हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय, सेवानिवृत्त आयु पर राज्य सरकार को निर्देश, तीन महीने में मिलेगा लाभ

हाई कोर्ट ने सेवानिवृत्ति की आयु 60 करने की याचिका के बारे में तथ्यों की समीक्षा करने और तीन महीने के भीतर मामले पर फैसला लेने का निर्देश दिया है।

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कोच्चि, डेस्क रिपोर्ट। कर्मचारियों डाक्टर की रिटायरमेंट उम्र (Employees Retirement age) सीमा पर हाई कोर्ट (High court) ने एक बार फिर से महत्वपूर्ण आदेश दिया है। जिसके बाद राज्य सरकार (State Government) ने तैयारी शुरू कर दी है।हाईकोर्ट के निर्णय मिलने के साथ ही सरकार ने इस मामले में समीक्षा के लिए बैठक की तैयारी की है। इतना ही नहीं KAT के आदेश को खारिज करते हुए, राज्य उच्च न्यायालय ने अब सरकार को सेवानिवृत्ति की आयु 60 करने की याचिका के बारे में तथ्यों की समीक्षा करने और तीन महीने के भीतर मामले पर फैसला लेने का निर्देश दिया है।

हाईकोर्ट ने कहा कि आयुष डॉक्टरों की रिटायरमेंट उम्र पर 3 महीने के अंदर विचार किया जाए। वही विचार करें कि क्या कारण है जो सेवानिवृत्ति की आयु वृद्धि के संबंध में निर्णय लेने के लिए रखे गए हैं। राज्य सरकार को चाहिए कि वह मामले को देखकर, इस पर निर्णय ले। वही तब तक आयुष डॉक्टरों की सेवानिवृत्ति आयु पर राज्य सरकार का फैसला ही मान्य किया जाएगा। इतना ही नहीं हाईकोर्ट ने कहा कि आए हुए आवेदक द्वारा भी आवेदन पर विचार कर केवल राज्य सरकार को यह निर्णय लेने का निर्देश दिया जा सकता है। हम उम्मीद करते हैं कि 3 महीने के भीतर राज्य सरकार आयुष डॉक्टरों के रिटायरमेंट उम्र पर निर्णय लेगी। वही आयुष डॉक्टर के रिटायरमेंट आयु की मांग पर भी समानता से विचार करेगी।

याचिका की सुनवाई करते हुए जस्टिस एके जयशंकर नांबियार और जस्टिस मोहम्मद नियाज सीपी की खंडपीठ ने राज्य को इस पर शीघ्र निर्णय लेने का आदेश दिया है। बता दें कि 2015 में राज्य द्वारा स्वास्थ्य विभाग के एलोपैथिक डॉक्टरों को छोड़कर आयुष के तहत शासकीय डॉक्टरों में होम्यो, यूनानी सहित योग मेडिकल पद्धति के डॉक्टरों को सम्मिलित किया गया था। 2017 तक उनकी सेवानिवृत्ति आयु 56 वर्ष थी।

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राज्य सरकार ने 2017 में सेवानिवृत्ति आयु को बढ़ाकर 60 वर्ष कर दिया था। हालांकि यह रिटायरमेंट आयु एलोपैथी डॉक्टर के लिए था जबकि आयुष विभाग के डॉक्टरों के लिए कोई निर्णय नहीं लिया गया था। जिसके बाद आयुष डॉक्टरों द्वारा भेदभाव का आरोप लगाया गया था। राज्य प्रशासनिक न्यायाधिकरण का दरवाजा खटखटाया गया था। उनकी तरफ से मांगी गई थी कि उन्हें भी 60 वर्ष रिटायरमेंट उम्र का लाभ दिया जाए।

दो बार याचिका दायर करने के बाद भी ट्रिब्यूनल द्वारा इस पर विचार नहीं किया गया और अभ्यावेदन को खारिज करते हुए कहा गया कि आयुष डॉक्टरों की रिटायरमेंट आयु बढ़ाने का कोई निर्णय नीतिगत नहीं है। तीसरी बार ट्रिब्यूनल कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के बाद अनुमति देते हुए आयुष डॉक्टरों की सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष करने का निर्देश दिया था।

हालांकि बढ़ी हुई सेवानिवृत्ति का लाभ सिर्फ उन्हीं लोगों को दिया जाना था। जिसमें कर्मचारी सुप्रीम कोर्ट के फैसले की तारीख 3 अगस्त 2021 के बाद सेवानिवृत्त हुए थे। ट्रिब्यूनल के आदेश के बाद पीड़ित डॉक्टरों द्वारा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया था। जिसमें कहा गया था कि राज्य के आयुष विभाग के डॉक्टरों की सेवानिवृत्ति की आयु 60 वर्ष तक बढ़ाने के निर्देश में कई तरह की खामी है।

हाई कोर्ट ने कहा कि ट्रिब्यूनल को खुद को स्थिति की याद दिलाना चाहिए कि राज्य सरकार द्वारा लिए गए नीतिगत निर्णय के अभाव में राज्य सरकार पर अपने अभ्यास को करने और राज्य सरकार पर निर्णय थोपना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है। वही आयुष विभाग के डॉक्टरों की सेवानिवृत्ति आयु नहीं बढ़ने के बाद 3 महीने के भीतर योग्यता के आधार पर इसमें निर्णय लेने को निर्देशित किया गया है। साथ ही ट्रिब्यूनल के आदेश को रद्द कर दिया गया है।