लाखों श्रमिकों के लिए अच्छी खबर, मूल वेतन में होगी 15 फीसद की बढ़ोतरी! राज्य सरकार का बड़ा फैसला, मिलेगा लाभ

प्रस्ताव से असंगठित क्षेत्र के करीब 3 करोड़ कामगारों को फायदा होगा।

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पटना, डेस्क रिपोर्ट। राज्य सरकार (State Government) ने अपने कर्मचारियों (Employees) सहित असंगठित क्षेत्रों के श्रमिकों (labourers)  के लिए भी बड़ा फैसला लिया है। दरअसल जल्द मजदूरों को बड़ा तोहफा मिलेगा। उनके न्यूनतम मजदूरी में 15 फीसद की वृद्धि (Labourers Wages hike) की जाएगी। 2 महीने में इस पूरे कार्यशैली को पूरा किया जाएगा। इसके लिए आपत्ति और सुझाव भी मांगे गए हैं। जिसके बाद मजदूरों को न्यूनतम वेतन (minimum salary) 366 रूपए रोजाना मजदूरी के लिए उपलब्ध कराए जाएंगे। वहीं राज्य में 2 महीने के बाद नई दर लागू की जाएगी।

बिहार न्यूनतम वेतन सलाहकार बोर्ड ने सोमवार को राज्य में असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी में 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी की सिफारिश की है। राज्य सरकार ने विभिन्न श्रमिक संघों के लोगों, प्रतिनिधियों से सुझाव मांगे हैं। प्रस्ताव से संबंधित संगठन। यदि नया वेतन लागू होता है तो बिहार में एक श्रमिक को मौजूदा 318 रुपये के दैनिक वेतन से 48 रुपये अधिक का भुगतान किया जाएगा।

मजदूरी की बढ़ी हुई दर अगले दो महीनों में आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद राज्य में लागू की जाएगी। बिहार के श्रम संसाधन मंत्री जिबेश कुमार ने कहा कि न्यूनतम मजदूरी हर पांच साल के बाद संशोधित की जाती है। राज्य न्यूनतम मजदूरी सलाहकार बोर्ड की बैठक में न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने का प्रस्ताव पारित किया गया।

उन्होंने खुलासा किया कि राज्य सरकार द्वारा औपचारिक अधिसूचना जारी होने के बाद एक मजदूर को प्रति दिन न्यूनतम मजदूरी 366 रुपये मिलेगी। प्रस्ताव से असंगठित क्षेत्र के करीब 3 करोड़ कामगारों को फायदा होगा। मूल्य वृद्धि के मद्देनजर न्यूनतम मजदूरी में बढ़ोतरी का प्रस्ताव किया गया है। श्रम संसाधन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि 88 इकाइयों में लगे कुशल, अर्ध-कुशल और अकुशल श्रमिकों को नौकरी के अवसर प्रदान किए जाएंगे, जिन्हें न्यूनतम मजदूरी की नई दर का भुगतान किया जाएगा।

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केंद्र सरकार द्वारा शुरू किए गए ई-श्रम पोर्टल पर अब तक बिहार के कुल 2,82,53,941 श्रमिकों ने अपना पंजीकरण कराया है। पंजीकृत श्रमिकों को जल्द ही डिजिटल पहचान पत्र जारी किए जाएंगे। उत्तर प्रदेश के बाद बिहार दूसरे स्थान पर है, जिसमें पोर्टल पर कुल 8.28 करोड़ श्रमिकों ने पंजीकरण कराया है।

2.55 करोड़ मजदूरों ने पोर्टल पर अपना पंजीकरण कराकर पश्चिम बंगाल को तीसरा स्थान दिया है। बिहार ने पंजीकरण के मामले में निर्धारित लक्ष्य का 80.75 प्रतिशत हासिल कर लिया है जबकि सभी श्रमिकों ने पोर्टल पर अपना पंजीकरण करा लिया है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, 16.94 फीसदी श्रमिक सामान्य वर्ग से, 57.95 फीसदी पिछड़े वर्ग से, 20.28 फीसदी एससी से और 4.82 फीसदी एसटी से हैं, जिन्होंने पोर्टल पर अपना पंजीकरण कराया है।