इन कर्मचारियों को मिलेगा दशहरा-दिवाली Bonus, Salary के साथ 17,951 रुपये की अतिरिक्त राशि

कैबिनेट ने एक बयान में कहा कि प्रति पात्र रेल कर्मचारी को 78 दिनों के लिए अधिकतम देय राशि 17,951 रुपये है।

नई दिल्ली, डेस्क रिपोर्ट। डीए में वृद्धि (DA Hike) के बाद अब मोदी सरकार (Modi government) ने इन सरकारी कर्मचारियों (government employees) को त्यौहार पर बड़ा तोहफा दिया है। दरअसल सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए नवरात्र (navratri), दशहरा, दिवाली का बोनस मिलेगा कर्मचारियों को 17,951 रुपये तक अतिरिक्त वेतन मिलेंगे। 7th pay commission रेलवे कर्मचारियों के लिए एक बोनस में केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए 78 दिनों के वेतन के बराबर उत्पादकता लिंक्ड बोनस (PLB) की घोषणा की है। बोनस राशि RPF या RPSF कर्मियों को छोड़कर सभी पात्र अराजपत्रित रेलवे कर्मचारियों के लिए लागू है।

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पीएलबी को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एक बयान में कहा कि इस फैसले से लगभग 11.56 लाख अराजपत्रित रेल कर्मचारियों को लाभ होने की संभावना है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बयान में कहा योग्य रेलवे कर्मचारियों को पीएलबी का भुगतान हर साल दशहरा या पूजा की छुट्टियों से पहले किया जाता है।

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वित्तीय वर्ष 2010-11 से 2019-20 के लिए 78 दिनों के वेतन की पीएलबी राशि का भुगतान किया गया। केंद्र सरकार ने कहा कि वर्ष 2020-21 के लिए भी 78 दिनों के वेतन के बराबर पीएलबी राशि का भुगतान किया जाएगा, जिससे कर्मचारियों को रेलवे के प्रदर्शन में सुधार की दिशा में काम करने के लिए प्रेरित करने की उम्मीद है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल के बयान के अनुसार, रेलवे कर्मचारियों को 78 दिनों के पीएलबी के भुगतान का वित्तीय निहितार्थ 1984.73 करोड़ रुपये होने का अनुमान है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पात्र अराजपत्रित रेल कर्मचारियों को पीएलबी के भुगतान के लिए 7,000 रुपये प्रति माह वेतन गणना की सीमा निर्धारित की है। कैबिनेट ने एक बयान में कहा कि प्रति पात्र रेल कर्मचारी को 78 दिनों के लिए अधिकतम देय राशि 17,951 रुपये है।

रेलवे के लिए पीएलबी योजना वर्ष 1979-80 से लागू हुई और दो मान्यता प्राप्त संघों, अखिल भारतीय रेलवे पुरुष संघ और भारतीय रेलवे के राष्ट्रीय संघ के परामर्श से और कैबिनेट के अनुमोदन से विकसित की गई थी। बयान में कहा गया है कि योजना में हर तीन साल में समीक्षा की परिकल्पना की गई है।