लाखों कर्मचारियों को मिलेगा लाभ, पॉलिसी तैयार, राज्य शासन पर 2500 करोड़ रुपए का आएगा अतिरिक्त भार

मध्य प्रदेश में लगातार 5 साल से कर्मचारी पदोन्नति का इंतजार कर रहे हैं।

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भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। मध्य प्रदेश (MP) के अधिकारी कर्मचारियों (Employees) के लिए बड़ी खबर है। जिसके बाद जल्द उन्हें प्रमोशन का लाभ मिल सकता है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (CM Shivraj) द्वारा मंत्रिपरिषद समिति का गठन किया गया था। जिसके माध्यम से प्रमोशन की पॉलिसी (pronmotion policy) तैयार करनी थी। इसकी जिम्मेदारी गृह मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा को सौंपी गई थी। आ रही अपडेट के मुताबिक कमेटी ने प्रमोशन की पॉलिसी फाइनल कर लिए है। कमेटी द्वारा इससे पहले तीन मीटिंग आयोजित की चुकी है। लास्ट मीटिंग कॉल की तैयारी की जा रही है। जल्द ही अंतिम मीटिंग कॉल की तैयारी कर अधिकारी कर्मचारी के प्रमोशन पर बड़ा फैसला लिया जा सकता है।

दरअसल नरोत्तम मिश्रा की अध्यक्षता वाली मंत्री परिषद समिति ने शासकीय कर्मचारियों को प्रमोशन का रास्ता निकालने के लिए कई मीटिंग आयोजित की गई। वहीं कर्मचारी संगठन के तहत तीन बार बैठक बुलाए जाने के बाद एक कॉमन एजेंडे पर सहमत होने की अपील की गई थी। Promotion Policy की सहमति बन गई है। कमेटी ने प्रमोशन की पॉलिसी फाइनल कर ली है जिसकी प्रक्रिया को पूरा कर लिया गया है।

वहीं सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव विनोद कुमार की माने तो समिति की बैठक जल्द आयोजित की जाएगी। जिसके बाद प्रदेश के शासकीय कर्मचारी के प्रमोशन पॉलिसी मंजूरी के लिए कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद प्रमोशन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। मध्य प्रदेश में लगातार 5 साल से कर्मचारी पदोन्नति का इंतजार कर रहे हैं।

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हालांकि अभी इनके इंतजार पर विराम लग सकते हैं। बता दें कि शासकीय विभागों में प्रमोशन नहीं हो रहा है। दरअसल 2002 में बनाए गए नियम को हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया था। हाई कोर्ट डिजाइन में तर्क देते हुए कहा कि सेवा में अवसर का लाभ सिर्फ एक बार दिया जाना चाहिए। आरक्षण का लाभ नौकरी में आते मिल जाता है और फिर पदोन्नति में भी आरक्षण का लाभ मिल रहा है। ऐसे में सामान्य वर्ग के कर्मचारियों को आपत्ति थी और आपत्ति जताते हुए हाई कोर्ट ने पदोन्नति के नियम को खारिज कर दिया है।

वही हाई कोर्ट ने पदोन्नति का नियम खारिज करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया कि आरक्षण रोस्टर के हिसाब से पदोन्नति हुए हैं उसे रिवर्ट किया जाए। आंकड़ों की माने तेरी कर्मचारी का प्रमोशन होता है तो खजाने पर सालाना ₹2500 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भार आएगा। कर्मचारियों को प्रमोशन नहीं मिलने के कारण प्रमोशन का इंतजार करते-करते अब तक 50,000 से ज्यादा कर्मचारी रिटायर हो गए हैं। जिसके बाद शिवराज सरकार ने बीच का रास्ता निकालते हुए कर्मचारियों को प्रमोशन देने के लिए कमेटी का गठन किया है।

बता दें कि नियमित कर्मचारी अधिकारी की संख्या की मान्यता प्रथम श्रेणी के 8162, द्वितीय श्रेणी के 32428, तृतीय श्रेणी के 449896, चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों की संख्या 64507 है। वहीं सार्वजनिक उपक्रम अर्ध शासकीय संस्थान में कर्मचारियों की संख्या 47028 है जबकि विश्वविद्यालय के 47, नगर स्थानीय निकाय के 34957, ग्रामीण स्थानीय निकाय के 5290 जबकि विकास प्राधिकरण के 829 कर्मचारी शामिल है।