Bhopal News : बिल्डिंग परमिशन पर तय किए गए नए नियम, सूचना जारी, पालन ना करने पर होगी कार्रवाई

Bhopal Fire Audit Building Permission: इसकी सार्वजनिक सूचना भी जारी कर दी गई है। भवन स्वामी को भवन का फायर ऑडिट कराना अनिवार्य किया गया है।

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भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। मध्यप्रदेश (MP) में बिल्डिंग परमिशन (building permit) को लेकर नगर निगम (Municipal council) द्वारा व्यवस्था की गई है। भवन को अग्नि दुर्घटना (fire accident) से बचाने संबंधी सुझाव और सेवाओं के लिए Bhopal नगर निगम द्वारा फायर अनापत्ति प्रमाण पत्र(fire no objection certificate)  प्राप्त करना अनिवार्य किया गया है। इतना ही नहीं इस फायर अनापत्ति प्रमाणपत्र का सालाना ऑडिट (Audit) कराना भी अनिवार्य होगा।

वही अग्नि दुर्घटना से बचा संबंधित सुझाव सहित अन्य सेवाओं के लिए प्रमाण पत्र जारी करने का शुल्क ₹1500 रुपए निर्धारित किया गया है। भवन निर्माता 2000 रुपए तक का शुल्क लेकर 2000 वर्ग फीट आकार के भवन का फायर अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त कर सकते हैं ।वहीं दो हजार से 5000 वर्ग फीट के निर्माण के लिए 3000 रुपए, 5000 से 15000 वर्ग फीट के लिए 5000 रुपए और 15000 से 25000 वर्ष के लिए 7000 रुपए  तय किए गए हैं। जबकि 25 हजार से अधिक क्षेत्र के लिए न्यूनतम 8000 रुपए शुल्क राशि तय की गई है।

इतना ही नहीं किसी भी भवन निर्माण के बाद निर्माण करता है। यदि निर्धारित मापदंड के अनुसार सालाना फायर ऑडिट नहीं कराता है तो उसके विरुद्ध कार्यवाही की जाएगी। इस मामले में नगर निगम आयुक्त केवीएस कोलसानी का कहना है कि विभिन्न श्रेणियों के भवन के लिए निर्धारित मापदंड तैयार किए गए हैं। इसकी सार्वजनिक सूचना भी जारी कर दी गई है। भवन स्वामी को भवन का फायर ऑडिट कराना अनिवार्य किया गया है।

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राज्य सरकार ने नगरीय निकायों में 28 फरवरी, 2022 तक कंपाउंडिंग मामलों में शुल्क पर 20% की विशेष छूट देने का निर्णय लिया है। एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार भवन अनुमति के बिना निर्माण और भवन अनुमति से परे निर्माण की कंपाउंडिंग की सीमा 10% से बढ़ाकर 30% कर दी गई है।

आयुक्त नगरीय प्रशासन एवं विकास निकुंज कुमार श्रीवास्तव के हवाले से एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा था कि भवन अनुमति के बिना निर्माण और भवन अनुमति के खिलाफ अधिक निर्माण के मामलों में एबीपीएएस (स्वचालित भवन योजना अनुमोदन प्रणाली) के माध्यम से विभाग द्वारा उत्पन्न शुल्क और शुल्क के लिए ऑनलाइन प्रणाली है।

बहरहाल, एक शर्त यह भी है कि किस अवैध निर्माण को वैध किया जा सकता है और किसको वैध नहीं किया जा सकता है। विज्ञप्ति के अनुसार सभी नगर निकायों को निर्देश दिया गया है कि ऐसे मामलों का समाधान ऑनलाइन एबीपीएएस के माध्यम से ही करना अनिवार्य है।

आयुक्त ने राज्य के सभी कलेक्टरों को अपने जिले के सभी नगरीय निकायों में अभियान चलाने का निर्देश दिया है. जिलों में इसका व्यापक प्रचार-प्रसार भी किया जाना चाहिए। इसके साथ ही नगरीय निकायों में शिविर लगाकर शमन के मामलों का भी निराकरण किया जाए। इससे अधिक से अधिक नागरिक राज्य सरकार द्वारा दी गई छूट का लाभ उठा सकेंगे। इसके साथ ही नागरिक अपने भवनों के अवैध निर्माण को भी वैध करा सकेंगे।