नियमितीकरण की मांग पर अड़े अतिथि विद्वान, एक बार फिर दी आंदोलन की चेतावनी

अतिथि विद्वान संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष शंकरलाल खरवाडिया ने कहा कि नियमितीकरण सहित अन्य मांगों को लेकर कई बार प्रस्ताव बनाकर उच्च शिक्षा विभाग को दिया जा चुका है लेकिन सरकार द्वारा हमारी मांगों को लेकर कोई भी हल नहीं निकाला गया है।

शिक्षकों

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट मध्यप्रदेश (MP) में एक तरफ जहां अधिकारी कर्मचारियों ने DA Hike और एरियर (arrears) की मांग को लेकर सरकारी को आंदोलन की चेतावनी दी है। वहीं अब प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग में कार्यरत अतिथि विद्वान (guest scholar) भी आंदोलन के मूड में आ गए हैं। दरअसल फालेन आउट के लिए हुई भर्ती के लिए अतिथि विद्वान घर से 100 से 500 किलोमीटर दूर रहकर महाविद्यालय में अपनी सेवा दे रहे हैं। वही अतिथि विद्वान की मांग है कि सरकार आपसी सहमति से स्थान बदलने की नीति बनाए। इसके अलावा नियमितीकरण (regularization) और सहायक प्राध्यापक भर्ती नियुक्ति को लेकर विद्वानों द्वारा लगातार व्यापक स्तर पर मांग की जा रही है।

मामले में उच्च शिक्षा विभाग (higher education department)  में कार्यरत अतिथि विद्वानों ने पूर्व की कमलनाथ सरकार (kamalnath government) पर भी आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि नियमितीकरण और विवादित सहायक प्राध्यापक भर्ती नियुक्ति को सेवा से बाहर किया जाए। उस दौरान विपक्ष में रहते हुए BJP द्वारा अतिथि विद्वानों को भरोसा दिलाया गया था और कहा गया था कि सबसे पहले अतिथि विद्वानों की मांग को पूरा करेगी।

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मध्यप्रदेश अतिथि विद्वान नियमितीकरण संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष सुरजीत सिंह भदौरिया का कहना है कि अब सरकार भी हमारे साथ धोखा कर रही है। BJP सरकार में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के वेतन से भी कम मानदेय पर हमने सेवाएं दी है। फिर भी हमारे मांगों को अनदेखा किया जा रहा है। जिसके बाद अतिथि विद्वानों के पास केवल आंदोलन का ही एक रास्ता बचा है।

अतिथि विद्वान संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष शंकरलाल खरवाडिया ने कहा कि नियमितीकरण सहित अन्य मांगों को लेकर कई बार प्रस्ताव बनाकर उच्च शिक्षा विभाग को दिया जा चुका है लेकिन सरकार द्वारा हमारी मांगों को लेकर कोई भी हल नहीं निकाला गया है। बता दे कि अतिथि विद्वान नियमितीकरण सहित अन्य राज्यों की तहत पॉलिसी और आपात सेवा के नियम की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा जैसे विद्वानों द्वारा कई बार प्रदेश में व्यापक स्तर पर आंदोलन भी किया जा चुका है। हालांकि आश्वासन के अलावा किसी भी सरकार द्वारा उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया है। जिसके बाद एक बार फिर से अतिथि विद्वानों ने प्रदेश में आंदोलन की चेतावनी दी है।