ICMR VCRC को बड़ी कामयाबी, मच्छर करेंगे डेंगू-चिकनगुनिया का खात्मा, बीमारी के रोकथाम में मिलेगी मदद

चिकनगुनिया (Chikungunya) और डेंगू को नियंत्रित करने के लिए ICMR वेक्टर कंट्रोल रिसर्च सेंटर (ICMR Vector Control Research Center) ने विशेष मादा मच्छर विकसित किए हैं।

पुंडुचेरी, डेस्क रिपोर्ट। देश भर में तेजी से बढ़ रहे डेंगू (Dengue) और मलेरिया (Malaria) की बढ़ती बीमारी के बीच एक सुखद खबर सामने आई है। दरअसल अब मच्छर डेंगू और मलेरिया का इलाज करेंगे। पुंडुचेरी के ICMR- VCRC कंट्रोल रिसर्च इंस्टिट्यूट में एक बेहद चौंकाने वाला शोध सामने आया है। जिसके जरिए मच्छर से फैलने वाले डेंगू और मलेरिया की रोकथाम मच्छर से किए जाने की तैयारी की जा रही है। जानकारी की माने तो चिकनगुनिया (Chikungunya) और डेंगू को नियंत्रित करने के लिए ICMR वेक्टर कंट्रोल रिसर्च सेंटर (ICMR Vector Control Research Center) ने विशेष मादा मच्छर विकसित किए हैं।

यह मादा मच्छर के साथ संभोग कर लार्वा पैदा करेंगे और यह लार्वा वायरस को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने से रोकने में कारगर होंगे। पुंडुचेरी के आईसीएमआर वेक्टर कंट्रोल रिसर्च सेंटर ने एडिज इजिप्ट की 2 कॉलोनियां विकसित की है। यह कॉलोनियां बीमारी के प्रसार को रोकेगी। दरअसल ये कॉलोनियां डब्ल्यूमेल और डब्ल्यूएएलबी वोल्बाचिया स्ट्रेन से संक्रमित हैं, जिन्हें एई.एजिप्टी (पुड) कहा जाता है।

बता दें कि 2017 से इसके लिए तैयारी शुरू की गई थी। ऑस्ट्रेलिया में इस तरह की एक रिसर्च का पता चलने के बाद उसी की तर्ज पर भारत में चिकनगुनिया और डेंगू की रोकथाम के लिए इस शोध को शुरू किया गया था। जिसके लिए ऑस्ट्रेलिया से ऐसे मच्छरों के 10,000 अंडे मंगाए गए थे इन मच्छरों में एक प्रकार का व्यक्ति दिया डाला गया है जिसका नाम वोल्बाकिया है।

मामले में ICMR VCRC पुडुचेरी के निदेशक अश्विनी कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि डेंगू और चिकनगुनिया मच्छरों से फैलने वाले वायरस को खत्म करने के लिए इस तरह के शोध किए जा रहे हैं। वही वोल्बाकिया के मच्छरों में चले जाने के बाद उस मच्छर के काटने पर डेंगू और चिकनगुनिया होने का खतरा नहीं रहता है।

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जानकारी देते हुए अश्वनी कुमार ने बताया कि मादा मच्छरों में वोल्बाकिया बैक्टीरिया छोड़े जाने के बाद वह नर मच्छरों के साथ संपर्क में आने पर लार्वा पैदा करेंगे। जिसके बाद इस डेंगू और चिकनगुनिया वायरस के ट्रांसफर होने का खतरा पूरी तरह से समाप्त हो जाएगा।

वही विशेषज्ञों की माने तो इसके लिए 4 साल से अध्ययन और शोध का कार्य पूरा किया जा रहा था। जो लगभग पूरा किया जा चुका है। वहीं सरकार से मंजूरी का मामला अभी भी लंबित है। शोध के अंतिम चरण में पहुंचने पर इन मच्छरों को किसी एक इलाके में छोड़ा जाएगा। जिसके बाद इंसानों पर इन मच्छरों का कैसा असर रहता है, डेंगू के मामले में कितनी कमी आती है। इसकी पुष्टि होने के अंतिम चरण के लिए सरकार की मंजूरी चाहिए होगी।

बता दे इसके लिए दुनिया में सबसे पहले रिसर्च ऑस्ट्रेलिया में शुरू किया गया। मोनाश यूनिवर्सिटी के व्यक्ति कंट्रोल डिपार्टमेंट में वोल्बाकिया बैक्टीरिया के जल रही है डेंगू और मलेरिया फैलने वाले एडीज मच्छरों से इस वायरस की रोकथाम के लिए इसे वाल्बकिया स्ट्रेन वाले बैक्टीरिया वाले मच्छरों से संपर्क कर आकर देखा गया था।

वहीं भारत के एडीज मच्छरों के साथ वॉलबाकिया स्टैंन बैक्टीरियल मच्छरों के संपर्क कराने पर देखा गया कि विषाणु मच्छर में होने के बाद उस मच्छर के काटने से डेंगू और चिकनगुनिया के फैलने का खतरा नहीं रहता है। मई 2018 में ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड में मच्छरों किस प्रजाति को छोड़ा गया था। जिसके बाद वैज्ञानिकों का दावा था कि उस इलाके में डेंगू का एक भी केस देखने को नहीं मिला है। जिसके बाद भारत में भी इस शोध को शुरू किया गया था।