लियो के निर्देशक लोकेश कनगराज हुए घायल, फिल्म के प्रचार के लिए गए थे केरल

Shashank Baranwal
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LEO Movie

LEO Movie: इन दिनों साउथ सुपरस्टार थलपति विजय की लियो फिल्म बॉक्स ऑफिस में बेहतरीन कमाई कर रही है। लियो फिल्म 19 अक्टूबर को सिनेमाघरों में रिलीज हुई है। इस फिल्म को तमिल, तेलुगु, कन्नड़ के साथ हिन्दी में भी रिलीज किया गया है। अब तक लियो फिल्म ने इंडियन बॉक्स ऑफिस पर 200 करोड़ रूपये और वर्ल्ड वाइड कलेक्शन में 400 करोड़ के आंकड़े को पार कर चुकी है। फिल्म में तमिलनाडु के साथ केरल में भी शानदार कमाई कर रही है। इस फिल्म की शानदार कमाई के दौरान लियो के निर्देशक प्रचार के लिए लोकेश कनगराज केरल के पलक्कड़ में अरोमा थियेटर पहुंचे। जहां उन्हें देखने के लिए दर्शकों का हुजूम उमड़ पड़ा। इस दौरान उनके पैर में चोट लग गई।

निर्देशक लोकेश कनगराज ने रद्द की सारे कार्यक्रम

चोट लगने के बाद लियो फिल्म के निर्देशक केरल में आयोजित सारे कार्यक्रम को रद्द कर तमिलनाडु के लिए रवाना हो गए। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफार्म X (ट्विटर) पर पोस्ट कर जानकारी दी कि पलक्कड़ में आप सभी का देखकर खुश और आभारी हूं। इस प्यार के लिए केरल को धन्यवाद देता हूं। साथ ही उन्होंने लिखा कि चोट लग जाने के कारण अन्य दो कार्यक्रम को नहीं कर सकता।

उन्होंने पोस्ट कर जानकारी दी कि  “आपके प्यार के लिए केरल को धन्यवाद.. पलक्कड़ में आप सभी को देखकर अभिभूत, खुश और आभारी हूं। भीड़ में एक छोटी सी चोट लगने के कारण, मैं अन्य दो स्थानों और प्रेस मीटिंग में नहीं पहुंच सका। मैं निश्चित रूप से जल्द ही फिर से केरल में आप सभी से मिलने आऊंगा। तब तक इसी प्यार से लियो का आनंद लेते रहें।”

आपको बता दें लोकेश कनगराज भारत के बेहतरीन निर्देशकों में से एक हैं। उनकी पहले की दो फिल्म कैथी और विक्रम बॉक्स ऑफिस पर शानदार कमाई की थी। वहीं लियो ने हिंदी भाषा में अब तक कुल 11 करोड़ से ज्यादा की कमाई की है। वहीं लियो ने तमिल में अब तक 110 करोड़ से ज्यादा की कमाई की है।

 


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पत्रकारिता उन चुनिंदा पेशों में से है जो समाज को सार्थक रूप देने में सक्षम है। पत्रकार जितना ज्यादा अपने काम के प्रति ईमानदार होगा पत्रकारिता उतनी ही ज्यादा प्रखर और प्रभावकारी होगी। पत्रकारिता एक ऐसा क्षेत्र है जिसके जरिये हम मज़लूमों, शोषितों या वो लोग जो हाशिये पर है उनकी आवाज आसानी से उठा सकते हैं। पत्रकार समाज मे उतनी ही अहम भूमिका निभाता है जितना एक साहित्यकार, समाज विचारक। ये तीनों ही पुराने पूर्वाग्रह को तोड़ते हैं और अवचेतन समाज में चेतना जागृत करने का काम करते हैं। मशहूर शायर अकबर इलाहाबादी ने अपने इस शेर में बहुत सही तरीके से पत्रकारिता की भूमिका की बात कही है– खींचो न कमानों को न तलवार निकालो जब तोप मुक़ाबिल हो तो अख़बार निकालो मैं भी एक कलम का सिपाही हूँ और पत्रकारिता से जुड़ा हुआ हूँ। मुझे साहित्य में भी रुचि है । मैं एक समतामूलक समाज बनाने के लिये तत्पर हूँ।

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