लाखों कर्मचारियों-अधिकारियों के लिए अच्छी खबर, पदोन्नति में आरक्षण पर नई अपडेट, ड्राफ्ट तैयार, जल्द मिलेगा लाभ

मंगलवार को नए पदोन्नति नियम 2022 का तैयार ड्राफ्ट मंत्री समूह के सामने रखा गया। इसे जल्द परीक्षण के लिए वरिष्ठ सचिवों की समिति के पास भेजा जाएगा।

employees Promotion

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। मध्य प्रदेश के 3 लाख से ज्यादा कर्मचारियों-अधिकारियों के लिए अच्छी खबर है। जल्द पदोन्नति में आरक्षण (MP Reservation in Promotion) पर लगी रोक हटने वाली है। इसके लिए राज्य सरकार ने तैयारियां शुरू कर दी है। मंगलवार को नए पदोन्नति नियम 2022 का तैयार ड्राफ्ट मंत्री समूह के सामने रखा गया। इसे जल्द परीक्षण के लिए वरिष्ठ सचिवों की समिति के पास भेजा जाएगा। इसके बाद कैबिनेट में मंजूरी के लिए भेजा जाएगा और फिर नए नियम लागू कर दिए जाएंगे।

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दरअसल, मध्य प्रदेश सरकार ने 6 साल से अटकी पदोन्नतियों पर लगी रोक हटाने के लिए नए पदोन्नति नियम 2022 तैयार कर लिए हैं, जिसे मंगलवार को गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा की अध्यक्षता वाली मंत्री समूह की बैठक में रखा गया और फिर ड्राफ्ट सपाक्स और अजाक्स को सौंप दिया गया। दोनों पक्षों से दो दिन में सुझाव मांगे गए है। अब प्रस्ताव परीक्षण के लिए वरिष्ठ सचिवों की समिति के पास भेजा जाएगा। इसके बाद कैबिनेट की मंजूरी के बाद पदोन्नति के नए नियमों को लागू कर दिए जाएंगे। आरक्षित वर्ग यानी ST से 20 फीसदी और SC से 16 फीसदी यानी कुल पदों का 36 प्रतिशत आरक्षित कर बाकी पदों को अनारक्षित से भरा जाएगा।नए नियमों में क्रीमीलेयर का कोई प्रावधान नहीं किया गया है।

मंगलवार को गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की अध्यक्षता में मंत्रालय में प्रमोशन में आरक्षण संबंधी मंत्री-समूह की बैठक हुई। इसमें मंत्री डॉ. मिश्रा ने कहा कि मप्र शासन की ओर से तैयार किये गये ड्रॉफ्ट का सभी पक्ष भली-भाँति अवलोकन कर लें। मंत्री-समूह ने निर्णय लिया कि भली-भाँति अवलोकन के बाद जल्द ही पुन: परिणाम मूलक बैठक आयोजित होगी।मंत्री-समूह की बैठक में जल-संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, सहकारिता मंत्री अरविंद भदौरिया, सामान्य प्रशासन और स्कूल शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) इंदर सिंह परमार, एसीएस जीएडी विनोद कुमार और अजाक्स एवं सपाक्स के पदाधिकारी मौजूद थे।

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बता दे कि मध्य प्रदेश में पिछले 6 साल यानि 2016 से कर्मचारियों की पदोन्नति में आरक्षण का मामला लंबित है।इस अवधि में 70000 से अधिक कर्मचारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं और करीब 36000 को पदोन्नति नहीं मिली है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 30 अप्रैल 2016 को ‘मप्र लोक सेवा (पदोन्न्ति) नियम 2002″ को खारिज कर दिया था, जिसके बाद राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने मई 2016 में यथास्थिति (स्टेटस-को) रखने के निर्देश दिए हैं, तब से पदोन्नति पर रोक लगी है।राज्य की शिवराज सरकार अब नए नियम बनाने जा रही है, जिसका लाभ 3.25 लाख से ज्यादा को मिलेगा।