MP Government Jobs : विभाग ने शुरू की तैयारी, जल्द जारी किया जाएगा विज्ञापन, रिक्त पदों पर होगी प्रतिनियुक्ति

प्रदेश में स्थित 37 जिला सहकारी केंद्रीय बैंक अपेक्स बैंक के अंतर्गत आते हैं। जिसमें से 16 में सीईओ पद रिक्त है। वहीं कई बैंकों में कई जूनियर अफसरों को प्रभारी के तौर पर नियुक्त किया गया है।

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भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। मध्यप्रदेश (MP) में जल्द जिला सहकारी केंद्रीय बैंक (District Co-operative Central Bank) के खाली पड़े सीईओ के पदों (CEO Recruitment) पर विज्ञापन (notification) जारी किया जाएगा। दरअसल इसके लिए तैयारी शुरू कर दी गई है। जल्द ही मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) की प्रतिनियुक्ति पर रिटायर्ड सरकारी अफसरों को भी पदस्थ किया जाएगा। अपेक्स बैंक (Apex Bank) द्वारा तैयारी पूरी की जा रही है। जिसके लिए जल्द ज्ञापन दिया जाएगा। वही नाबार्ड बैंक (NABARD Bank) के अधिकारियों को जिला सहकारी बैंक के सीईओ बनाया जा सकता है। इसके लिए सेवा शर्तों में भी संशोधन किए जाने की तैयारी की जा रही है।

बता दें कि जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों में सहकारिता संवर्ग (cooperative cadre) के अधिकारियों को प्रदर्शित किया जाता था लेकिन लगातार गड़बड़ी सामने आने के बाद व्यवस्था में संशोधन करने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए बदलाव करने की तैयारी की जाए। प्रदेश में स्थित 37 जिला सहकारी केंद्रीय बैंक अपेक्स बैंक के अंतर्गत आते हैं। जिसमें से 16 में सीईओ पद रिक्त है। वहीं कई बैंकों में कई जूनियर अफसरों को प्रभारी के तौर पर नियुक्त किया गया है।

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वहीं नई भर्ती नहीं होने के कारण लगातार आला अफसरों की कमी देखी जा रही है। जिसके बाद नाबार्ड के अधिकारी प्रतिनियुक्ति पर लिए जा रहे हैं। वही सहकारिता विभाग के प्रमुख सचिव केसी गुप्ता ने इस मामले में जानकारी देते हुए कहा कि सहकारी बैंक में नाबार्ड और कमर्शियल बैंक के अफसरों को प्रतिनियुक्ति पर लाने के लिए नियम बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा रिटायर्ड सहकारी अफसरों को भी संविदा नियुक्ति दी जा सकती है।

मध्य प्रदेश में जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों के माध्यम से सरकार प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति में किसानों को अल्प ऋण उपलब्ध कराती है। जिसके लिए हर साल ₹10000 करोड़ रुपए से अधिक राशि 30 लाख से ज्यादा किसानों को बिना ब्याज के उपलब्ध कराया जाता है। वहीं कई बैंकों में अनियमितता की शिकायत सामने आने के बाद इसमें संशोधन की तैयारी की गई है। इस मामले में कई बैंकों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के प्रशासनिक लापरवाही सामने आई थी। जिसके बाद नियम में बदलाव की प्रक्रिया को अपनाया जा रहा है।