पीरियड्स में इन चीजों का इस्तेमाल करें या न करें, जाने इनसे जुड़े मिथ्स और कुछ खास तथ्य

ऐसी ही कुछ भ्रांतियों के बारे में आपको बताते हैं और उनकी सच्चाई भी जाने

लाइफस्टाइल, डेस्क रिपोर्ट। पीरियड्स (periods) के समय से जुड़े हुए ही कई मिथ्स (myths) हैं। इन दिनों साफ सफाई, हाइजीन (hygiene) और healthy Life से जुड़े भी सबके अपने अलग अलग तर्क होते हैं। आमतौर पर लड़कियां इन दिनों में सेनेटरी पेड्स (sanitary pads) का उपयोग ही करती हैं। इसका एक विकल्प टैम्पोन्स और मेंस्ट्रुअल कप्स (menstrual cups) भी हैं। लेकिन कई तरह के मिथ्स के चलते इन्हें आजमाने से बचने की कोशिश रहती है।

जबकि मेंस्ट्रुअल कप एक सुरक्षित तरीका माना जाता है, जो सेनेटरी पेड्स की तुलना में किफायती भी है। इसके बावजूद कई तरह की भ्रांतियों का शिकार होकर लड़कियां और महिलाएं इसके इस्तेमाल से बचती हैं। ऐसी ही कुछ भ्रांतियों के बारे में आपको बताते हैं और उनकी सच्चाई भी जाने।

खो जाएगा मेंस्ट्रुअल कप

कुछ लोगों का मानना है कि कप योनि में लगाने पर कहीं और भी जा सकता है। जबकि सच्चाई ये है कि ये कप योनि में जाते ही उससे चिपक जाता है। इसके अंत में पतली ओपनिंग होती है जो इसे अन्य हिस्सों के अंदर जाने से रोक देती है।
वॉशरूम जाते समय इसे बार बार निकालना पड़ता है।

Read More : crypto currency: क्रिप्टो करेंसी से पेमेंट कर सकेंगे टेलीग्राम यूजर्स, ऐसा है नया फीचर

ये बात भी पूरी तरह गलत है। अगर आपने सही कप का चयन किया है तो आपको ऐसी कोई दिक्कत नहीं होगी। हर किसी के शरीर और रक्त के बहाव के अनुसार अलग अलग कप यूज करने का सुझाव दिया जाता है। हो सकता है आप एक बार में ये न समझें अलग अलग कप के इस्तेमाल से ये दुविधा दूर हो सकती है। दूसरा तरीका ये है कि आप स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह लेने के बाद सही कप का चुनाव करें।

ज्यादा फ्लो के लिए उपयुक्त नहीं

ये भी भ्रांति ही है कि जिन्हें ज्यादा तेज ब्लड फ्लो रहता है वो महिलाएं इस कप का उपयोग नहीं कर सकतीं। जिस तरह सेनेटरी नैपकिन से फ्लो मैनेज किया जाता है। उसी तरह कप से भी फ्लो मैनेज किया जा सकता है। ज्यादा फ्लो होने पर नैपकिन बदलने की जरूरत पड़ती है। उसी तरह कप को समय समय पर खाली करने की जरूरत होगी।

वर्जिनिटी खोने का डर

कई महिलाओं को ये डाउट होता है कि इससे वर्जिनिटी चली जाएगी। दरअसल कप के इस्तेमाल से हाइमन टूटने का डर रहता है। लेकिन ये एक सामान्य प्रक्रिया है। मेडिकल साइंस में ये सबूत भी मिले हैं कि कई लोग बिना हाइमन के ही पैदा होते हैं। ऐसे में वर्जिनिटी खोने जैसे सवाल ही पैदा नहीं होते।