सरकार की आंखों में रेत झोंक रहे ठेकेदार और प्रशासन

वही दमदम में कंपनी के द्वारा 3 लाख क्यूबिक मीटर रेत बताई गई है जबकि वहां पर Sand का भंडारण खत्म हो चुका है।

होशंगाबाद, डेस्क रिपोर्ट। होशंगाबाद जिले (Hoshangabad) में रेत (sand) उत्खनन में बड़ी गड़बड़ी का मामला सामने आया है। शासन के द्वारा जिस ठेकेदार कंपनी ने जिले में रेत उत्खनन (sand quarrying) का ठेका लिया है उसके द्वारा बताए गए रेत भंडारण (sand storage) में बड़ा फर्जीवाड़ा दिखाई दे रहा है। प्रशासन अब कार्रवाई करने की बात कर रहा है।

होशंगाबाद जिले में रेत उत्खनन का काम आरकेटीसी कंपनी के पास है। इस कंपनी ने कुछ समय से रेत उत्खनन का काम बंद कर रखा है और बताया गया है कि कंपनी ने ठेका सरेंडर के लिए खनिज निगम को पत्र भी भेज दिया है। इन सबके बीच कंपनी के पक्ष में हाईकोर्ट से एक आदेश पारित हुआ है जिसमें कंपनी को स्टॉक की गई रेत उठाने की अनुमति दी गई है। कंपनी के द्वारा जिन स्थानों पर रेत का भंडारण करने की बात कही गई है

उनमें रायपुर ग्राम में 3 लाख क्यूबिक मीटर चौटलाई में 3 लाख क्यूबिक मीटर, पलिया पिपरिया में ढाई लाख क्यूबिक मीटर और दमदम में 3 लाख क्यूबिक मीटर रेट भंडारण होने की सूचना हाई कोर्ट को देकर रेत उठाने की अनुमति ली है। इनमें से चोटलाई और दमदम का फिजिकल वेरिफिकेशन करने पर पाया गया कि चौटलाई में लगभग 15 डंपर रेट उपलब्ध है जो 3 लाख क्यूबिक मीटर की तुलना में ना के बराबर है। वही दमदम में कंपनी के द्वारा 3 लाख क्यूबिक मीटर रेत बताई गई है जबकि वहां पर रेत का भंडारण खत्म हो चुका है।

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यह बात खुद कंपनी का ही कर्मचारी कह रहा है। हैरत की बात यह है कि जब इस बारे में होशंगाबाद के खनिज अधिकारी शशांक शुक्ला से पूछा गया तो पहले उन्होंने बताया कि आरकेटीसी कंपनी के रेत भंडारण का फिजिकल वेरिफिकेशन किया गया उसके बाद ही यह अनुमति मिली। लेकिन जब उन्हें यह बताया गया कि हमने खुद अपनी आंखों से रेत भंडारण की वास्तविक स्थिति देखी है तो उन्होंने कहा वहां पर रेत नहीं है और वह कल फिर एक बार अपने अधिकारियों से इसे दिखाएंगे।

इतना ही नहीं हाईकोर्ट से कंपनी के द्वारा अनुमति लेने के सवाल पर शुक्ला का कहना है कि उन्हें इस बारे में जानकारी मिली ही नहीं कि कंपनी हाईकोर्ट गई है और ना ही हाईकोर्ट से इस बारे में कोई नोटिस विभाग को आया। अब जरा इस पूरे खेल को समझिए। कंपनी ने अपना रेत उत्खनन का काम समेटने की तैयारी कर ली है और सूत्रों की मानें तो इसके लिए खनिज निगम को सरेंडर का पत्र भी भेज दिया है। लेकिन निगम के अधिकारी उसे दबा कर बैठे हैं।

अब कंपनी रेत भंडारण यानी स्टॉक बताएगी और नदी से रेत का उत्खनन करेगी। खनिज निगम के अधिकारी उसे इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजिट पास जारी करते जाएंगे और इस तरह नर्मदा से निकाली गई रेत भंडारण के नाम पर कंपनी बाजार में बेच दी जाएगी। जाहिर सी बात है कि इस बड़े खेल में अकेली कंपनी शामिल हो ऐसा नहीं और इसलिए जरूरत इस बात की है कि इस पूरे मामले की सूक्ष्मता से जांच की जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी की जाए।