suntory कंपनी के पास है, जो दुनिया भर में प्रीमियम शराब बनाने के लिए जानी जाती है।

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कौन थे विलियम टीचर

1830 में महज 19 साल की उम्र में एकमिल कर्मचारी विलियम टीचर ने नए “आबकारी अधिनियम” का लाभ उठाया और ग्लासगो के एंडरसन जिले में एक किराने की दुकान के हिस्से के लिए लाइसेंस प्राप्त कर व्हिस्की बेचना शुरू किया। दुकान की मालिक उनकी गर्लफ्रेंड एग्नेस मैकडोनाल्ड की मां थीं। इसके छह साल बाद, टीचर और मैकडोनाल्ड ने शादी की और दूसरी दुकान खोली। इसके बाद तो उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और एक के बाद एक 20 ड्राम शॉप्स की पूरी एक सीरीज ही खड़ी कर दी। अपने बेटों की मदद से उपभोग के लिए लाइसेंस प्राप्त किया, जहां परिसर में अक्सर लोग बढ़िया व्हिस्की खरीदते और पीते थे और जाते समय अक्सर बोतल भी ले जाते थे।

1876 ​​में विलियम टीचर की मृत्यु हो गई, जिसके बाद उनके दोनों बेटों विलियम जूनियर और एडम ने कंपनी का प्रभार संभाला, जिसका नाम आगे जाकर विलियम टीचर एंड संस लिमिटेड पड़ गया। उन्होंने व्यवसाय को सेंट हनोक स्क्वायर में शिफ्ट किया, जहां यह 1991 तक बना रहा। कंपनी ने अपनी अर्डमोर डिस्टिलरी खोली।

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फिलहाल Beam Suntory के पास मालिकाना हक

1976 में, टीचर एंड संस को एलाइड ब्रेवरीज द्वारा खरीदा गया था, जो 1978 में एलाइड लियोन और 1994 में एलाइड डोमेक का हिस्सा बन गया था। इस बीच ग्लेनड्रोनाच डिस्टिलरी को 1996 में बंद कर दिया गया था और बाद में 2002 में फिर से खोले जाने के बाद इसे चिवास ब्रदर्स को बेच दिया गया था। 2014 में, Beam Suntory ने टीचर्स को बनाने का मालिकाना हक खरीदा।