MP Board : 10वीं के छात्रों के लिए महत्वपूर्ण अपडेट, इस योजना में हुए महत्वपूर्ण संशोधन, जानें किस तरह मिलेगा लाभ

माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा बेस्ट ऑफ फाइव को समाप्त करने का प्रस्ताव जहां राज्य शासन को भेजा जा चुका है। वही इस मुद्दे पर अभी भी स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा कोई भी निर्णय नहीं लिया जा रहा है।

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भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। एमपी बोर्ड 10वीं के छात्रों (MP board 10th students) के लिए बड़ी अपडेट है। मध्यप्रदेश (MP) में एक तरफ जहां स्कूल शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए सरकार नित नए प्रयोग कर रही है। वहीं दूसरी तरफ स्कूल शिक्षा विभाग (School Education Department) और माध्यमिक शिक्षा मंडल (Board of Secondary Education) के बीच कई मुद्दों पर असहमति छात्रों के भविष्य के साथ एक बड़ा खिलवाड़ माना जा रहा है। दरअसल इस बार माध्यमिक शिक्षा मंडल स्कूल शिक्षा विभाग के बीच असहमति MP board बेस्ट ऑफ फाइव योजना पद्धति (Best of five planning method) को लेकर है।

माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा बेस्ट ऑफ फाइव को समाप्त करने का प्रस्ताव जहां राज्य शासन को भेजा जा चुका है। वही इस मुद्दे पर अभी भी स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा कोई भी निर्णय नहीं लिया जा रहा है। विशेषज्ञों की माने तो वह भी मध्यप्रदेश के शैक्षणिक सत्र में बेस्ट ऑफ फाइव योजना को छात्रों के अधर भविष्य के रूप में देख रहे हैं। दरअसल मध्यप्रदेश में अब कक्षा 10वीं में परीक्षा परिणाम सुधारने के लिए छात्रों को अंग्रेजी और गणित जैसे महत्वपूर्ण विषयों में छूट देना शुरू कर दिया गया है।

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वहीं दोनों महत्वपूर्ण विषयों की पढ़ाई न करने के कारण छात्रों को भविष्य में नौकरी मिलना मुश्किल माना जा रहा है। माध्यमिक शिक्षा मंडल ने बेस्ट ऑफ फाइव योजना को बंद करने के लिए राज्य शासन को प्रस्ताव भेजा है। इसी बीच फिर से नियम में बदलाव हुए हैं। शिक्षा से जुड़े लोग भी इसे बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ मान रहे हैं। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा रिजल्ट के आंकड़ों की दुहाई दी जा रही है।

बता दें कि मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल 10वीं परीक्षा में 6 विषय शामिल है। जिसमें हिंदी अंग्रेजी संस्कृत के अलावा विज्ञान गणित और सामाजिक विज्ञान शामिल है। इसके अलावा एनएसक्यूएफ़ के विषय भी शामिल किए गए हैं। जिससे दसवीं में कुल सात विषय की परीक्षा छात्रों को पास करनी होगी। हालांकि इसको लेकर माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा महत्वपूर्ण आदेश जारी किए गए थे।

जिसमें शिक्षा मंडल ने छात्रों को हिंदी और अंग्रेजी लेना अनिवार्य किया था। साथ ही विज्ञान गणित और सामाजिक विज्ञान मुख्य विषय के रूप में चयनित किए गए थे। छोटे विषय के रूप में छात्र संस्कृत और एनएसक्यूएफ में से कोई एक विषय लेने की पात्रता रख सकते थे।

वही माध्यमिक शिक्षा मंडल के इस प्रस्ताव पर संस्कृत को वैकल्पिक विषय में शामिल करने पर स्कूल शिक्षा विभाग पूर्ण रूप से सहमत नहीं है। जिसके बाद माध्यमिक शिक्षा मंडल ने एक बार फिर से संशोधित आदेश जारी कर दिए हैं, अब छात्र अंग्रेजी, हिंदी और संस्कृत जैसे विषय में से किन्ही दो का चयन कर एनएसक्यूएफ के कोई एक विषय का चुनाव कर सकेंगे।

वर्ष 2022 के लिए भी बेस्ट ऑफ फाइव योजना लागू रहेगी। अगले साल इस सिस्टम को बंद करने की बात की जा रही थी। हालांकि करने की वजह से छात्रों के भविष्य को देखते हुए इस पद्धति को लागू रखने का फैसला लिया गया था। इस मामले में राज्य सरकार का कहना है कि छात्र गणित अंग्रेजी विज्ञान जैसे कठिन विषयों में से किसी पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं। बता दे एमपी बोर्ड 10वीं परीक्षा के छात्रों के रिजल्ट को बढ़ाने के लिए 2017 में एक नई व्यवस्था शुरू की गई थी।

जिसमें बेस्ट ऑफ फाइव योजना को लागू किया गया था। इस योजना के तहत दसवीं के 6 विषयों में से पांच विषय में पास करना छात्रों के लिए अनिवार्य होता है। ऐसे में इस योजना के लागू होने के बाद छात्रों द्वारा एक विषय के रूप में गणित और अंग्रेजी का चुनाव ही बंद कर दिया गया। जिसके बाद 2020 के अक्टूबर में माध्यमिक शिक्षा मंडल ने इस योजना को समाप्त करने की अनुशंसा की थी। हालांकि इस मामले में शिक्षा विभाग के अधिकारियों का मानना है कि बेस्ट ऑफ फाइव योजना को यहीं समाप्त किया जाता है तो दसवीं के परीक्षा परिणाम में 11 फीसद से अधिक की गिरावट रिकॉर्ड की जाएगी। जिसका नुकसान छात्रों को ही होगा।