कर्मचारियों-पेंशनर्स के लिए अच्छी खबर, सुप्रीम कोर्ट ने दिया महत्वपूर्ण फैसला, करोड़ों को मिलेगा लाभ

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी कर्मचारी को परिलब्धियों या भत्तों का अधिक भुगतान वसूली योग्य नहीं है।

नई दिल्ली, डेस्क रिपोर्ट। सुप्रीम कोर्ट (Supreme court)  ने सेवानिवृत्त कर्मचारी (retired employee) और पेंशनर्स (pensioners) को बड़ी राहत दी है। दरअसल किसी कर्मचारी को राज्य शासन द्वारा यदि अतिरिक्त पेंशन (additional pension) सहित अतिरिक्त भुगतान कर दिया जाता है तो उसे सेवानिवृत्ति के बाद इस आधार पर नहीं वसूला जा सकता कि उसकी वेतन वृद्धि (increment) राज्य शासन की तरफ से किसी त्रुटि की वजह से हुई थी। दरअसल इस मामले में सुप्रीम कोर्ट (supreme court) ने सुनवाई करते हुए कहा कि अतिरिक्त भुगतान की वसूली सेवानिवृत्ति के बाद नहीं की जानी चाहिए। यह कर्मचारी का अधिकार है, साथ ही कर्मचारी को होने वाली मुश्किलों से राहत देने के लिए यह निर्णय लिया जाता है।

सुप्रीम कोर्ट ने कई मामले को देखते हुए और याचिकाकर्ता की याचिका पर वकील द्वारा दी गई दलील को सुनने के बाद यह फैसला दिया है कि यदि किसी कर्मचारी को किए गए अतिरिक्त भुगतान के कारण उसकी किसी भी धोखाधड़ी गलत दस्तावेज पेश करने के कारण नहीं है तो उसे अतिरिक्त भुगतान की राशि को वापस नहीं वसूला जा सकता वहीं यदि यह भुगतान कंपनी की ओर से यह राज्य शासन की ओर से भक्तों की गणना में गलती से किया गया है तो इसे सेवानिवृत्ति होने के बाद वापस नहीं वसूला जा सकता है।

यह निश्चय ही लाखों पेंशनर्स और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को बड़ा लाभ होगा दरअसल कई ऐसे मामले हैं जहां राज्य सरकार और केंद्र सरकार की गलती की वजह से अतिरिक्त भुगतान पेंशनर्स को किए गए हैं अब ऐसे में पेंशन की राशि पेंशनर से नहीं वसूली जा सकेगी हालांकि यदि कर्मचारी की किसी गलती यह धोखाधड़ी के मामले में अतिरिक्त भुगतान हुआ है ऐसे मामले में राज्य सरकारों को और केंद्र सरकार को वसूली का अधिकार होग।

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इस मामले में, एक शिक्षक द्वारा उसके खिलाफ राज्य द्वारा शुरू की गई वसूली की कार्यवाही को चुनौती देने वाली एक रिट याचिका को खारिज करते हुए, केरल के उच्च न्यायालय ने माना था कि सेवा लाभ प्रदान करते समय संबंधित विभाग द्वारा की गई गलती को प्रस्तावित के माध्यम से सुधारा जा सकता है। कर्मचारी के रकम डी.सी.आर.जी से वसूली जानी है। जिस पर Supreme Court में गए इस मामले की सुनवाई की गई।

SC अपील में अपीलकर्ता ने तर्क दिया कि अपीलकर्ता को किया गया अधिक भुगतान उसकी ओर से किसी गलत बयानी या धोखाधड़ी के कारण नहीं था, बल्कि केरल सेवा नियमों की व्याख्या करने में एक गलती के कारण था। इसलिए इस मुद्दे पर विचार किया गया था कि क्या अपीलकर्ता को सेवा में रहते हुए दी गई वेतन वृद्धि (increment) उसकी सेवानिवृत्ति (retirement) के लगभग 10 साल बाद उससे इस आधार पर वसूल की जा सकती है कि उक्त वेतन वृद्धि एक गलती के कारण दी गई थी?

SC ने कहा कि किसी कर्मचारी को emoluments या Allowances का अधिक भुगतान वसूली योग्य नहीं है। SC ने कहा कि वसूली के खिलाफ यह राहत कर्मचारियों के किसी भी अधिकार के कारण नहीं दी गई है, लेकिन Equity में न्यायिक विवेक का प्रयोग करते हुए न्यायमूर्ति एस अब्दुल नज़ीर और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नज़ीर और विक्रम नाथ ने कहा कि कर्मचारियों/ Pensioners को उस कठिनाई से राहत प्रदान करने के लिए ये आदेश दिया जा रहा है, जो वसूली का आदेश देने पर उन्हें हुई है।

इस मामले में इससे पहले एक शिक्षक (Teacher) द्वारा उसके खिलाफ राज्य द्वारा शुरू की गई वसूली की कार्यवाही को चुनौती देने वाली एक रिट याचिका (writ petition) को खारिज करते हुए, केरल के उच्च न्यायालय (kerela high court) ने माना कि सेवा लाभ प्रदान करते समय संबंधित विभाग द्वारा की गई गलती को प्रस्तावित के माध्यम से सुधारा जा सकता है। कर्मचारी के इस मामले में एक शिक्षक द्वारा उसके खिलाफ राज्य द्वारा शुरू की गई वसूली की कार्यवाही को चुनौती देने वाली एक रिट याचिका को खारिज करते हुए, केरल के उच्च न्यायालय ने माना था कि सेवा लाभ प्रदान करते समय संबंधित विभाग द्वारा की गई गलती को प्रस्तावित के माध्यम से सुधारा जा सकता है। कर्मचारी के डी.सी.आर.जी से वसूली जानी है।

SC ने निर्णयों की एक श्रृंखला में लगातार यह माना है कि यदि कर्मचारी की किसी गलत बयानी या धोखाधड़ी के कारण अतिरिक्त राशि का भुगतान नहीं किया गया था या यदि नियोक्ता द्वारा salary/ allowance की गणना के लिए गलत सिद्धांत लागू करके ऐसा अधिक भुगतान किया गया था या नियम/आदेश की एक विशेष व्याख्या के आधार पर जो बाद में गलत पाया जाता है, emoluments या भत्तों का इतना अधिक भुगतान वसूली योग्य नहीं है।

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SC ने आगे कहा है कि यदि किसी दिए गए मामले में, यह साबित हो जाता है कि किसी कर्मचारी को यह जानकारी थी कि प्राप्त भुगतान देय राशि से अधिक था या गलत भुगतान किया गया था, या ऐसे मामलों में जहां त्रुटि का पता चला है या गलत होने के थोड़े समय के भीतर सुधार किया गया है। वसूली के खिलाफ यह राहत कर्मचारियों के किसी भी अधिकार के कारण नहीं बल्कि इक्विटी में, न्यायिक विवेक का प्रयोग करते हुए कर्मचारियों को उस कठिनाई से राहत प्रदान करने के लिए दी जाती है जो वसूली का आदेश देने पर होगी।

भुगतान मामला न्यायिक विवेक के दायरे में होने के कारण अदालतें किसी विशेष मामले के तथ्यों और परिस्थितियों पर अधिक भुगतान की गई राशि की वसूली के लिए आदेश दे सकती हैं। उच्च अदालत ने कहा कि विभाग के पास ऐसा कोई मामला नहीं है कि अपीलकर्ता द्वारा की गई गलत बयानी या धोखाधड़ी के कारण अधिक राशि का भुगतान किया गया है। वास्तव में, defendants का मामला यह है कि केरल सेवा नियमों की व्याख्या करने में गलती के कारण अधिक भुगतान किया गया था, जिसे बाद में accountant general द्वारा इंगित किया गया था, अदालत ने उच्च न्यायालय के फैसले को रद्द किया।

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