1.5 लाख कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर, वेतन में 15 फ़ीसदी की वृद्धि, सीएम की घोषणा, वेतन संशोधन 1 जनवरी, 2020 से होंगे लागू

Employees Salary Hike : राज्य सरकार द्वारा कर्मचारियों को बड़ा तोहफा दिया गया था। दरअसल उनके वेतन में 15 से 20 फीसद की वृद्धि की गई थी। गुरुवार को राज्य सरकार द्वारा इसकी घोषणा की गई थी। इसमें कहा गया था कि ट्रांसपोर्ट व्यापार को 15 फीसद की सैलरी हाइक दी गई है। हालांकि वेतन वृद्धि को भी लेकर कर्मचारी खुश नजर नहीं आ रहे हैं और वह हड़ताल के मूड में हैं।

1.7 लाख कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने की थी तैयारी

कर्नाटक राज्य सरकार द्वारा वेतन में 15 फीसद की बढ़ोतरी को परिवहन संघ द्वारा अस्वीकार कर दिया गया था। 21 मार्च से कर्मचारी हड़ताल पर रहेंगे। इसमें कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम, बेंगलुरु महानगर परिवहन निगम सहित उत्तर पश्चिम कर्नाटक सड़क परिवहन निगम और कल्याण कर्नाटक सड़क परिवहन निगम के 1.7 लाख कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने की तैयारी की गई थी।

अनिश्चितकालीन हड़ताल को वापस लेने का फैसला

हालांकि अभी के ताजा अपडेट के मुताबिक कर्नाटक आरटीसी की ट्रेड यूनियनों की संयुक्त कार्रवाई समिति ने शनिवार को अनिश्चितकालीन हड़ताल को वापस लेने का फैसला किया है। दरअसल हड़ताल 21 मार्च से शुरू होने वाली थी। यूनियन ने सरकार के सामने शर्त रखी थी, जिसमें कहा गया था कि वेतन संशोधन को 1 जनवरी, 2020 से लागू किया जाना चाहिए। राज्य सरकार द्वारा कर्मचारियों के वेतन में 15 प्रतिशत की वृद्धि पर सहमति के बाद हड़ताल वापस ली गई है। जेएसी ने यह भी कहा कि केएसआरटीसी के प्रबंध निदेशक द्वारा 1 जनवरी, 2020 से वेतन संशोधन को लागू करने पर सहमति के बाद हड़ताल वापस ले ली गई।

संघ का विरोध 

वेतन के भुगतान के 4 साल के समझौते मॉडल की मांग को लेकर लगभग 10 संघों का प्रतिनिधित्व करने वाली परिवहन यूनियन के साथ कई चर्चा के बाद मुख्यमंत्री बोम्मई ने कर्मचारियों के वेतन में 15 फीसद की वृद्धि पर सहमति व्यक्त की है। हालाकि केएसआरटीसी स्टाफ एंड वर्कर्स फैडरेशन के अध्यक्ष अनंत सुब्बाराव के अध्यक्षता में ट्रेड यूनियन की संयुक्त कार्रवाई समिति ने इसे अपर्याप्त बताते हुए प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है। कर्मचारी संघ ने कहा है कि वृद्धि जुबानी सेवा के अलावा और कुछ नहीं है, वहीं सरकार द्वारा इस संबंध में अब तक कोई अधिसूचना भी जारी नहीं की गई है जबकि संघ की मूल मांग 45% थी।

यूनियन की मूल मांग 45 फीसद की है

परिवहन संघों के एक महासंघ द्वारा सरकार के प्रस्ताव को अस्वीकार करने के साथ ही स्थिति ऐसे समय में गतिरोध पर पहुंच गई है, जब राज्य में चुनाव है। बता दें कि इससे पहले अधिकारियों के लिए अंतिम वेतन वृद्धि 2016 में की गई थी। सरकार द्वारा उनके वेतन का 12.5% की दर से बढ़ाया गया था। वही ट्रांसपोर्ट यूनियन की मूल मांग 45 फीसद की है।

वेतन भुगतान के 4 साल के समझौते के मॉडल की मांग 

छ: यूनियन का प्रतिनिधित्व करने वाली ज्वाइंट एक्शन कमिटी वेतन के भुगतान के 4 साल के समझौते के मॉडल की मांग कर रही है। वहीं चार संघ का प्रतिनिधित्व करने वाली यूनियन द्वारा एक और समूह ने सरकार के कर्मचारियों के समान वेतन आयोग की मांग कर रहा है। ऐसे में वेतन वृद्धि के बावजूद कर्मचारी हड़ताल के लिए तैयार हैं।


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Kashish Trivedi

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