भारी मतों से जीतीं द्रौपदी मुर्मू, क्रॉस वोटिंग ने बिगाड़ा UPA का खेल, दलाई लामा का बधाई पत्र, जानें भारत के राष्ट्रपति से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य

पहले राउंड की गिनती के साथ ही यूपीए के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा रेस से बाहर नजर आने लगे थे। वहीं तीसरे राउंड की गिनती पूरी होते होते मुर्मू ने जीत दर्ज कर ली।

नई दिल्ली, डेस्क रिपोर्ट। द्रौपदी मुर्मू (Draupadi Murmu) आखिरकार देश को दूसरी महिला राष्ट्रपति (President of India) मिल गई है। द्रौपदी मुर्मू देश की राष्ट्रपति बनने के साथ ही पहली महिला आदिवासी राष्ट्रपति (first female tribal president) होंगी। राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे आने के बाद द्रौपदी मुर्मू ने विपक्ष के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा (Yashwant sinha) को भारी मतों के अंतर से मात दी है। द्रौपदी मुर्मू को 64.04% यशवंत सिन्हा को कुल 35.97% वोट मिले हैं। इसी बीच बधाई के साथ-साथ तंज और तानों का सिलसिला भी शुरू हो गया है।

कई अवधारणाओं को तोड़ते हुए आखिरकार प्रथम आदिवासी महिला द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति की कुर्सी पर काबिज होंगी। एक तरफ जहां मुर्मू को सभी राज्यों से वोट मिले हैं। वही यशवंत सेना को तीन राज्यों में एक भी वोट नहीं मिले। द्रौपदी मुर्मू को केरल में सबसे कम सिर्फ 1 वोट मिले हैं।वहीं यूपी में सबसे ज्यादा 287 वोट मुर्मू के पक्ष में पड़े।

आंकड़ों का खेल

द्रोपति मुर्मू को कुल 2824 वोट मिले जबकि यशवंत सिन्हा को कुल 1877 वोट ही मिले। द्रौपदी मुर्मू के कुल वोट की वैल्यू 606803 घोषित की गई। यशवंत सिन्हा के वोट का कुल वैल्यू 380177 रिकॉर्ड किया गया। यशवंत सिन्हा को भारत के 3 राज्य आंध्र प्रदेश सिक्किम और नागालैंड में एक भी वोट नहीं मिला।

एनडीए उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू की जीत के साथ ही 25 जुलाई को नए राष्ट्रपति का शपथ ग्रहण समारोह होगा। जिसमें द्रौपदी मुर्मू शपथ ग्रहण करेंगी। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का कार्यकाल 24 जुलाई को समाप्त हो रहा है। वही मुर्मू की जीत पर बीजेपी दिल्ली में विजय जुलूस निकालेगी।

जीत के अन्य रिकॉर्ड

आंकड़ों की माने तो सबसे अधिक अंतर से राष्ट्रपति चुनाव जीतने का रिकॉर्ड आज भी राजेंद्र प्रसाद के नाम है। साल 1957 में राजेंद्र प्रसाद के पक्ष में 99.3% वोट पड़े थे। वही विरोध में महज 0.4 फीसद वोट देखने को मिला था। जबकि सबसे कम अंतर से जीतने वाले राष्ट्रपति में वीवी गिरी का नाम शामिल है। साल 1969 में उनके विरोध में 48.7% जबकि उनके पक्ष में 50.2 प्रतिशत वोट देखने को मिले थे।

Read More : राष्ट्रपति चुनाव में कांग्रेस की क्रॉस वोटिंग के बाद नरोत्तम मिश्रा का तंज, कहा- ‘अब तो इस्तीफा दें कमलनाथ’

क्रॉस वोटिंग ने बिगाड़ा UPA का खेल

वहीं राष्ट्रपति चुनाव में मुर्मू के पक्ष में बड़े पैमाने पर क्रॉस वोटिंग देखने को मिली। हालांकि केरल में एनडीए को एक विधायक की तरफ से वोट मिला। असम में सबसे ज्यादा क्रॉस वोटिंग देखने को मिली है। असम में 22 जबकि मध्यप्रदेश में 19 क्रॉस वोटिंग देखने को मिली। महाराष्ट्र इस मामले में 16 क्रॉस वोटिंग के साथ तीसरे स्थान पर था। इसके अलावा उत्तर प्रदेश में 12 क्रॉस वोटिंग, गुजरात में 10 , झारखंड में 10, बिहार में छह, छत्तीसगढ़ में छह, राजस्थान में 5 और गोवा में चार क्रॉस वोटिंग मुर्मू के पक्ष में हुई।कई सांसदों ने भी क्रॉस वोटिंग कर मुर्मू के समर्थन में अपने मतों का प्रयोग किया।

पहले राउंड की गिनती के साथ ही यूपीए के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा रेस से बाहर नजर आने लगे थे। वहीं तीसरे राउंड की गिनती पूरी होते होते मुर्मू ने जीत दर्ज कर ली। पहली भावी महिला आदिवासी राष्ट्रपति और देश की दूसरी महिला राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की जीत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनसे भेंट कर उन्हें बधाई दी इसके अलावा गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित अन्य दिग्गजों ने भी द्रौपदी मुर्मू की जीत पर उन्हें बधाई दी है। यशवंत सिन्हा ने द्रौपदी मुर्मू को बधाई देते हुए कहा है की जीत पर उन्हें बधाई देता हूं। वही उम्मीद करता हूं कि बिना किसी से डरे वह निस्वार्थ भाव से देश के हित में कार्य करेंगी।

तिब्बती बौद्ध धर्म के प्रमुख भिक्षु दलाई लामा ने लिखा मुर्मू को बधाई पत्र

इसके अलावा द्रौपदी मुर्मू की जीत पर उन्हें तिब्बती बौद्ध भिक्षु दलाई लामा ने भी बधाई दी है। मुर्मू को लिखे बधाई पत्र में दलाई लामा ने कहा कि आप ऐसे समय पर शपथ ग्रहण कर रही है, जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी कुछ घटित हो रहा है। वही लोग भारत के महत्व के बारे में अधिक जागरूक हो रहे हैं। दलाई लामा ने कहा कि मैं भारत सरकार और भारत के लिए लंबे समय तक अतिथि के रूप में रहने पर गहरा सम्मान महसूस करता हूं। हजारों सालों से भारत में करुणा के अपने सिद्धांत को बरकरार रखते हुए अहिंसा के सिद्धांत को दूर-दूर तक फैलाया है। लामा ने कहा कि आपसे ऐसी ही उम्मीद रहेगी।

मुर्मू का जीवन-प्रेम

द्रौपदी मुर्मू का जन्म 20 जून, 1958 को ओडिशा के मयूरभंज जिले के उपरबेड़ा गांव में एक संताली आदिवासी परिवार में बिरंची नारायण टुडू के घर हुआ था। ओडिशा के मयूरभंज जिले के छोटे से गांव में जन्मीं द्रौपदी मुर्मू संथाल आदिवासी समुदाय से आती हैं। उनके पिता का नाम बिरंचि नारायण टुडू था, वे किसान थे।

कॉलेज में पढाई के दौरान उनकी मुलाकात श्याम चरण मुर्मू नामक युवक से हुई, दोनों में दोस्ती हुई जो कब प्यार में बदल गई वे समझ ही नहीं पाये। एक दिन वे शादी का प्रस्ताव लेकर द्रौपदी के पिता के पास पहुँच गए, हालांकि द्रौपदी के पिता शादी के लिए तैयार नहीं हुए। श्याम चरण ने द्रौपदी के गांव में ही डेरा जमा लिया, आखिरकार द्रौपदी के पिता बिरंचि नारायण ने शादी के लिए हाँ कर दी। द्रौपदी के चार बच्चे थे। जिसमें 2 बेटे और 2 बेटियां थी, हालांकि द्रौपदी ने अपने दोनों बेटों को खो दिया, फिर पति भी चल बसें। वह झारखंड की पूर्व राज्यपाल भी हैं।

Read More : कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर, इस भत्ते के भुगतान पर बड़ी अपडेट, मंत्रालय ने जारी किया आदेश, लाखों को मिलेगा लाभ

आइए जानते हैं राष्ट्रपति से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण अधिकार :-

प्रशासनिक शक्तियाँ

  • राष्ट्रपति उस तरीके को निर्दिष्ट करते हुए नियम बना सकते हैं जिसमें आदेश और अन्य उपकरण जो उसके नाम पर बनाए और निष्पादित किए जाते हैं, प्रमाणित किए जाएंगे।
  • राष्ट्रपति शपथ दिलवाते हैं :- प्रधान मंत्री और अन्य मंत्री।
  • भारत का महान्यायवादी उसका पारिश्रमिक निर्धारित करता है।
  • राज्यों के राज्यपाल नियुक्त करते हैं ।
  • भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक, मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त, संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्य, और भारत के वित्त आयोग के अध्यक्ष और सदस्य उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश नियुक्त करते हैं।

विधायी शक्तियां

  • राष्ट्रपति वर्ष में कम से कम दो बार संसद के सदन को बुलाता है या संसद के किसी भी सदन का सत्रावसान करता है और लोकसभा को भंग कर देता है। गतिरोध की स्थिति में किसी विधेयक पर बहस या मतदान के लिए वह दोनों सदनों को संयुक्त बैठक में बुला सकता है।
  • वह या तो सदन को अलग-अलग या दोनों सदनों को संयुक्त रूप से संबोधित कर सकता है। प्रत्येक आम चुनाव के बाद पहले सत्र की शुरुआत में, राष्ट्रपति एक भाषण देता है।
  • सीटें खाली होने पर वह स्पीकर, लोकसभा के डिप्टी स्पीकर और राज्यसभा के सभापति/उपसभापति की नियुक्ति करता है।
  • जब कोई विधेयक संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित किया जाता है, तो उसे राष्ट्रपति की सहमति के लिए प्रस्तुत किया जाता है। यह तब तक संसद का अधिनियम नहीं बन सकता जब तक इसे राष्ट्रपति की सहमति प्राप्त नहीं हो जाती। अनुच्छेद 111 के तहत राष्ट्रपति के सामने तीन विकल्प होते हैं:
  • वह विधेयक को अपनी सहमति दे सकता है जिस स्थिति में वह तुरंत अधिनियम बन जाता है, वह विधेयक पर अपनी सहमति रोक सकता है या वह, धन विधेयकों के अलावा अन्य विधेयकों के मामले में, सदन के पुनर्विचार के लिए विधेयक को वापस कर सकते है।
  • राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए भेजे गए किसी विधेयक को रोकने की शक्ति राष्ट्रपति की वीटो शक्ति कहलाती है। भारत के संविधान द्वारा भारत के राष्ट्रपति को विभिन्न प्रकार की वीटो शक्ति प्रदान की गई है, जो निलम्बन और पॉकेट वीटो के रूप में हैं।

आइए जानते हैं देश के कुल 14 राष्ट्रपति के बारे में एक संक्षिप्त विवरण :-

राजेंद्र प्रसाद : राजेंद्र प्रसाद भारत के पहले राष्ट्रपति थे। वह लगातार दो कार्यकाल तक सेवा देने वाले एकमात्र राष्ट्रपति भी हैं।

डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन : डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन दूसरे राष्ट्रपति थे। शीर्ष पद पर चुने जाने से पहले उपराष्ट्रपति के रूप में कार्य करने वाले पहले व्यक्ति थे।

जाकिर हुसैन: डॉ. जाकिर हुसैन भारत के पहले मुस्लिम राष्ट्रपति बने और उनके पद पर ही उनका निधन हो गया। तत्काल उपाध्यक्ष, वी.वी. गिरी को कार्यवाहक अध्यक्ष बनाया गया। उसके बाद सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश मोहम्मद हिदायतुल्ला 20 जुलाई 1969 से 24 अगस्त 1969 तक कार्यवाहक राष्ट्रपति बने। मोहम्मद हिदायतुल्ला को 2002 में भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। उन्होंने भारत में शिक्षा में क्रांति भी लाई।

वी वी गिरी: वी वी गिरी भारत के चौथे राष्ट्रपति थे। उनका पूरा नाम वराहगिरी वेंकट गिरि था। वह स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में राष्ट्रपति चुने जाने वाले एकमात्र व्यक्ति बने। 1975 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

नीलम संजीव रेड्डी : नीलम संजीव रेड्डी भारत के छठे राष्ट्रपति बने। वह आंध्र प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री थे। वे सीधे लोकसभा अध्यक्ष के पद के लिए चुने गए और राष्ट्रपति भवन पर कब्जा करने वाले और राष्ट्रपति पद के लिए दो बार चुनाव लड़ने वाले सबसे कम उम्र के राष्ट्रपति बने।

ज्ञानी जैल सिंह : ज्ञानी जैल सिंह भारत के सातवें राष्ट्रपति और पहले सिख राष्ट्रपति थे। राष्ट्रपति बनने से पहले, ज्ञानी जेल सिंह पंजाब के मुख्यमंत्री और केंद्र में मंत्री भी थे। उन्होंने इंडियन पोस्ट ऑफिस बिल पर पॉकेट वीटो का भी इस्तेमाल किया। उनकी अध्यक्षता के दौरान, ऑपरेशन ब्लू स्टार, इंदिरा गांधी की हत्या और 1984 के सिख विरोधी दंगों जैसी कई घटनाएं हुईं।

आर. वेंकटरमन : आर. वेंकटरमन 25 जुलाई 1987 से 25 जुलाई 1992 तक भारत के राष्ट्रपति के रूप में चुने गए। इससे पहले वे 1984 से 1987 तक भारत के उपराष्ट्रपति थे। उन्हें दुनिया के विभिन्न हिस्सों से कई सम्मान मिले हैं। वह भारत के स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान के लिए “ताम्र पत्र” के प्राप्तकर्ता हैं।

के. आर. नारायणन : कोचेरिल रमन नारायणन भारत के पहले दलित राष्ट्रपति और 10वें राष्ट्रपति थे। 76 साल और 271 दिनों में, वह चुने जाने वाले सबसे उम्रदराज राष्ट्रपति थे।

डॉ ए पी जे अब्दुल कलाम : डॉ ए पी जे अब्दुल कलाम पहले वैज्ञानिक थे, जिन्होंने 11वें राष्ट्रपति का पद संभाला, उन्हें 1997 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।

प्रतिभा देवीसिंह पाटिल : 12वीं राष्ट्रपति बनने से पहले प्रतिभा देवीसिंह पाटिल राजस्थान की राज्यपाल थीं। वह सुखोई उड़ाने वाली पहली महिला राष्ट्रपति भी थीं।

प्रणब मुखर्जी: 13वें राष्ट्रपतिप्रणब मुखर्जी राष्ट्रपति चुनाव लड़ने से पहले केंद्र सरकार में वित्त मंत्री थे। 31 अगस्त, 2020 (सोमवार) को 84 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया।

राम नाथ कोविंद : राम नाथ कोविंद भारत के 14वें और वर्तमान राष्ट्रपति है। वह 25 जुलाई 2017 को राष्ट्रपति बने और भारतीय जनता पार्टी के सदस्य हैं। वे बिहार के पूर्व राज्यपाल हैं।

द्रौपदी मुर्मू : द्रौपदी मुर्मू 21 जुलाई, 2022 को भारत की 15वीं राष्ट्रपति बनीं।