विभाग की तैयारी, डीपीसी कार्यालय को डीईओ में संविलियन की कवायद, फिर उठा AEO भर्ती का मुद्दा

राज्य शिक्षा सेवा के गठन के बाद स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जिला परियोजना समन्वयक कार्यालय को समाप्त कर उसे डीईओ में सम्मिलित किया जाना है।

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भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग (MP School education department) की तरफ से होने वाली AEO भर्ती (AEO MP Recruitment) पर अब एक बार फिर से सवाल खड़े होने लगे। दरअसल 9 साल का समय बीतने के बावजूद अभी तक AEO की भर्ती प्रक्रिया को पूरा नहीं किया जा सका है। हालाकि डीपीसी कार्यालय (DPC Office) का डीईओ (DEO) में संविलियन करने की कवायद जारी है।

दरअसल राज्य शिक्षा सेवा के गठन के बाद स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जिला परियोजना समन्वयक कार्यालय को समाप्त कर उसे डीईओ में सम्मिलित किया जाना है। वही इस नए नियम के तहत पहली से 12वीं तक की पूरी व्यवस्था जिला शिक्षा अधिकारी को संभालनी होती है जबकि नई व्यवस्था के बाद डीईओ (DEO) का सहायक संचालक ब्लॉक स्तर के एरिया एजुकेशन ऑफिसर (Area Education officer) सहित अन्य पर नियंत्रण हो जाएगा।

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इसका लाभ होगा कि पूरी शिक्षा व्यवस्था के लिए एक अधिकारी की जिम्मेदारी तय होगी। लेकिन 9 साल का वक्त बीत जाने के बाद भी अधिकारी की निष्क्रियता का परिणाम स्कूल शिक्षा व्यवस्था में देखने को मिल रहा है। जहां सबसे सशक्त स्तर पर भर्ती प्रक्रिया आयोजित नहीं की जा रही है। स्कूल शिक्षा सुधार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए 2013 में राज्य शिक्षा सेवा का गठन किया गया था। इसके तहत अधिकारियों ने व संचालन कितने पदों पर भर्ती कर ली। हालांकि एरिया एजुकेशन ऑफिसर के पदों पर विज्ञापन जारी कर परीक्षा का आयोजन किया गया था।

वही रिजल्ट को लेकर कुछ आवेदकों द्वारा हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी गई थी। जिसके बाद हाईकोर्ट ने याचिकाओं का निराकरण करते हुए भर्ती का रास्ता साफ किया था। जनवरी 2015 में एक बार फिर से प्रक्रिया शुरू की गई। जिसमें लगभग 20000 परीक्षार्थियों का सत्यापन कराया गया। हालांकि विसंगतियों को लेकर एक बार फिर से मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और सुप्रीम कोर्ट ने इस पर निर्णय सरकार के पाले में डाल दिया।

वहीं 2013 में जारी परीक्षा परिणाम की मेरिट के आधार पर नियुक्ति की मांग तब से जारी है लेकिन अब तक कोई फैसला नहीं आया है। इस पर फैसला न आने की स्थिति में स्कूल शिक्षा विभाग ने एक बार फिर से एपीसी, बीआरसीसी सहित अन्य पदों पर परीक्षा आयोजित शुरू कर दी। जिस पर बीआरसीसी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी। हाईकोर्ट ने बीआरसीसी को परीक्षा के विरुद्ध स्टे दे दिया है। तब से यह मामला अधर में लटक गया है। एक बार फिर से अब इसके लिए प्रक्रिया की मांग शुरू हो गई है।