सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना खतरनाक, वसूली अधिनियम का गजट नोटिफिकेशन, गृहमंत्री नरोत्तम ने दंगाइयों को चेताया

गृह मंत्री डॉ. मिश्रा ने बताया कि अधिनियम राजपत्र में प्रकाशन दिनांक से प्रभावी हो गया है।

mp narottam mishra

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट मध्यप्रदेश (MP) में संपत्ति नुकसान वसूली कानून (property damage recovery law) लागू हो गया है। दरअसल अब किसी भी दंगे-फसाद हड़ताल और धरना प्रदर्शन में निजी और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने पर उसकी भरपाई दंगेबाजे को करनी होगी। राज्य सरकार द्वारा कानून की अधिसूचना (notification) जारी की गई थी। जिसे अब गजट नोटिफिकेशन (Gazette Notification) में लाया गया है। सांप्रदायिक दंगे-हड़ताल धरना प्रदर्शन और जुलूस के दौरान पत्थरबाजी करने पर निजी संपत्ति है। सरकारी संपत्ति को क्षति पहुंचती है तो जिस ने नुकसान पहुंचाया है। उसके खिलाफ तुरंत एक्शन लिया जाएगा।

गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने इस मामले में चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि अब जिस घर से पत्थर निकलेगा। उसके घर को पत्थर बना दिया जाएगा। जो घर लोगों के घरों पर पत्थर फेंकते हैं। अब ऐसे लोगों के घरों से पत्थर निकाले जाएंगे। इसके लिए अब ऐसे लोगों को कानून के दायरे में लाया जाएगा।

गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने बताया है कि निजी एवं सार्वजनिक सम्पत्ति को नुकसान पहुँचाने वालों से नियामानुसार कार्यवाही की जाकर वसूली की जायेगी। इस संबंध में 30 अप्रैल, 2022 को मध्यप्रदेश राजपत्र में मध्यप्रदेश लोक एवं निजी सम्पत्ति को नुकसान का निवारण एवं नुकसानी की वसूली अधिनियम संबंधी अधिसूचना प्रकाशित कर दी गई है।

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गृह मंत्री डॉ. मिश्रा ने बताया कि अधिनियम राजपत्र में प्रकाशन दिनांक से प्रभावी हो गया है। निजी अथवा सार्वजनिक सम्पत्ति को नुकसान पहुँचाये जाने पर वसूली के लिये दावा किया जा सकेगा। इसके लिये प्रक्रिया निर्धारित की गई है। इसमें दावा अधिकरण का गठन कर अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति की जायेगी।

अधिसूचना में अध्यक्ष एवं सदस्यों की सेवा शर्तों, अधिकार और शक्तियों का उल्लेख किया गया है। दावों की सुनवाई होगी, साक्षियों के साक्ष्य शपथ पर लिखे जायेंगे। अधिनियम में दस्तावेजों के प्रकटीकरण के संबंध में सिविल प्रकिया संहिता-1908 से संबंधी उपबंध इन नियमों के अधीन जाँच के संबंध में लागू होंगे।

नरोत्तम मिश्रा ने बताया कि अधिनियम में किये गये प्रावधान अनुसार दावा अधिकरण का निर्णय लिखित आदेश होगा। इसे खुले न्यायालय में सुनाया जायेगा। प्रत्येक निर्णय/आदेश की मूल प्रति जिला मजिस्ट्रेट के न्यायिक अभिलेख कक्ष में प्रस्तुत की जायेगी। दावा आयुक्त प्रत्येक पक्ष को आदेश की एक प्रति नि:शुल्क प्रदान करेगा। अधिनियम में अधिकरण के आदेश के विरुद्ध उच्च न्यायालय के समक्ष 90 दिवस की अवधि में अपील प्रस्तुत करने का भी प्रावधान किया गया है।

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