शासकीय कर्मचारी को हाई कोर्ट से बड़ी राहत, निलंबन पर लगाई रोक, सचिव-आयुक्त सहित कलेक्टर-DEO को नोटिस जारी

जिसके बाद हाईकोर्ट ने उनके निलंबन समाप्त करने पर निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।

madhya pradesh highcourt

जबलपुर, डेस्क रिपोर्ट। हाईकोर्ट (MP High court) ने एक बार फिर से शासकीय कर्मचारियों (Government Employees) को बड़ी राहत दी है। दरअसल एक याचिका की सुनवाई के दौरान शासकीय कर्मचारी को निलंबित (Suspend) करने पर रोक लगा दी है। इतना ही नहीं हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग के सचिव सहित आयुक्त लोक शिक्षण ज्वाइंट डायरेक्टर, लोक शिक्षण जबलपुर संभाग और कलेक्टर ऑडियो जबलपुर को नोटिस (notice) जारी कर इस संबंध में जवाब मांगा है।

दरअसल याचिका जबलपुर निवासी जेके साहू की तरफ से दायर की गई है। जेके साहू स्कूल शिक्षा विभाग में कार्यरत हैं याचिका में कर्मचारी का कहना है कि ज्वाइंट डायरेक्टर द्वारा 8 जून 2022 को एक आदेश जारी कर उन्हें निलंबित कर दिया गया जबकि याचिकाकर्ता की ओर से दलील देते हुए वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता चुनावी ड्यूटी में है और हाईकोर्ट के पूर्व दिशा निर्देश के तहत ऐसी स्थिति में जॉइंट डायरेक्टर उन्हें निलंबित करने का अधिकार नहीं रखते हैं।

वही मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वकील आकाश चौधरी, राज्य शासन की ओर से उप महाधिवक्ता प्रकाश तिवारी और चुनाव आयोग की तरफ से अधिवक्ता सिद्धार्थ सेठ ने अपना पक्ष रखा था। जिसके बाद हाईकोर्ट ने चुनाव के दौरान शासकीय कर्मी को निलंबित करने पर रोक लगाई है।

Read More : MPPEB : उम्मीदवारों के लिए नई अपडेट, 1300 से अधिक पदों पर होगी भर्ती, जाने पात्रता और नियम

वहीं एक अन्य फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति मनिंदर सिंह भट्टी ने बैंक अधिकारी के निलंबन समाप्त करने के निर्देश दिए हैं। दरअसल एक याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने निर्देश के साथ पटाक्षेप किया है कि मुख्य महाप्रबंधक रीवा में पदस्थ सहायक प्रबंधक राहुल मौर्य के निलंबन को समाप्त करने पर जल्द निर्णय लिया जाए। वही इस संबंध में प्रस्तुत अभ्यावेदन पर 60 दिन के भीतर कार्रवाई किए जाने के निर्देश दिए गए हैं।

मामले में याचिकाकर्ता की ओर से वकील नर्मदा प्रसाद चौधरी और अमित चौधरी ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि बिना आरोप पत्र दिए 3 महीने से अधिक समय तक निलंबित नहीं रखा जा सकता है। उन्हें 3 जुलाई 2020 को निलंबित किया गया था लेकिन इस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। जिसके बाद हाईकोर्ट ने उनके निलंबन समाप्त करने पर निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।